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गवर्नेंस की जमीनी हकीकत खंगालें भावी प्रबंधक ः किरण बेदी
Lucknow
Updated Sun, 20 Jan 2013 05:30 AM IST
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लखनऊ। भारत की पहली महिला आईपीएस किरण बेदी ने भावी प्रबंधकों से गवर्नेंस की भी हकीकत खंगालने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि आईआईएम एवं आईआईटी जैसे संस्थान जिस राज्य में हैं कम से कम वहीं की बुनियादी समस्याओं का अध्ययन एवं ऑडिट कर अपनी रिपोर्ट देना शुरू कर दें तो दो सालों में ही तस्वीर काफी बदली दिखाई देगी। आईआईएम को जरूरत है कि वह खुद के लिए पैसा कमाने वाले मैनेजरों की जगह देश के लिए काम करने वाले युवा तैयार करें। किरण बेदी आईआईएम में चल रहे मैनफेस्ट के दूसरे दिन लीडर एक्सप्रेस शृंखला में छात्र-छात्राओं से संवाद कर रही थीं। उन्होंने कहा कि आईआईएम लखनऊ के छात्र ही अलग-अलग ग्रुप में यूपी में संसाधन, अपराध, कृषि, प्रशासन आदि मुद्दों पर वार्षिक रिपोर्ट तैयार कर सकते हैं। इससे सरकारों तक सुझाव एवं दबाव दोनों पहुंचेगा। क्योंकि सरकार में नीति बनाने वाले बंगला, ड्राइवर, नौकर के मोह से ही नहीं उबर पा रहे हैं। इसी तरह लॉ के स्टूडेंट भी कोर्ट की सोशल ऑडिट कर सकते हैं। एक छात्रा का सवाल था कि सरकार जानकारी न दें तो? बेदी ने कहा कि आरटीआई लगाओ? कब तक सूचना नहीं देंगे। भ्रष्टाचार के सामने समर्पण से कुछ नहीं होने वाला। मेरे जीवन के पंद्रह साल बचे हैं तुम्हारे साठ साल दांव पर लगे हैं।
घर की मुर्गी, दाल बराबर ः किरण बेदी ने कहा कि तिहाड़ जेल में उनके द्वारा किए गए सुधारों को भले ही देश के किसी भी बिजनेस स्कूल ने तवज्जो न दी हो लेकिन अमेरिका के कई बिजनेस स्कूलों एवं विश्वविद्यालयों के सिलेबस में इसे शामिल किया गया है। दरअसल हमारे यहां ‘घर की मुर्गी दाल बराबर’ की परंपरा है। उन्होंने बताया कि तिहाड़ के दस हजार कैदियों से ही 500 शिक्षक तैयार कर उन्होंने जेल सुधार कार्यक्रम शुरू किया था।
संसद के पास समय ही नहीं ः आईआईएम के एक छात्र के सवाल पर बेदी ने कहा कि भारत में प्रचलित आपराधिक कानून आउटडेटेड हो चुके हैं। आईपीसी, सीआरपीसी एवं एविडेंस जैसे कानूनों में आज के परिप्रेक्ष्य में बड़े बदलाव की जरूरत है लेकिन इसके लिए हमारी संसद के पास समय ही नहीं है तो सुधार कैसे आगे बढ़े।
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...इसलिए हेलीकॉप्टर से चलते हैं नेता ः बेदी ने यूपी की खराब सड़कों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यहां रोड की हालत बहुत खस्ता है। जगह-जगह इतने जाम लगते हैं कि यहां के नेता एवं वीआईपी इससे बचने के लिए हेलीकॉप्टर से घूमते हैं। लेकिन आम आदमी की समस्या एवं दर्द से उनका कोई सरोकार ही नहीं है। यह सवाल युवाओं को उठाने की जरूरत है।
कभी नहीं लडूंगी चुनाव ः किरण बेदी मानती हैं कि आज की राजनीति में ऐसे नेता नहीं हैं जो युवाओं को आगे बढ़ते देखना चाहें और आदर्श पैदा करें। लेकिन उन्हें खुद राजनीति में जाने से परहेज है। चुनाव लड़ने के सवाल पर उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वह कभी चुनाव नहीं लड़ेंगी। तर्क था कि वह अपनी जनसेवा के बदले वोट नहीं मांगना चाहती। बेदी ने कहा कि यदि उन्हें राजनीति करनी होती तो यह काम आज से 40 साल पहले शुरू करती। अब इस शुरुआत के लिए बहुत देर हो चुकी है।
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घर की मुर्गी, दाल बराबर ः किरण बेदी ने कहा कि तिहाड़ जेल में उनके द्वारा किए गए सुधारों को भले ही देश के किसी भी बिजनेस स्कूल ने तवज्जो न दी हो लेकिन अमेरिका के कई बिजनेस स्कूलों एवं विश्वविद्यालयों के सिलेबस में इसे शामिल किया गया है। दरअसल हमारे यहां ‘घर की मुर्गी दाल बराबर’ की परंपरा है। उन्होंने बताया कि तिहाड़ के दस हजार कैदियों से ही 500 शिक्षक तैयार कर उन्होंने जेल सुधार कार्यक्रम शुरू किया था।
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संसद के पास समय ही नहीं ः आईआईएम के एक छात्र के सवाल पर बेदी ने कहा कि भारत में प्रचलित आपराधिक कानून आउटडेटेड हो चुके हैं। आईपीसी, सीआरपीसी एवं एविडेंस जैसे कानूनों में आज के परिप्रेक्ष्य में बड़े बदलाव की जरूरत है लेकिन इसके लिए हमारी संसद के पास समय ही नहीं है तो सुधार कैसे आगे बढ़े।
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...इसलिए हेलीकॉप्टर से चलते हैं नेता ः बेदी ने यूपी की खराब सड़कों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यहां रोड की हालत बहुत खस्ता है। जगह-जगह इतने जाम लगते हैं कि यहां के नेता एवं वीआईपी इससे बचने के लिए हेलीकॉप्टर से घूमते हैं। लेकिन आम आदमी की समस्या एवं दर्द से उनका कोई सरोकार ही नहीं है। यह सवाल युवाओं को उठाने की जरूरत है।
कभी नहीं लडूंगी चुनाव ः किरण बेदी मानती हैं कि आज की राजनीति में ऐसे नेता नहीं हैं जो युवाओं को आगे बढ़ते देखना चाहें और आदर्श पैदा करें। लेकिन उन्हें खुद राजनीति में जाने से परहेज है। चुनाव लड़ने के सवाल पर उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वह कभी चुनाव नहीं लड़ेंगी। तर्क था कि वह अपनी जनसेवा के बदले वोट नहीं मांगना चाहती। बेदी ने कहा कि यदि उन्हें राजनीति करनी होती तो यह काम आज से 40 साल पहले शुरू करती। अब इस शुरुआत के लिए बहुत देर हो चुकी है।