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Hindi News ›   Utility ›   CSTEP Research: Local Emissions in Indian Cities May Rise 11-45% by 2030 Compared to 2019

CSTEP: साल 2030 तक भारत के कई शहरों में बढ़ेगा प्रदूषण, PM2.5 कर सकता है वायु गुणवत्ता को खराब

Mon, 26 Aug 2024 03:56 PM IST
संकल्प सिंह यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संकल्प सिंह Updated Mon, 26 Aug 2024 03:56 PM IST
सार

अध्ययन में पाया गया कि इन शहरों में अगर वायु प्रदूषण को रोकने के लिए कोई ठीक योजना नहीं बनाई जाती है। इस स्थिति में PM2.5 जो कि काफी हानिकारक वायु प्रदूषक है उसकी मात्रा में साल 2030 तक वृद्धि देखने को मिल सकती है। 

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CSTEP Research: Local Emissions in Indian Cities May Rise 11-45% by 2030 Compared to 2019
Air Pollution - फोटो : Freepik

विस्तार

सेंटर फॉर स्टडी ऑफ साइंस, टेक्नोलॉजी एंड पॉलिसी (CSTEP) द्वारा देश के 76 शहरों में वायु प्रदूषण पर एक विस्तृत अध्ययन किया गया। इस अध्ययन में कई चीजें सामने निकलकर आई हैं। स्टडी में पाया गया है कि राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम द्वारा प्रदूषण को कम करने को लेकर जो लक्ष्य निर्धारित किए गए थे उनमें से केवल कुछ ही शहर आने वाले समय में लक्ष्यों को पूरा कर पाएंगे। आपको बता दें कि साल 2019 में भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम को शुरू किया गया था।

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इसका उद्देश्य देश के उन 131 शहरों में वायु गुणवत्ता में सुधार करना था, जो कि राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता के मानकों को पूरा नहीं कर रहे हैं। 2.5 साल तक चले अध्ययन में इस बात का पता चला है कि केवल 8 शहर ही 2030 तक 40 प्रतिशत उत्सर्जन में कमी कर पाएंगे। यही नहीं, इन शहरों में 2019 के मुकाबले साल 2030 तक  स्थानीय उत्सर्जन में 11 से लेकर 45 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। इससे इन शहरों में वायु गुणवत्ता और भी ज्यादा खराब होगी। 

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इस अध्ययन को चार खास तरह के प्रदूषक तत्व PM₁₀, PM₂.₅, SO₂, और NOₓ को ध्यान में रखकर किया गया। अध्ययन में 2019 को आधार वर्ष बनाकर यह पता करने की कोशिश की गई कि साल 2030 तक ये प्रदूषक तत्व कितने कम और ज्यादा हो सकते हैं। इस अध्ययन में जो निष्कर्ष निकले हैं उन्हें 70 प्रतिशत से अधिक शहरों में किए गए परिवहन और घरेलू ईंधन खपत सर्वेक्षणों के विरुद्ध सत्यापित किया गया। 

अध्ययन में पाया गया कि इन शहरों में अगर वायु प्रदूषण को रोकने के लिए कोई ठीक योजना नहीं बनाई जाती है। इस स्थिति में PM2.5 जो कि काफी हानिकारक वायु प्रदूषक है उसकी मात्रा में साल 2030 तक वृद्धि देखने को मिल सकती है। 

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इसके अलावा स्टडी में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि वायु प्रदूषण को कम करने के लिए इंडस्ट्री, ट्रांसपोर्टेशन, कंस्ट्रक्शन और खुले में जलने वाले अपशिष्ट पदार्थ पर ध्यान देने की जरूरत है ताकि NCAP के लक्ष्यों को पूरा किया जा सके।  

बेंगलुरु में CSTEP द्वारा आयोजित Indian Clean Air Summit 2024 के छठे संस्करण में इस अध्ययन में जो निष्कर्ष निकले हैं उसको लेकर एक विजुअलाइजेशन पोर्टल लॉन्च किया जाएगा। 

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