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Ayodhya News: समूह सखियों ने गांधी पार्क में किया प्रदर्शन
Wed, 16 Sep 2026 12:39 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Wed, 16 Sep 2026 12:39 AM IST
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अयोध्या। महज 66 रुपये प्रतिदिन के मानदेय में घर चलाने की मजबूरी से परेशान समूह सखियों का गुस्सा मंगलवार को गांधी पार्क में फूट पड़ा। स्वयं सहायता समूह कैडर संघ के बैनर तले जिले के 11 ब्लॉकों से 500 से अधिक महिलाएं जुटीं और मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। महिलाओं ने कहा कि पांच साल से दो हजार रुपये प्रतिमाह में काम लिया जा रहा है। जिम्मेदारियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।
प्रदर्शनकारी महिलाओं ने बताया कि समूह की बैठकें कराने, महिलाओं को सरकारी योजनाओं से जोड़ने, अभिलेखीय और डिजिटल कार्य में सहयोग करने समेत कई जिम्मेदारियां उनके पास हैं। गांवों में आने-जाने का खर्च भी इसी मानदेय से करना पड़ता है। ऐसे में दो हजार रुपये की पूरी राशि इसी में खर्च हो जाती है।
महिलाओं ने मानदेय बढ़ाकर 15 से 20 हजार रुपये प्रतिमाह करने के साथ पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा और स्वास्थ्य बीमा की मांग की। डिजिटल कार्य के लिए टैबलेट या अन्य उपकरण, पहचान पत्र और निर्धारित ड्रेस उपलब्ध कराने तथा मानदेय का भुगतान समय से सीधे बैंक खाते में करने की भी मांग उठाई।
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पूरा ब्लॉक की पूनम ने बताया कि समूह सखियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ दिया जाए। डिजिटल काम करने को कहा जाता है, लेकिन संसाधन नहीं दिए जाते। डिजिटल उपकरण दिए जाएं। वहीं बीकापुर की मालती ने कहा कि पांच साल से दो हजार रुपये में काम कर रहे हैं। इतने कम मानदेय में घर का खर्च और दवाइयां कैसे चलेंगी? दिन का करीब 66 रुपये ही मिलता है। बीकापुर से आईं चंद्रवती ने बताया कि मानदेय नहीं बढ़ा तो हम लोग काम नहीं करेंगे।
ड्रेस की सुविधा भी मिलनी चाहिए। काम के हिसाब से 15 से 20 हजार रुपये मानदेय दिया जाए। तारुन की रीता शुक्ला ने बताया कि काम के हिसाब से मानदेय नहीं मिलता है। दो हजार रुपये तो आने-जाने में ही खर्च हो जाते हैं। सभी कैडरों का मानदेय बढ़ाया जाना चाहिए।
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प्रदर्शनकारी महिलाओं ने बताया कि समूह की बैठकें कराने, महिलाओं को सरकारी योजनाओं से जोड़ने, अभिलेखीय और डिजिटल कार्य में सहयोग करने समेत कई जिम्मेदारियां उनके पास हैं। गांवों में आने-जाने का खर्च भी इसी मानदेय से करना पड़ता है। ऐसे में दो हजार रुपये की पूरी राशि इसी में खर्च हो जाती है।
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महिलाओं ने मानदेय बढ़ाकर 15 से 20 हजार रुपये प्रतिमाह करने के साथ पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा और स्वास्थ्य बीमा की मांग की। डिजिटल कार्य के लिए टैबलेट या अन्य उपकरण, पहचान पत्र और निर्धारित ड्रेस उपलब्ध कराने तथा मानदेय का भुगतान समय से सीधे बैंक खाते में करने की भी मांग उठाई।
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पूरा ब्लॉक की पूनम ने बताया कि समूह सखियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ दिया जाए। डिजिटल काम करने को कहा जाता है, लेकिन संसाधन नहीं दिए जाते। डिजिटल उपकरण दिए जाएं। वहीं बीकापुर की मालती ने कहा कि पांच साल से दो हजार रुपये में काम कर रहे हैं। इतने कम मानदेय में घर का खर्च और दवाइयां कैसे चलेंगी? दिन का करीब 66 रुपये ही मिलता है। बीकापुर से आईं चंद्रवती ने बताया कि मानदेय नहीं बढ़ा तो हम लोग काम नहीं करेंगे।
ड्रेस की सुविधा भी मिलनी चाहिए। काम के हिसाब से 15 से 20 हजार रुपये मानदेय दिया जाए। तारुन की रीता शुक्ला ने बताया कि काम के हिसाब से मानदेय नहीं मिलता है। दो हजार रुपये तो आने-जाने में ही खर्च हो जाते हैं। सभी कैडरों का मानदेय बढ़ाया जाना चाहिए।