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जहाज में बैठने से रोके गए थे विंबलडन जूनियर चैपिंयन सुमित

Tue, 14 Jul 2015 10:46 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 14 Jul 2015 10:46 AM IST
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Sumit was not sitting in the flight

विंबलडन जूनियर सिंगल्स में सुमित नागल के पहले दौर का मुकाबला चार जुलाई को था। महज दो दिन पहले उन्हें लंदन के लिए वीजा मिला। तीन जुलाई को सुबह सवा सात बजे सुमित लंदन जाने को दिल्ली के एयरपोर्ट पर थे,लेकिन उन्हें फ्लाइट पर चढ़ने से रोक दिया गया।

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एक एयरलाइंस ने उन्हें यह कहकर बोर्डिंग पास देने से मना कर दिया कि वह नाबालिग हैं और बिना कोच के हवाई जहाज पर नहीं बैठ सकते हैं।

सुमित के परिजनों ने गुहार लगाई कि उसे कल विंबलडन में खेलना है,लेकिन एक नहीं सुनी गई। हारकर सुमित ने अपने जर्मनी के कोच मिरीनोव डेलफीनो से बात की।

कोच ने कहा जर्मनी का टिकट कराओ वह यहीं रुक रहे हैं। दोपहर बाद ऐसी विदेशी एयरलाइंस में उनका टिकट कराया गया जिसमें नाबालिग के नहीं जाने की प्रतिबद्धता नहीं थी।
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जर्मनी में उन्होंने कोच को साथ लिया और मैच की सुबह चार जुलाई को लंदन पहुंचे, लेकिन इसकी उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ी। वह कड़े संघर्ष में पहले दौर का ही मुकाबला हार बैठे।

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पिछले सात सालों से हैं महेश भूपति की निगरानी में सु‌मित

Sumit was not sitting in the flight

दिल्ली के नांगलोई इलाके के एक प्राइमरी स्कूल में टीचर सुमित के पिता सुरेश नागल को खुशी है कि उनके बेटे ने विंबलडन डबल्स जूनियर का खिताब जीता, लेकिन मन में टीस भी है कि अगर वह समय से लंदन पहुंचा होता तो सिंगल्स में भी कुछ कर सकता था। कम से कम पहले दौर में तो नहीं हारता।

सुरेश खुलासा करते हैं कि इस टूर्नामेंट से पहले कठिनाईयों का पहाड़ टूट पड़ा। दो दिन पहले वीजा मिलने के चलते दिक्कतें खड़ी हुईं। प्लान था कि सुमित सीधे लंदन जाएंगे जहां जर्मनी से उनके कोच पहुंचेंगे, लेकिन फ्लाइट पर बैठने से रोके जाने पर ऐसा नहीं हो सका। सुरेश कहते हैं कि जूनियर में सुमित की वर्ल्ड रैंकिंग 20 है। वह सिंगल्स में बेहतर कर सकते थे।

भूपति ने पहचाना सुमित को
सुरेश बताते हैं कि यह महेश भूपति थे जिन्होंने सुमित की प्रतिभा पहचानी। 2010 में अपोलो टायर्स ने टैलेंट हंट के सभी बच्चों को सहायता देना बंद किया तो अकेले सुमित को महेश ने अपनाया। तब से वह उसे सहारा देकर सारा खर्च उठा रहे हैं। पहले उन्होंने सुमित को कनाडा कोच बॉबी महल के पास भेजा। इसी साल उन्होंने उसे डेलफीनों के संरक्षण में जर्मनी की शटलर वास्के टेनिस अकादमी भेजा है।

कहा था जीत कर आऊंगा
सुरेश के मुताबिक सिंगल्स में हारने के बाद सुमित पहली बार डबल्स में भाग ले रहे थे। उसने फोन पर कहा था चिंता मत करो जीत कर आऊंगा। उसने वाकई में ऐसा कर दिखाया है।

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