म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय लोग अक्सर फंड के पुराने रिटर्न, पोर्टफोलियो और स्टार रेटिंग पर ही ध्यान देते हैं। मगर बहुत कम लोग इस बात पर गौर करते हैं कि उनका फंड हाउस उनसे कितना चार्ज या फीस वसूल रहा है। म्यूचुअल फंड में इस फीस को 'एक्सपेंस रेशियो' कहा जाता है।
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Mutual Fund: म्यूचुअल फंड में एक्सपेंस रेशियो क्या होता है? जानें कैसे आपके रिटर्न को प्रभावित करता है
Tue, 25 Aug 2026 07:35 PM IST
Shikhar Baranawal
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shikhar Baranawal
Updated Tue, 25 Aug 2026 07:35 PM IST
सार
म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय बहुत कम लोग इस बात पर ध्यान दे पाते हैं कि उनकी स्कीम का एक्सपेंस रेशियो कितना है। अधिकतर लोग तो इस शब्द का मतलब ही नहीं समझ पाते हैं। इसलिए आइए, इस लेख में एक्सपेंस रेशियो के बारे में विस्तार से समझते हैं।
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क्या होता है म्यूचुअल फंड में एक्सपेंस रेशियो?
- एक्सपेंस रेशियो वह सलाना फीस है जो फंड हाउस आपकी रकम को मैनेज करने के बदले आपसे लेता है।
- इसमें फंड मैनेजर की फीस, प्रशासनिक खर्च, मार्केटिंग और लीगल फीस जैसे सभी खर्च शामिल होते हैं।
- इसे प्रतिशत (%) में आंका जाता है, उदाहरण के लिए अगर किसी फंड का एक्सपेंस रेशियो 1% है, तो आपके निवेश का 1% हिस्सा फीस में जाएगा।
- यह फीस अलग से नहीं देनी पड़ती, बल्कि फंड की एनएवी से दैनिक आधार पर खुद ही कट जाती है।
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आपके कुल रिटर्न पर कैसे पड़ता है इसका असर
- फंड हाउस रोजाना आपकी एनएवी से एक्सपेंस रेशियो का छोटा हिस्सा काटता है, जिससे आपका वार्षिक मुनाफा कम हो जाता है।
- उदाहरण के तौर पर, अगर किसी म्यूचुअल फंड के पोर्टफोलियो के शेयरों ने असल में 15% की बढ़त बनाई है और उस फंड का एक्सपेंस रेशियो 1.5% है, तो फंड हाउस अपनी फीस काटकर आपको 13.5% का अंतिम रिटर्न देगा। यानी आपको स्क्रीन पर जो रिटर्न दिखेगा, वह पहले से ही एक्सपेंस रेशियो घटाकर 13.5% ही दिखाया जाएगा।
- लंबी अवधि के निवेश में 0.5% या 1% का यह छोटा सा अंतर भी कम्पाउंडिंग के कारण आपके अंतिम फंड में लाखों रुपये का बड़ा फर्क पैदा कर देता है।
- इसलिए जब दो अलग-अलग फंड एक जैसा प्रदर्शन और रिटर्न दे रहे हों, तो हमेशा कम एक्सपेंस रेशियो वाले फंड को चुनना ही ज्यादा समझदारी मानी जाती है।
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डायरेक्ट और रेगुलर प्लान का अंतर
- इसमें आप बिना किसी ब्रोकर या डिस्ट्रीब्यूटर के सीधे फंड हाउस से निवेश करते हैं, इसलिए इसका एक्सपेंस रेशियो काफी कम होता है।
- इसमें आप ब्रोकर या एजेंट के जरिए निवेश करते हैं, इसलिए एजेंट के कमीशन का खर्च भी एक्सपेंस रेशियो में जुड़ जाता है।
- रेगुलर प्लान का एक्सपेंस रेशियो डायरेक्ट प्लान के मुकाबले 0.5% से 1.5% तक ज्यादा हो सकता है।
- अगर आप थोड़ी सी समझदारी दिखाकर डायरेक्ट प्लान चुनते हैं, तो लंबे समय में आपका रिटर्न काफी बढ़ सकता है।
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निवेशकों को एक्सपेंस रेशियो चुनते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए
- सेबी (SEBI) के नियमों के अनुसार फंड का आकार (AUM) जितना बड़ा होगा, उसका एक्सपेंस रेशियो उतना ही कम होना चाहिए।
- केवल कम एक्सपेंस रेशियो देखकर फंड न चुनें, फंड का ट्रैक रिकॉर्ड और रिस्क मैनेजमेंट भी उतना ही अहम है।
- पैसिव फंड्स जैसे 'इंडेक्स फंड्स' का एक्सपेंस रेशियो एक्टिवली मैनेज्ड फंड्स की तुलना में काफी कम होता है।
- समय-समय पर अपने पोर्टफोलियो का विश्लेषण करें और देखें कि आपका फंड फीस के हिसाब से सही प्रदर्शन दे रहा है या नहीं।