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निजी हाथों में जाएगी नगर निगम की गृहकर वसूली!
Lucknow
Updated Tue, 23 Apr 2013 05:30 AM IST
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लखनऊ। नगर निगम प्रशासन गृहकर वसूली को निजी हाथों में देने की मन बना रहा है। दिल्ली की एक कंपनी ने इस संबंध में नगर निगम को एक प्रस्ताव भी दिया है। इसमें कंपनी ने नगर निगम की गृहकर से आमदनी को दोगुना करने दावा किया है। जिसके बाद नगर आयुक्त प्रस्ताव पर अमल को लेकर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार प्रस्ताव को लागू करने के लिए उसे नगर निगम कार्यकारिणी और सदन में मंजूरी के लिए पेश करने का विचार किया जा रहा है। नगर निगम ने बीते वित्तीय वर्ष तक राजधानी के करीब 4.50 लाख मकानों से 150 करोड़ रुपए गृहकर वसूली का लक्ष्य रखा था। इसे चालू वित्तीय वर्ष में बढ़ाकर 180 करोड़ रुपए कर दिया गया है। नगर निगम में सदन में यह मामला कई बार जोरशोर से उठा कि शहर में करीब 30 प्रतिशत मकान गृहकर निर्धारण से छूटे हैं। यदि इनका गृहकर निर्धारण हो जाए तो नगर निगम की आमदनी काफी बढ़ जाएगी। नगर निगम प्रशासन भी इस बात को स्वीकार करता है। इसको लेकर नगर आयुक्त ने कई बार कड़े निर्देश भी जारी किए हैं। उसके बाद भी राजधानी में शत-प्रतिशत घरों का गृहकर निर्धारण नहीं हो सका है। नगर आयुक्त राकेश कुमार सिंह ने बताया कि दिल्ली की एक कंपनी ने यह प्रस्ताव दिया है कि यदि उसे गृहकर वसूली का काम दिया जाए तो वह नगर निगम की आमदनी को दोगुना कर देगी। इसके एवज में वह गृहकर वसूली का आठ प्रतिशत शुल्क लेगी। कंपनी दिल्ली में काम भी कर रही है। नगर आयुक्त के मुताबिक प्रस्ताव का अभी अध्ययन किया जा रहा है। प्रस्ताव पर अमल से पहले नगर निगम कार्यकारिणी और सदन से उसे पास कराना होगा। बिना उसके प्रस्ताव को लागू नहीं किया जा सकता।
गृहकर निर्धारण प्रक्रिया आसान बनाने पर जोर ः निजी कंपनी ने नगर निगम को जो प्रस्ताव दिया गया है उसमें गृहकर निर्धारण की प्रक्रिया को आसान बनाने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही वसूली के लिए एक बार ओटीएस योजना शुरू करने का सुझाव दिया गया है। कंपनी के प्रस्ताव में कहा गया है कि स्वकर निर्धारण में काफी जटिलता है इसलिए कारपेट एरिया के 75 प्रतिशत पर गृहकर की गणना की जाए। इससे भवन स्वामियों को आसानी भी होगी। जो भूखंड खाली पड़े हैं उन पर कम से कम एक रुपए वर्ग फिट और अधिकतम 5000 रुपए सालाना गृहकर लगाया जाए। इसी तरह गैर आवासीय खाली भूखंड पर दो रुपए प्रति वर्ग फिट और अधिकतम 10, 000 रुपए सालाना गृहकर निर्धारित किया जाना चाहिए। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि यदि स्वकर निर्धारण में 15 प्रतिशत तक का अंतर मिले तो भवन स्वामी पर कोई जुर्माना नहीं लगाया जाए और यदि 15 से अधिक अंतर मिले तो दोगुना भवन कर वसूला जाए।
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गृहकर निर्धारण प्रक्रिया आसान बनाने पर जोर ः निजी कंपनी ने नगर निगम को जो प्रस्ताव दिया गया है उसमें गृहकर निर्धारण की प्रक्रिया को आसान बनाने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही वसूली के लिए एक बार ओटीएस योजना शुरू करने का सुझाव दिया गया है। कंपनी के प्रस्ताव में कहा गया है कि स्वकर निर्धारण में काफी जटिलता है इसलिए कारपेट एरिया के 75 प्रतिशत पर गृहकर की गणना की जाए। इससे भवन स्वामियों को आसानी भी होगी। जो भूखंड खाली पड़े हैं उन पर कम से कम एक रुपए वर्ग फिट और अधिकतम 5000 रुपए सालाना गृहकर लगाया जाए। इसी तरह गैर आवासीय खाली भूखंड पर दो रुपए प्रति वर्ग फिट और अधिकतम 10, 000 रुपए सालाना गृहकर निर्धारित किया जाना चाहिए। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि यदि स्वकर निर्धारण में 15 प्रतिशत तक का अंतर मिले तो भवन स्वामी पर कोई जुर्माना नहीं लगाया जाए और यदि 15 से अधिक अंतर मिले तो दोगुना भवन कर वसूला जाए।
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