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Chess: 'ज्ञान की भीड़ में गहरी समझ ही बनाती है चैंपियन', युवा खिलाड़ियों को विश्वनाथन आनंद ने दिया गुरु मंत्र
Thu, 12 Feb 2026 03:34 PM IST
Mayank Tripathi
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Mayank Tripathi
Updated Thu, 12 Feb 2026 03:34 PM IST
सार
विश्वनाथन आनंद के अनुसार आधुनिक शतरंज में कंप्यूटर सहायता के बावजूद खिलाड़ियों को अलग करने वाला असली कारक खेल की गहरी समझ और पैटर्न पहचानने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि केवल ज्ञान रटना पर्याप्त नहीं, बल्कि बारीकियों को समझना और नए विचारों के प्रति खुला रहना ही खिलाड़ी को ऊंचे स्तर तक पहुंचाता है।
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विश्वनाथन आनंद
- फोटो : ANI
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विस्तार
पांच बार के विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद ने गुरुवार को कहा कि ऐसे युग में, जहां खिलाड़ी कंप्यूटर से मिलने वाली सहायता से अभिभूत हैं, खेल की गहरी समझ आधुनिक शतरंज में एकमात्र असली निर्णायक कारक बन गई है। आनंद ने तीन दिवसीय शतरंज कार्यशाला के उद्घाटन समारोह में कहा, 'दिलचस्प बात यह है कि आपको जितना अधिक ज्ञान उपलब्ध कराया जाता है, उतना ही कम आप जान पाते हैं। यदि हर दिन आपको 20-30 नए निष्कर्ष मिलते हैं, तो आप उन्हें कैसे समझ पाएंगे? मेरा मानना है कि आज के शतरंज खिलाड़ियों को अलग करने वाली एकमात्र चीज गहरी समझ है।'
कई साल पहले जब आनंद ने कंप्यूटर का उपयोग करना सीखा था, उस समय का उदाहरण देते हुए इस ग्रैंडमास्टर ने कहा कि नए विचारों के प्रति खुला रहना मददगार होता है, लेकिन बारीकियों को समझना ही किसी खिलाड़ी को नए स्तर पर ले जाता है। आनंद ने यह भी स्पष्ट किया कि शतरंज में महारत हासिल करना रटने के बजाय पैटर्न पहचानने पर आधारित है। उन्होंने कहा, 'हमारा दिमाग हमारी क्षमता से कहीं अधिक पैटर्न बनाता है। किसी का खेल देखने के हफ्तों बाद भी खिलाड़ियों के दिमाग में नए विचार आ जाते हैं। उन्हें यह अहसास नहीं होता कि वे कहीं और से कुछ नकल कर रहे हैं।'
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कई साल पहले जब आनंद ने कंप्यूटर का उपयोग करना सीखा था, उस समय का उदाहरण देते हुए इस ग्रैंडमास्टर ने कहा कि नए विचारों के प्रति खुला रहना मददगार होता है, लेकिन बारीकियों को समझना ही किसी खिलाड़ी को नए स्तर पर ले जाता है। आनंद ने यह भी स्पष्ट किया कि शतरंज में महारत हासिल करना रटने के बजाय पैटर्न पहचानने पर आधारित है। उन्होंने कहा, 'हमारा दिमाग हमारी क्षमता से कहीं अधिक पैटर्न बनाता है। किसी का खेल देखने के हफ्तों बाद भी खिलाड़ियों के दिमाग में नए विचार आ जाते हैं। उन्हें यह अहसास नहीं होता कि वे कहीं और से कुछ नकल कर रहे हैं।'
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