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जेब और सेहत पर भारी हाईब्रिड टमाटर

Wed, 10 Jul 2013 05:30 AM IST
Lucknow
Lucknow Updated Wed, 10 Jul 2013 05:30 AM IST
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लखनऊ। क्या आपकी रसोई में भी रखे टमाटर जल्दी गलने लगे हैं। काटने पर उनका भीतरी हिस्सा गला हुआ मिलता है, तो यह कुसूर है उसके हाईब्रिड होने का। पारंपरिक बीजों से खेती से उपजे देसी टमाटर लखनऊ के बाजारों से गायब करने के बाद हाईब्रिड उपज ही हर जगह नजर आ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार ये टमाटर न तो पोषण की दृष्टि से सही हैं और न ही स्वाद में देसी टमाटरों के बराबर हैं।
शहर के अधिकतर खुदरा दुकानदार हाईब्रिड टमाटर ही बेच रहे हैं। ये भड़कीले लाल और मोटे तो हैं, लेकिन स्वाद में कमतर हैं। इनकी कीमत भी 80 से 95 रुपये प्रति किलो है। दूसरी ओर देशी टमाटर मार्केट से गायब हो चुके हैं या फिर कुछेक दुकानों पर ही बिक रहे हैं। खास बात है कि इनकी कीमत 70 से 80 रुपये प्रति किलो है। जब हाईब्रिड फसलें तैयार की जाती हैं तो अपेक्षा की जाती है कि वे कम दरों पर फल-सब्जियां उपलब्ध करवाने में उपयोगी होंगी, लेकिन दामों में यह अंतर विपरीत तस्वीर पेश कर रहा है। ऐसे में सवाल लाजिम है कि जब हाईब्रिड टमाटर पोषण, सेहत, दामों, जैसी चीजों में देशी टमाटरों से पीछे है तो फिर इतनी कवायद के फायदे क्या हुए? देश में हाईब्रिड और जेनेटिकली मॉडिफाइड बीजों के खिलाफ आंदोलन कर रहे जीएफ फ्री इंडिया के डॉ. पंकज मिश्रा बताते हैं हाईब्रिड फसलों विशेषकर टमाटर सेहत के लिए नुकसानदेह ही साबित हो रहे हैं। इनके बीज शरीर में एसिड की मात्रा बढ़ा रहे हैं। यह बात मेडिकल साइंस में पहले ही साबित हो चुकी है।
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डॉ. मिश्रा के अनुसार उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में कई किसानों के संपर्क में वे हैं जो बाजार की मांग के अनुरूप तो हाईब्रिड टमाटर उगा रहे हैं, लेकिन अपने घरेलू उपयोग के लिए देशी टमाटरों को भी उगा रहे हैं। इन हालात में समझा जा सकता है कि मार्केट और फूड प्रोसेसिंग उद्योगों में पैदा हो रही मांग को पूरा करने के लिए इन टमाटरों की पैदावार की जा रही है, इन्हें रसोई में उपयोग करना विस्तृत शोध का विषय होना चाहिए। डॉ. मिश्रा बताते हैं कि क्रॉस फॉलिनेशन के जरिये इन्हें तैयार करते समय सिर्फ उपज और आकार बढ़ाने पर ध्यान दिया जाता है। जबकि पोषक तत्वों की इनमें उसी अनुपात में वृद्धि नहीं होती। वे बताते हैं कि उत्तर प्रदेश की खाद्य सुरक्षा को इससे नुकसान हो सकता है क्योंकि आने वाले वक्त में पौष्टिक तत्वों से भरे भोजन की जरूरत नागरिकों को ज्यादा होगी और हाईब्रिड व जीएम फूड यह उपलब्ध नहीं करवा सकेगा।
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