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अखिलेश मंत्रिमंडल का विस्तार थोड़ी देर में
लखनऊ/ब्यूरो
Updated Thu, 18 Jul 2013 10:47 AM IST
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सारी अटकलें और कयास दरकिनार अब उत्तर प्रदेश मंत्रिपरिषद का विस्तार गुरुवार को होगा। नये मंत्रियों को राजभवन में राज्यपाल बीएल जोशी शपथ दिलाएंगे।
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राजभवन ने शपथ ग्रहण समारोह की घोषणा बुधवार को कर दी। इसके साथ ही मंत्रिपरिषद में शामिल किए जाने वाले चेहरों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस समय 56 मंत्री हैं जबकि विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों की संख्या के लिहाज से यह संख्या 60 हो सकती है।
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विस्तार में तीन से चार लोगों को शपथ दिलाए जाने की उम्मीद है, जिसमें दो को कैबिनेट और दो को राज्यमंत्री के रूप में शामिल किया जा सकता है। कुछ मंत्रियों को बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है।
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जानकारी के मुताबिक, विस्तार में जातीय समीकरण साधने की पूरी कोशिश होगी। मंत्रिपरिषद में एक नया ब्राह्मण या भूमिहार को शामिल किया जा सकता है।
सरकार के गठन के समय अखिलेश मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री के रूप में तीन ब्राह्मण चेहरे शामिल किए गए थे। जिसमें कामेश्वर उपाध्याय, ब्रह्माशंकर त्रिपाठी और राजाराम पाण्डेय शामिल थे। बाद में उपाध्याय की मृत्यु हो गई जबकि राजाराम पांडेय महिलाओं पर विवादित टिप्पणियों की वजह से बाहर कर दिए गए थे।
बृहस्पतिवार के विस्तार में इस कमी की भरपाई की कोशिश हो सकती है। कुंडा कांड के चलते मंत्रिमंडल से बाहर होने वाले राजा भैया की वापसी की अटकलें हैं। हालांकि खुद राजा भैया ने इसे खारिज किया है।
ब्राह्मण चेहरे के रूप में प्रतापगढ़ के शिवाकांत ओझा के नाम की चर्चा है जबकि भूमिहार कैंडिडेट के रूप में बलिया के नारद राय की दावेदारी भी मजबूत बताई जा रही है।
खादी एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री हाजी रियाज अहमद को कैबिनेट दर्जा दिया जा सकता है। हालांकि हाजी के देश से बाहर होने के कारण गुरुवार को उनके शपथ लेने की संभावना कम ही है।
इसी तरह इस विस्तार में यदि राजा भैया को जगह नहीं मिल पाती तो भी उनकी कैबिनेट सीट पक्की मानी जा रही है। इस तरह कैबिनेट मंत्री के रूप में अभी ज्यादा से ज्यादा दो चेहरे ही शामिल किए जाने की उम्मीद है। जिससे भविष्य में कुछ फेरबदल करके इन दोनों लोगों को समायोजित किया जा सके।
यह भी है दौड़ में :
जानकारी के मुताबिक देवरिया के शाकिर अली, जौनपुर के ललई यादव, सहारनपुर के और विधान परिषद सदस्य उमर अली खान, कानपुर से विधान परिषद सदस्य नरेश उत्तम के भी मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की बात कही जा रही है।
बताया जाता है कि कुर्मी समीकरण दुरुस्त करने व कानपुर से लेकर बुंदेलखंड में कुर्मी फैक्टर का लाभ उठाने के लिए उत्तम को मंत्री पद की शपथ दिलाई जा सकती है। नरेश उत्तम सपा के पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के अध्यक्ष हैं।
शाकिर अली पहले भी मुलायम की सरकार में मंत्री रह चुके हैं। उनका नाम भी संभावित मंत्रियों में शामिल बताया जाता है। उमर अली खान जामा मस्जिद के शाही इमाम मौलाना अहमद बुखारी के दामाद हैं।
हालांकि मो. आजम खाँ और बुखारी के बीच 36 के आंकड़े के चलते उमर अब तक मंत्रिमंडल में शामिल नहीं हो पाए हैं। पर, इस बार उनको शामिल करने की बात कई स्तर से कही जा रही है।
यह भी तर्क दिया जा रहा है कि सपा मुखिया ने इसके लिए आजम को राजी कर लिया है। सूत्रों का यह भी कहना है कि प्रदेश मंत्रिमंडल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए किसी महिला को भी शपथ दिलाई जा सकती है।
इसमें गाजीपुर की शादाब फातिमा और लखनऊ की रहने वाली विधानपरिषद सदस्य डा. मधु गुप्ता का नाम प्रमुख रूप से बताया जा रहा है। शादाब फातिमा पार्टी की पुरानी नेता हैं। डा. मधु गुप्ता का मुलायम सिंह यादव के परिवार से पारिवारिक रिश्ता है।
इनकी पदोन्नति की चर्चा :
इस विकल्प पर भी चर्चा हो रही है कि स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्रियों में कुछ को पदोन्नति देकर कैबिनेट स्तर का बना दिया जाए। नए चेहरों को राज्यमंत्री के रूप में शामिल कर लिया जाए।
राज्यमंत्रियों में कुछ लोगों को पदोन्नति देने के लिए स्वतंत्र प्रभार मंत्री घोषित किया जा सकता है। इसमें अभिषेक मिश्र, मनोज पाण्डेय, गायत्री प्रजापति के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं।
तर्क दिया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर जातीय समीकरणों को दुरुस्त करने के लिए इन्हें स्वतंत्र प्रभार बनाकर इनकी तरक्की का संदेश दिया जा सकता है।