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IOA: भारतीय ओलंपिक महासंघ के लिए सीओए नहीं बनाएगा सुप्रीम कोर्ट, प्रतिबंध के डर से मिली राहत

Fri, 19 Aug 2022 01:52 AM IST
शक्तिराज सिंह अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: शक्तिराज सिंह Updated Fri, 19 Aug 2022 01:52 AM IST
सार

शीर्ष अदालत के इस अंतरिम आदेश से साफ हो गया हैं कि दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासकों की तीन सदस्यीय समिति देश की सर्वोच्च खेल संस्था का कामकाज नहीं संभालेगी।

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Supreme Court will not form CoA for Indian Olympic Federation, relief from fear of ban
सुप्रीम कोर्ट में IOA के मामले पर सुनवाई हुई - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया जिसमें भारतीय ओलंपिक महासंघ(आईओए) में प्रशासकों की समिति (सीओए) तैनात करने के लिए कहा गया है। शीर्ष अदालत के इस अंतरिम आदेश से साफ हो गया हैं कि दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासकों की तीन सदस्यीय समिति देश की सर्वोच्च खेल संस्था का कामकाज नहीं संभालेगी। भारत के मुख्य न्यायाधीश(सीजेआई) एनवी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने भारतीय ओलंपिक महासंघ द्वारा किए गए तत्काल उल्लेख पर यह आदेश पारित किया।
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सरकार ने बताया संवेदनशील राष्ट्रीय मामला
पीठ को बताया गया कि प्रशासकों की समिति (सीओए) को अभी आईओए का कार्यभार संभालना है। जिसके बाद पीठ ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश पारित किया और मामले को अगले सोमवार को सूचीबद्ध कर दिया। केंद्र सरकार की ओर से भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह एक संवेदनशील राष्ट्रीय मामला है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीओए की नियुक्ति को बाहरी हस्तक्षेप के रूप में देखा गया है और यह आईओए के निलंबन का कारण बन सकता है। आईओए में सीओए की तैनाती पर अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक परिषद (आईओसी) को प्रतिबंधित कर सकता है। उन्होंने फीफा द्वारा अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ के निलंबन का उदाहरण दिया। 
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सॉलिसिटर जनरल ने कहा, अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक परिषद के नियमों के अनुसार यदि कोई राष्ट्रीय निकाय एक गैर-निर्वाचित निकाय द्वारा शासित होता है तो इसे बाहरी हस्तक्षेप के रूप में देखा जाता है। जिस क्षण प्रशासकों की समिति कार्यभार संभालेगी, 99 फीसदी आशंका है कि भारत ओलंपिक से निलंबित हो जाएगा। यह राष्ट्रीय प्रतिष्ठा का मामला है।
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सर्वोच्च अदालत ने माना यह राष्ट्रहित में नहीं
आईओ के वकील और सॉलिसिटर जनरल की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने आदेश दिया, याचिकाकर्ता के वकील के साथ सॉलिसिटर जनरल ने प्रस्तुत किया है कि वर्तमान आदेश के आधार पर सभी अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भाग लेने का मौका खोने की आशंका है। यह कहा गया है कि यह राष्ट्र हित में नहीं है। लिहाजा हम पक्षकारों से यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देते हैं। प्रशासकों की समिति(सीईओ) में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस अनिल आर दवे, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी और विदेश मंत्रालय के पूर्व सचिव विकास स्वरूप को रखा गया था।
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