सुमित नागल: पिता के संघर्ष और जी-तोड़ मेहनत की आंच में पका टेनिस खिलाड़ी
- सुमित नागल 10 साल की उम्र में महेश भूपति के एकेडमी में गए थे
- बचपन में फेडरर का स्टाइल कॉपी करते थे, उन्हीं से खेला डेब्यू ग्रैंडस्लैम मैच
- पिछले एक दशक में ग्रैंडस्लैम एकल मुख्य ड्रॉ में खेलने वाले पांचवें भारतीय
- सोमदेव देववर्मन, युकी भांबरी, साकेत मायनेनी और प्रजनेश खेल चुके हैं ग्रैंडस्लैम
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साल का आखिरी टेनिस ग्रैंड स्लैम यूएस ओपन सोमवार से शुरू हो चुका है। टेनिस के इस प्रतिष्ठित इवेंट से अपना ग्रैंडस्लैम डेब्यू करने वाले सुमित नागल ने अपने पहले ही मैच में दुनिया के महानतम खिलाड़ी रोजर फेडरर को पहले सेट में हराकर सभी को चौंका दिया। पहला सेट गंवाने के बाद फेडरर जरूर मैच (4-6, 6-1, 6-2, 6-4) जीतने में कामयाब रहे, लेकिन दिल तो नागल जीत चुके थे। एकाएक पूरी दुनिया में चर्चित हो चुके नागल की कहानी बेहद दिलचस्प है।
बचपन में पिता का हाथ पकड़कर पहुंचे कोर्ट
बचपन में जिस रोजर फेडरर के स्टाइल को कॉपी करते थे, उन्हीं को पहले सेट में हराना वाकई किसी सुखद अनुभूति से कम नहीं। 22 वर्षीय सुमित हरियाणा के झज्जर जिले के छोटे से गांव जैतपुर से हैं। सेना की शिक्षा कोर से हवलदार के रूप में सेवानिवृत्त पिता सुरेश नागल को छोड़कर परिवार में किसी को भी खेलों में जरा सी भी दिलचस्पी नहीं। बस फिर क्या था फौजी पिता ने बेटे को टेनिस खिलाड़ी बनाने की ठानी और परिवार समेत दिल्ली के नांगलोई में आकर रहने लगे। 16 अगस्त 1997 को जन्में सुमित की उम्र उस वक्त आठ वर्ष रही होगी।
महेश भूपति ने दिया आकार
अपोलो टायर टैलेंट सर्च प्रतियोगिता में सुमित चुन लिए गए। दो साल तक उन्होंने स्पॉन्सर किया। इसके बाद सुमित का वक्त तब पलटा जब उनकी जिंदगी में दिग्गज टेनिस खिलाड़ी महेश भूपति की एंट्री हुई। भूपित की एकेडमी में उन्होंने ट्रेनिंग ली। सुमित, महेश भूपति को अपना मेंटोर मानते हैं। सुमित कहते हैं- 'भूपति मेरे मेंटोर हैं और हमेशा रहेंगे। मैं करीब 10 साल का था, तब उनकी एकेडमी में पहली बार गया था। उन्होंने मेरे खेल को निखारा। उन्होंने ही मुझे स्पॉन्सर भी किया था।'
1998 के बाद दोहराया इतिहास
सुमित नागल 2015 में जूनियर ग्रैंडस्लैम खिताब जीतने वाली छठे भारतीय बने थे, उन्होंने वियतना के नाम हाओंग लि के साथ मिलकर विम्बलडन में लड़कों के वर्ग का युगल खिताब जीता था। जब अंतिम क्वॉलिफाइंग दौर में ब्राजील के जोआओ मेनेजेस के खिलाफ एक सेट गंवाने के बाद वापसी करते हुए दो घंटे 27 मिनट में 5-7 6-4 6-3 से जीत हासिल की तब वह प्रजनेश के बाद यूएस ओपन मुख्य ड्रॉ 2019 में खेलने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी बन गए, 1998 के बाद पहली बार ग्रैंडस्लैम में भारत के दो खिलाड़ियों ने भाग लिया, इससे पहले महेश भूपति और लिएंडर पेस विम्बलडन में खेले थे।