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ऑनर किलिंग को बताया खुदकुशी
Lucknow
Updated Thu, 25 Apr 2013 02:37 PM IST
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लखनऊ। माल के गांव मंझी में युवती की ऑनर किलिंग को पुलिस ने खुदकुशी में बदल डाला। रातों-रात लाश फूंककर भागे पिता व दो भाइयों को बीकेटी क्षेत्र से पकड़ा। तीनों के बयान के आधार पर पुलिस ने खुदकुशी के लिए मजबूर करने व साक्ष्य मिटाने का मुकदमा दर्ज किया है। इसमें पिता की डांट पर जहर खाकर जान देने की कहानी है, आधी रात को युवती के चीखने व अन्य बातों को पुलिस ने नकार दिया है।
गांव मंझी में शांती उर्फ गिल्ली (19) की शनिवार रात संदिग्ध हालात में मौत के तुरंत बाद लाश को बाग में फूंककर भागे पिता नंदकुमार यादव उर्फ साहब लाल, उसके बेटे जसकरन व रविकांत को पुलिस ने कुछ लोगों की मध्यस्थता पर बीकेटी क्षेत्र से पकड़ा। तीनों को सीओ मलिहाबाद के ऑफिस ले जाकर दिन भर पूछताछ की गई। इसके बाद पुलिस ने गांव मड़वाना निवासी चौकीदार कल्लू की तहरीर पर तीनों के खिलाफ खुदकुशी के लिए मजबूर करने व साक्ष्य मिटाने की रिपोर्ट दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया।
सीओ मलिहाबाद का कहना है कि नंदकुमार ने अपनी बेटी शांती को डांटा था। इस पर उसने जहर खाकर जान दे दी। नंदकुमार ने बयान दिया है कि वह अपने दोनों बेटों जसकरन व रविकांत के साथ खेत में पिपरमेंट की पौध लगा रहा था। घर में शांती अकेली थी। दोपहर दो बजे वह खाना खाने पहुंचा तो शांती गायब थी। वह एक घंटे बाद लौटी तो उसे डांटा और फिर खेत लौट गया। रात आठ बजे परिवार के साथ घर पहुंचा तब तक शांती जहर खाकर जान दे चुकी थी। पुलिस कार्रवाई की घबराहट में उसने बेटों की मदद से शांती का शव गाड़ी में लादा और बाग में ले जाकर फूंक दिया। अवशेष गोमती में बहाकर लौटा और घर पर ताला लगाकर परिवार समेत भाग निकला। कुछ ऐसे ही बयान जसकरन व रविकांत ने दिए हैं। इसी आधार पर पुलिस का मानना है कि डांट से क्षुब्ध शांती ने जहर खाकर जान दी थी और नंदकुमार व उसके दोनों बेटों ने साक्ष्य मिटाए हैं।
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उल्लेखनीय है कि गांव मड़वाना निवासी चौकीदार कल्लू ने शांती की रहस्यमय हालात में मौत की रविवार को थाने में तहरीर दी थी। उसने शव को रात में ही बाग में फूंकने व अवशेष गोमती में फेंकने का जिक्र किया था। चौकीदार व गांव के अन्य लोगों ने पुलिस को जानकारी दी थी कि शनिवार देर रात शांती की चीख सुनाई दी। हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा पा चुके नंदकुमार की दहशत के चलते कोई सामने नहीं आया। नंदकुमार व उसके परिवार को शांती का शव टाटा मैजिक में लादते देखा। दबे पांव बाग तक गए। वहां नंदकुमार ने शव पर मिट्टी का तेल उड़ेल कर फूंक दिया। थोड़ी देर बाद अस्थिपंजर गोमती में फेंककर भाग निकले थे।
पुलिस सूत्रों ने जानकारी दी है कि शांती की एक दलित युवक से नजदीकी का नंदकुमार विरोध कर रहा था। ग्रामीण दबी जुबान से ऑनर किलिंग का आरोप लगा रहे हैं लेकिन किसी ने सामने आने की हिम्मत नहीं दिखाई। इस पर चौकीदार की तहरीर पर मामला दर्ज किया गया है।
मुकदमा दर्ज होते ही उठे सवाल
नंदकुमार यादव, उसके बेटे जसकरन व रविकांत के खिलाफ शांती को खुदकुशी के लिए मजबूर करने व साक्ष्य मिटाने का मामला दर्ज होते ही सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शांती ने यदि शनिवार रात आठ बजे से पहले जहर खाकर खुदकुशी कर ली थी तो आधी रात को उसकी चीख कैसे गूंजी? चीख इतनी तेज थी कि आसपास के लोगों की नींद खुल गई। परिवार ने कैसे मान लिया कि शांती ने जहर खाकर जान दी थी। कथित तौर पर रात आठ बजे खेत से लौटे नंदकुमार को शांती को अस्पताल ले जाना चाहिए था। खुदकुशी की दशा में शांती का शव रातों-रात बाग में ले जाकर फूंकने व साक्ष्य मिटाने की जरूरत नहीं थी। बीमारी का बहाना करके सुबह भी उसकी अंत्येष्टि की जा सकती थी।
मान-सम्मान के लिए मारी गई शांती
ग्रामीणों ने पुलिस को जानकारी दी है कि नंदकुमार यादव व उसके परिवार का इलाके में खासा दबदबा है। एक दलित युवक से बेटी की नजदीकी को नंदकुमार बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था। उसने शनिवार को शाम शांती को अपने दोस्त के साथ देख लिया था। इसके चलते उसकी पिटाई की और देर रात हत्या करके लाश फूंक दी।
विधि विशेषज्ञों की सलाह पर होगी कार्रवाई
शांती की मौत के मामले में गांव का कोई भी व्यक्ति कुछ भी बताने को तैयार नहीं है। ऐसी दशा में पुलिस ने शांती के पिता नंदकुमार यादव, भाई जसकरन व रविकांत के बयान के आधार पर ही खुदकुशी के लिए प्रेरित करने व साक्ष्य मिटाने की रिपोर्ट लिखी है। विधि विशेषज्ञों से सलाह लेकर अगली कार्रवाई की जाएगी।
- जे रविंदर गौड, एसएसपी
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गांव मंझी में शांती उर्फ गिल्ली (19) की शनिवार रात संदिग्ध हालात में मौत के तुरंत बाद लाश को बाग में फूंककर भागे पिता नंदकुमार यादव उर्फ साहब लाल, उसके बेटे जसकरन व रविकांत को पुलिस ने कुछ लोगों की मध्यस्थता पर बीकेटी क्षेत्र से पकड़ा। तीनों को सीओ मलिहाबाद के ऑफिस ले जाकर दिन भर पूछताछ की गई। इसके बाद पुलिस ने गांव मड़वाना निवासी चौकीदार कल्लू की तहरीर पर तीनों के खिलाफ खुदकुशी के लिए मजबूर करने व साक्ष्य मिटाने की रिपोर्ट दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया।
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सीओ मलिहाबाद का कहना है कि नंदकुमार ने अपनी बेटी शांती को डांटा था। इस पर उसने जहर खाकर जान दे दी। नंदकुमार ने बयान दिया है कि वह अपने दोनों बेटों जसकरन व रविकांत के साथ खेत में पिपरमेंट की पौध लगा रहा था। घर में शांती अकेली थी। दोपहर दो बजे वह खाना खाने पहुंचा तो शांती गायब थी। वह एक घंटे बाद लौटी तो उसे डांटा और फिर खेत लौट गया। रात आठ बजे परिवार के साथ घर पहुंचा तब तक शांती जहर खाकर जान दे चुकी थी। पुलिस कार्रवाई की घबराहट में उसने बेटों की मदद से शांती का शव गाड़ी में लादा और बाग में ले जाकर फूंक दिया। अवशेष गोमती में बहाकर लौटा और घर पर ताला लगाकर परिवार समेत भाग निकला। कुछ ऐसे ही बयान जसकरन व रविकांत ने दिए हैं। इसी आधार पर पुलिस का मानना है कि डांट से क्षुब्ध शांती ने जहर खाकर जान दी थी और नंदकुमार व उसके दोनों बेटों ने साक्ष्य मिटाए हैं।
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उल्लेखनीय है कि गांव मड़वाना निवासी चौकीदार कल्लू ने शांती की रहस्यमय हालात में मौत की रविवार को थाने में तहरीर दी थी। उसने शव को रात में ही बाग में फूंकने व अवशेष गोमती में फेंकने का जिक्र किया था। चौकीदार व गांव के अन्य लोगों ने पुलिस को जानकारी दी थी कि शनिवार देर रात शांती की चीख सुनाई दी। हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा पा चुके नंदकुमार की दहशत के चलते कोई सामने नहीं आया। नंदकुमार व उसके परिवार को शांती का शव टाटा मैजिक में लादते देखा। दबे पांव बाग तक गए। वहां नंदकुमार ने शव पर मिट्टी का तेल उड़ेल कर फूंक दिया। थोड़ी देर बाद अस्थिपंजर गोमती में फेंककर भाग निकले थे।
पुलिस सूत्रों ने जानकारी दी है कि शांती की एक दलित युवक से नजदीकी का नंदकुमार विरोध कर रहा था। ग्रामीण दबी जुबान से ऑनर किलिंग का आरोप लगा रहे हैं लेकिन किसी ने सामने आने की हिम्मत नहीं दिखाई। इस पर चौकीदार की तहरीर पर मामला दर्ज किया गया है।
मुकदमा दर्ज होते ही उठे सवाल
नंदकुमार यादव, उसके बेटे जसकरन व रविकांत के खिलाफ शांती को खुदकुशी के लिए मजबूर करने व साक्ष्य मिटाने का मामला दर्ज होते ही सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शांती ने यदि शनिवार रात आठ बजे से पहले जहर खाकर खुदकुशी कर ली थी तो आधी रात को उसकी चीख कैसे गूंजी? चीख इतनी तेज थी कि आसपास के लोगों की नींद खुल गई। परिवार ने कैसे मान लिया कि शांती ने जहर खाकर जान दी थी। कथित तौर पर रात आठ बजे खेत से लौटे नंदकुमार को शांती को अस्पताल ले जाना चाहिए था। खुदकुशी की दशा में शांती का शव रातों-रात बाग में ले जाकर फूंकने व साक्ष्य मिटाने की जरूरत नहीं थी। बीमारी का बहाना करके सुबह भी उसकी अंत्येष्टि की जा सकती थी।
मान-सम्मान के लिए मारी गई शांती
ग्रामीणों ने पुलिस को जानकारी दी है कि नंदकुमार यादव व उसके परिवार का इलाके में खासा दबदबा है। एक दलित युवक से बेटी की नजदीकी को नंदकुमार बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था। उसने शनिवार को शाम शांती को अपने दोस्त के साथ देख लिया था। इसके चलते उसकी पिटाई की और देर रात हत्या करके लाश फूंक दी।
विधि विशेषज्ञों की सलाह पर होगी कार्रवाई
शांती की मौत के मामले में गांव का कोई भी व्यक्ति कुछ भी बताने को तैयार नहीं है। ऐसी दशा में पुलिस ने शांती के पिता नंदकुमार यादव, भाई जसकरन व रविकांत के बयान के आधार पर ही खुदकुशी के लिए प्रेरित करने व साक्ष्य मिटाने की रिपोर्ट लिखी है। विधि विशेषज्ञों से सलाह लेकर अगली कार्रवाई की जाएगी।
- जे रविंदर गौड, एसएसपी