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दुग्ध कर्मियों ने तालाबंदी कर किया प्रदर्शन
Lucknow
Updated Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
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लखनऊ। प्रादेशिक कोऑपरेटिव डेरी फेडरेशन (पीसीडीएफ) के दुग्ध कर्मियों ने बृहस्पतिवार को बकाया वेतन के भुगतान की मांग को लेकर मुख्यालय के गेट पर तालाबंदी कर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रबंध निदेशक के खिलाफ नारेबाजी कर कर्मियों के साथ भेदभाव अपनाने का आरोप लगाते हुए अधिकारियों को दफ्तर में प्रवेश करने नहीं दिया। इसके चलते पीसीडीएफ मुख्यालय में पूरे दिन कामकाज ठप रहा। यह आंदोलन पीसीडीएफ ट्रेड यूनियन मंच एवं अनुसूचित जाति-जनजाति वेलफेयर एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में शुरू हुआ। दोनो संगठनों के पदाधिकारी आरपीएस चौहान, श्याम सुंदर शुक्ला, श्याम आसरे ने बताया कि प्रदेश भर में डेरी कर्मियों का पांच से 50 माह तक का वेतन बकाया है। प्रबंध निदेशक से कई बार बकाया वेतन के भुगतान की मांग हुई ,लेकिन वह हमेशा पीसीडीएफ की आर्थिक स्थिति ठीक न होने का रोना रोते रहते हैं। उन्होंने बताया कि 19 एवं 24 साल में मिलने वाला सेवा लाभ कर्मियों को अब तक नहीं मिल सका। ऐसे कर्मचारी छह-छह साल से सेवा लाभ पाने की राह देख रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रबंध निदेशक अधिकारियों को सेवा लाभ दे चुके, उनके लिए पीसीडीएफ की आर्थिक स्थिति दुरुस्त है। उन्होंने कहा कि पीसीडीएफ के अधिकारियों ने करीब 100 करोड़ रुपये का घोटाला किया जिसकी रिकवरी के आदेशी हो चुके हैं लेकिन यह मामला दबा दिया गया है। इन्हीं समस्याओं को लेकर बृहस्पतिवार को मंच के एक शिष्ट मंडल ने प्रबंध निदेशक से बातचीत करने का प्रयास किया, लेकिन उनको वक्त नहीं दिया गया। इससे आक्रोशित होकर दोपहर करीब एक बजे प्रदेश भर से आए कर्मियों ने पीसीडीएफ के मुख्य प्रवेश गेट में तालाबंदी कर आवागमन ठप कर दिया और गेट के सामने धरना शुरू कर दिया। तालाबंदी होते ही जो अफसर कार्यालय में थे वह बाहर नहीं आ सके जो बाहर से थे वह प्रवेश नहीं कर सके। शाम 5:45 बजे स्थानीय थानाध्यक्ष ने मंच के पदाधिकारियों को आश्वासन दिया कि वह शुक्रवार को प्रबंध निदेशक से वार्ता कराएंगे। इसके बाद गेट का ताला खुला और अधिकारी बाहर आ सके।
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