World Environment Day 2024: ग्लोबल वार्मिंग और बिगड़ता पर्यावरण दुनिया में ला रहा तबाही
World Environment Day 2024: औद्योगीकरण के बाद भले ही दुनिया के हर क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिले हैं। हालांकि, इसका एक नकारात्मक प्रभाव हमारे पर्यावरण के ऊपर पड़ा है।
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World Environment Day 2024: औद्योगीकरण के बाद भले ही दुनिया के हर क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिले हैं। हालांकि, इसका एक नकारात्मक प्रभाव हमारे पर्यावरण के ऊपर पड़ा है। कार्बन उत्सर्जन बढ़ने के कारण पृथ्वी का औसत तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिसका बुरा असर धरती के दोनों ध्रुवों पर देखने को मिल रहा है। आर्कटिक ग्लेशियर 4 गुना ज्यादा तेजी से गर्म हो रहा है, जिसके चलते समुद्र के जलस्तर में बढ़ोतरी हो रही है। इन सब के अलावा दुनियाभर के मौसम चक्र में भी अप्रत्याशित बदलाव देखने को मिल रहे हैं। कहीं पर सूखा पड़ रहा है, तो कहीं पर तबाही मचा देने वाली बारिश हो रही है। ऐसे में हमें पर्यावरण के प्रति जागरुक होने की जरूरत है। इसी चीज को ध्यान में रखते हुए हर साल 5 जून के दिन विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। हर साल विश्व पर्यावरण दिवस मनाए जाने का उद्देश्य लोगों को यह बताना है कि पर्यावरण हमारे अस्तित्व के लिए कितना जरूरी है।
दुनियाभर में ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ने का एक बड़ा कारण शहरीकरण है। शहरीकरण की वजह से बड़े पैमाने पर जंगलों का कटाव हो रहा है। इसके चलते वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा में वृद्धि हो रही है और ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव और भी ज्यादा बढ़ रहा है। इस वजह से कई ऐसी जगहों पर भी सूखा पड़ रहा है, जहां कभी हरियाली हुआ करती थी और वहां पर भी पेड़ खत्म हो रहे हैं।
यही नहीं वैश्विक तापवृद्धी के कारण जैव विविधता की स्थिति भी लगातार खराब हो रही है। बेमौसम बरसात, सर्दी के दिनों में मौसम का गर्म होना यह सब वैश्विक ताप वृद्धि के बढ़ने के कारण ही हो रहा है।
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वहीं दूसरी ओर पृथ्वी का औसत तापमान बढ़ने के कारण कृषि क्षेत्र पर भी नकारात्मक असर पड़ा है। यही नहीं जलवायु परिवर्तन के कारण ऊंचाई वाली जगहों पर भी तापमान बढ़ रहा है, जिसकी वजह से वहां पर भी मच्छर पनप रहे हैं और मच्छरों से होने वाली बीमारियां फैल रही हैं।
इसके अलावा ग्लोबल वार्मिंग कोरल रीफ को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन 2019 के मुताबिक ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ने के कारण साल 2100 तक 80 फीसदी ग्लेशियर पिघलकर सिकुड़ सकते हैं। ऐसे में हर साल पर्यावरण दिवस को मनाए जाने का उद्देश्य लोगों को इन्हीं खतरों के प्रति जागरुक करना है।