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परीक्षा पर भारी न पड़ जाए ‘एग्जाम सिंड्रोम’
Lucknow
Updated Fri, 08 Mar 2013 05:30 AM IST
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लखनऊ। परीक्षाओं के इस मौसम में अगर आपका बच्चा चिड़चिड़ेपन, हड़बड़ी, अनिद्रा, अपच और सिरदर्द की शिकायत करे तो इसे नजरअंदाज न करें। समय पर ध्यान नहीं दिए जाने पर वह हाई ब्लडप्रेशर, तेज धड़कन और स्ट्रेस का शिकार हो सकता है। आगे चलकर यही लक्षण बच्चे को स्थायी तौर पर मानसिक अवसाद की चपेट में ला सकते हैं और हृदय रोगी बना सकते हैं। केजीएमयू के एक सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार परीक्षा में फेल होने के कारण या फेल होने के डर से राजधानी में हर साल 20 से ज्यादा बच्चे आत्महत्या करते हैं। केजीएमयू के डॉ. वीएन शाह इसके पीछे बच्चों में परीक्षा के दौरान पैदा होने वाले एग्जाम सिंड्रोम को मुख्य कारण मानते हैं। उनका कहना है कि परीक्षा में बच्चे से बेहतर प्रदर्शन करने की माता-पिता की इच्छा विशेषतौर पर इसके लिए जिम्मेदार होती है। इसके अलावा कॉलेज में साथियों से मुकाबला, पढ़ाई का माध्यम और संसाधन भी बच्चों में एग्जाम फोबिया पैदा करते हैं। परीक्षा के दौरान बच्चा गुमसुम रहने लगे या उसका व्यवहार बदला लगे तो अभिभावकों को सावधान हो जाना चाहिए।
बीस स्केल से ज्यादा तनाव खतरनाक ः राममनोहर लोहिया अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. देवाशीष ने बताया कि परीक्षाओं से पहले थोड़े समय का तनाव नुकसानदेह नहीं होता। हालांकि, अगर यह तनाव स्ट्रेस रिस्पॉन्स चेक लिस्ट के अनुसार 20 से 70 स्केल के बीच में होगा तो विद्यार्थी परीक्षा में अपनी क्षमता से कम प्रदर्शन करेगा। ज्यादा तनाव से याददाश्त पर भी असर पड़ता है और बच्चा पहले से याद पाठ भी भूलने लगता है। टाइम शेड्यूल बनाकर पढ़ाई करनी चाहिए। हर दूसरे घंटे के बाद आराम जरूरी है। छह से सात घंटे तक नींद नहीं लेने वाले बच्चे कई तरह की मानसिक बीमारियों का शिकार हो जाते हैं।
खान-पान का रखें ध्यान ः बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जीके सिंह परीक्षा के समय बच्चों के खान-पान से जी चुराने को भी काफी खतरनाक मानते हैं। खाना कम खाने के कारण बच्चों के शरीर में ग्लूकोज की कमी हो जाती है। परीक्षा के तनाव से निपटने में संतुलित भोजन काफी अहम भूमिका निभाता है। एक निश्चित अंतराल पर संतुलित भोजन करने से शरीर में ग्लूकोज का स्तर सामान्य बना रहता है जिससे परीक्षा की तैयारी में काफी मदद मिलती है।
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परीक्षा की तैयारी में रखें परहेज ः बलरामपुर अस्पताल के डॉ. मनोज अग्रवाल का कहना है कि परीक्षा की तैयारियों में जुटे बच्चों को कॉफी, चाय और जंक फूड से बिल्कुल परहेज करना चाहिए। एक से दो घंटे की लगातार पढ़ाई के बाद कम से कम 20 से 30 मिनट गहरी सांस लेकर ध्यान और व्यायाम करने से पढ़ाई में एक नया उत्साह आता है। इस ब्रेक में बच्चे को प्रोटीन और विटामिनयुक्त हल्का नाश्ता देना फायदेमंद होता है।
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बीस स्केल से ज्यादा तनाव खतरनाक ः राममनोहर लोहिया अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. देवाशीष ने बताया कि परीक्षाओं से पहले थोड़े समय का तनाव नुकसानदेह नहीं होता। हालांकि, अगर यह तनाव स्ट्रेस रिस्पॉन्स चेक लिस्ट के अनुसार 20 से 70 स्केल के बीच में होगा तो विद्यार्थी परीक्षा में अपनी क्षमता से कम प्रदर्शन करेगा। ज्यादा तनाव से याददाश्त पर भी असर पड़ता है और बच्चा पहले से याद पाठ भी भूलने लगता है। टाइम शेड्यूल बनाकर पढ़ाई करनी चाहिए। हर दूसरे घंटे के बाद आराम जरूरी है। छह से सात घंटे तक नींद नहीं लेने वाले बच्चे कई तरह की मानसिक बीमारियों का शिकार हो जाते हैं।
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खान-पान का रखें ध्यान ः बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जीके सिंह परीक्षा के समय बच्चों के खान-पान से जी चुराने को भी काफी खतरनाक मानते हैं। खाना कम खाने के कारण बच्चों के शरीर में ग्लूकोज की कमी हो जाती है। परीक्षा के तनाव से निपटने में संतुलित भोजन काफी अहम भूमिका निभाता है। एक निश्चित अंतराल पर संतुलित भोजन करने से शरीर में ग्लूकोज का स्तर सामान्य बना रहता है जिससे परीक्षा की तैयारी में काफी मदद मिलती है।
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परीक्षा की तैयारी में रखें परहेज ः बलरामपुर अस्पताल के डॉ. मनोज अग्रवाल का कहना है कि परीक्षा की तैयारियों में जुटे बच्चों को कॉफी, चाय और जंक फूड से बिल्कुल परहेज करना चाहिए। एक से दो घंटे की लगातार पढ़ाई के बाद कम से कम 20 से 30 मिनट गहरी सांस लेकर ध्यान और व्यायाम करने से पढ़ाई में एक नया उत्साह आता है। इस ब्रेक में बच्चे को प्रोटीन और विटामिनयुक्त हल्का नाश्ता देना फायदेमंद होता है।