Ayodhya: चढ़ावा चोरी की जांच के बीच चंपत राय ने जारी किया नौ पन्नों का बयान, बैंक अकाउंट को लेकर कही ये बात
श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की अयोध्या में सामाजिक सक्रियता की चर्चाओं के बीच बयान जारी हुआ है। इस बयान में चंपत राय ने मंदिर की व्यवस्था और बैंक अकाउंट के संचालन पर चर्चा की है।
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चंपत राय का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अयोध्या में उनकी व डॉ. अनिल मिश्रा की सामाजिक सक्रियता को लेकर चर्चाएं लगातार हो रही हैं। बता दें कि चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित एसआईटी की जांच-पड़ताल अभी जारी है।
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ऑनलाइन होता है भुगतान, सभी टैक्स जमा किए जाते हैं
चंपत राय ने बैंक अकाउंट के संचालन व भुगतान को लेकर कहा कि श्री राम मंदिर ट्रस्ट का बैंक अकाउंट बिना चेक बुक अकाउंट है, सभी भुगतान बैंक ट्रान्सफर के द्वारा ही होता है। नगद का उपयोग नहीं होता है। अतः आर्थिक व्यवहार में पारदर्शिता है। सभी लेन-देन में संपूर्ण सरकारी नियमों का पालन होता है। सरकार के सभी विभागों के टैक्स जमा किये जाते हैं, सरकार के किसी टैक्स में कभी चोरी नहीं की गयी।
उन्होंने कहा कि श्री राम मंदिर ट्रस्ट के खाते तीन बैंकों में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा में हैं। सभी प्रकार का भुगतान ऑनलाइन किया जाता है।
रामनगरी के मठ-मंदिरों में जाकर साधु-संतों से कर रहे मुलाकात
चढ़ावा प्रकरण में लापरवाही को लेकर सवालों के घेरे में रहे राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय 25 जुलाई से लगातार रामनगरी के मठ-मंदिरों में जाकर साधु-संतों से मुलाकात कर रहे हैं। अब पिछले करीब एक सप्ताह से डॉ. अनिल मिश्र भी विभिन्न सार्वजनिक कार्यक्रमों में सक्रिय नजर आ रहे हैं। ऐसे समय में दोनों की बढ़ी सक्रियता को लेकर कई मायने निकाल रहे हैं।
ट्रस्ट से जुड़े प्रमुख चेहरों की सार्वजनिक गतिविधियां बढ़ने से यह सवाल उठ रहा है कि क्या दोनों पदाधिकारी अब सामाजिक और धार्मिक स्तर पर अपनी सक्रिय उपस्थिति बनाए रखने की रणनीति के तहत कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं। चढ़ावा प्रकरण की जांच के बाद अब एसआईटी की रिपोर्ट ट्रस्ट तक पहुंच चुकी है।
ऐसे में मंदिर व्यवस्था से जुड़े लोगों की भूमिका और आगे होने वाली कार्रवाई को लेकर भी नजरें बनी हुई हैं। चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र की बढ़ी सक्रियता तथा गोपाल राव की अयोध्या वापसी ने मंदिर के प्रशासनिक और संगठनात्मक समीकरण को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दिया है।