{"_id":"124-54236","slug":"Lucknow-54236-124","type":"story","status":"publish","title_hn":"हत्थे चढ़े जाली नोटों के दो सौदागर ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हत्थे चढ़े जाली नोटों के दो सौदागर
Lucknow
Updated Mon, 11 Mar 2013 05:31 AM IST
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लखनऊ। मड़ियांव पुलिस ने जाली नोटों के दो सौदागरों को रविवार दोपहर गिरफ्तार करके पांच सौ रुपये के 31 जाली नोट बरामद किए हैं। इनमें से एक नेपाल से जाली नोटों की खेप लाकर यहां बेचता था। धरपकड़ की भनक लगने पर जाली नोटों का एक खरीददार फरार हो गया। पकड़े गए दोनों व्यक्तियों से खुफिया व अन्य एजेंसियां पूछताछ कर रही हैं।
एसओ मड़ियांव रामबाबू यादव ने बताया कि पुलिस टीम ने रविवार दोपहर मोहिबुल्लापुर रेलवे स्टेशन के पास घेराबंदी करके गांव अजीजनगर निवासी निजामुद्दीन व सीतापुर के लहरपुर थाने के गांव बेहटी निवासी शफी अहमद को गिरफ्तार किया। निजामुद्दीन के कब्जे से पांच सौ रुपये के 19 व शफी अहमद के पास 12 जाली नोट बरामद हुए। निजामुद्दीन लहरपुर की एक आरा मशीन पर काम करता था, वहीं पेंटिंग का काम करने वाले शफी अहमद से उसकी दोस्ती हुई थी। शफी अहमद नेपाल से जाली नोटों की खेप लाकर उसे बेचता था। शफी अहमद के साथ पेंटिंग करने वाले नेपाली युवक ने नेपाल के पुष्पालाल चौक में जाली नोटों के बड़े सौदागर से उसे मिलाया था।
ऐसे शुरू किया जाली नोटों का धंधा
शफी अहमद ने कबूला कि नेपाली युवक ने दो महीने पहले उससे नौ हजार रुपये लेकर पांच सौ के 30 जाली नोट दिए थे। हूबहू असली जैसे नजर आ रहे नोटों को उसने बाजार में चला डाला। इसके बाद बड़े सौदागर से खुद आधी कीमत पर जाली नोट लाया और निजामुद्दीन से दो हजार रुपये लेकर पांच सौ के छह जाली नोट दिए। इसी तरह लहरपुर के फरीदपुर निवासी आरिफ को भी जाली नोट बेचे। जाली नोट आसानी से बाजार में चल जाने पर निजामुद्दीन ने तीन हजार रुपये देकर पांच सौ रुपये के आठ नोट खरीदे। इसके बाद पांच हजार रुपये देकर 14 जाली नोट खरीदकर बाजार में चलाए। मोटी कमाई होने पर निजामुद्दीन ने आरा मशीन का काम छोड़ दिया और जाली नोटों के धंधे में लिप्त हो गया। उसकी मांग पर शफी अहमद आज जाली नोटों की खेप लेकर आया था। उसे 12 नोट दिए और दूसरे साथी आरिफ का इंतजार कर रहा था।
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जाली नोट देख चकरा गए पुलिसकर्मी
असली जैसे नजर आ रहे जाली नोट देखकर पुलिसकर्मी भी चकरा गए। असमंजस में पड़ी पुलिस ने पूछताछ की तो दोनों ने राज उगलना शुरू कर दिया। नेपाल से जाली नोटों की खेप आने के खुलासे पर एसओ मड़ियांव ने उच्चाधिकारियों को जानकारी दी। इस पर एटीएस, एसटीएफ, खुफिया तंत्र की विभिन्न इकाइयों की टीम ने थाने पहुंच कर जाली नोटों के सौदागरों से पूछताछ शुरू की है।
प्रिंटिंग पाकिस्तान में होने का संदेह
पुलिस व खुफिया तंत्र को शक है कि निजामुद्दीन व शफी अहमद के कब्जे से बरामद जाली नोट भले ही नेपाल से लाए गए हों लेकिन उनकी छपाई पाकिस्तान में हुई है। नोटों का कागज असली करेंसी जैसा है और स्याही भी हूबहू वैसी ही है। नेपाल में जाली नोटों के बड़े सौदागर के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
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एसओ मड़ियांव रामबाबू यादव ने बताया कि पुलिस टीम ने रविवार दोपहर मोहिबुल्लापुर रेलवे स्टेशन के पास घेराबंदी करके गांव अजीजनगर निवासी निजामुद्दीन व सीतापुर के लहरपुर थाने के गांव बेहटी निवासी शफी अहमद को गिरफ्तार किया। निजामुद्दीन के कब्जे से पांच सौ रुपये के 19 व शफी अहमद के पास 12 जाली नोट बरामद हुए। निजामुद्दीन लहरपुर की एक आरा मशीन पर काम करता था, वहीं पेंटिंग का काम करने वाले शफी अहमद से उसकी दोस्ती हुई थी। शफी अहमद नेपाल से जाली नोटों की खेप लाकर उसे बेचता था। शफी अहमद के साथ पेंटिंग करने वाले नेपाली युवक ने नेपाल के पुष्पालाल चौक में जाली नोटों के बड़े सौदागर से उसे मिलाया था।
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ऐसे शुरू किया जाली नोटों का धंधा
शफी अहमद ने कबूला कि नेपाली युवक ने दो महीने पहले उससे नौ हजार रुपये लेकर पांच सौ के 30 जाली नोट दिए थे। हूबहू असली जैसे नजर आ रहे नोटों को उसने बाजार में चला डाला। इसके बाद बड़े सौदागर से खुद आधी कीमत पर जाली नोट लाया और निजामुद्दीन से दो हजार रुपये लेकर पांच सौ के छह जाली नोट दिए। इसी तरह लहरपुर के फरीदपुर निवासी आरिफ को भी जाली नोट बेचे। जाली नोट आसानी से बाजार में चल जाने पर निजामुद्दीन ने तीन हजार रुपये देकर पांच सौ रुपये के आठ नोट खरीदे। इसके बाद पांच हजार रुपये देकर 14 जाली नोट खरीदकर बाजार में चलाए। मोटी कमाई होने पर निजामुद्दीन ने आरा मशीन का काम छोड़ दिया और जाली नोटों के धंधे में लिप्त हो गया। उसकी मांग पर शफी अहमद आज जाली नोटों की खेप लेकर आया था। उसे 12 नोट दिए और दूसरे साथी आरिफ का इंतजार कर रहा था।
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जाली नोट देख चकरा गए पुलिसकर्मी
असली जैसे नजर आ रहे जाली नोट देखकर पुलिसकर्मी भी चकरा गए। असमंजस में पड़ी पुलिस ने पूछताछ की तो दोनों ने राज उगलना शुरू कर दिया। नेपाल से जाली नोटों की खेप आने के खुलासे पर एसओ मड़ियांव ने उच्चाधिकारियों को जानकारी दी। इस पर एटीएस, एसटीएफ, खुफिया तंत्र की विभिन्न इकाइयों की टीम ने थाने पहुंच कर जाली नोटों के सौदागरों से पूछताछ शुरू की है।
प्रिंटिंग पाकिस्तान में होने का संदेह
पुलिस व खुफिया तंत्र को शक है कि निजामुद्दीन व शफी अहमद के कब्जे से बरामद जाली नोट भले ही नेपाल से लाए गए हों लेकिन उनकी छपाई पाकिस्तान में हुई है। नोटों का कागज असली करेंसी जैसा है और स्याही भी हूबहू वैसी ही है। नेपाल में जाली नोटों के बड़े सौदागर के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।