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Sudipti Hajela Interview: took loan to buy horse, won equestrian gold in Asian games after training in France
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Sudipti Hajela Interview: कर्ज लेकर घोड़ा खरीदा, फ्रांस में ट्रेनिंग कर जीता स्वर्ण; अब जीवनभर संघर्ष को तैयार
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: शक्तिराज सिंह
Updated Sun, 01 Oct 2023 06:50 PM IST
सार
अनुश अगरवाला, छेदा, दिव्यकृति सिंह और सुदिप्ती हाजेला ने मिलकर भारत को 41 साल के बाद ड्रेसेज टीम स्पर्धा का स्वर्ण पदक दिलाया था। हालांकि, सुदिप्ती के लिए यह सफर आसान नहीं था।
एशियाई खेल 2023 में भारतीय एथलीटों से काफी उम्मीदें थीं। भारतीय खेल मंत्री ने खिलाड़ियों को विदा करते हुए अबकी बार 100 पार का नारा दिया था। भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक शानदार प्रदर्शन किया है और उम्मीदों पर खरे उतरे हैं। इस बीच भारत की घुड़सवारी टीम ने उम्मीद से कहीं ज्यादा बेहतर प्रदर्शन किया है। अनुश अगरवाला, छेदा, दिव्यकृति सिंह और सुदिप्ती हाजेला ने मिलकर भारत को 41 साल के बाद ड्रेसेज टीम स्पर्धा का स्वर्ण पदक दिलाया। इसके बाद अनुश ने व्यक्तिगत स्पर्धा में भी पदक जीता। देश को ऐतिहासिक स्वर्ण दिलाने वाली टीम का हिस्सा रहीं सुदिप्ती से अमर उजाला ने बात की और उन्होंने इस पदक के पीछे का संघर्ष बयां किया। पढ़िए इस बातचीत के खास अंश...
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सवालः आपको यह पदक जीतने के लिए कितना संघर्ष करना पड़ा?
जवाबः मैं कहूंगी संघर्ष की लिस्ट तो काफी लंबी है। लेकिन यही है की इतनी कुछ भी छोटी बड़ी चीज करने के लिए काफी कठिनाइयां और चुनौतियां आती हैं। लेकिन ये है कि मैं पिछले 10 से 12 साल से राइडिंग कर रही हूं और पांच छह सालों से बाहर रह रही हूं तो ये काफी बड़ा संघर्ष था कि घर से दूर रहना और मैंने राइडिंग करना काफी कम उम्र में ही शुरू कर दिया था। तो घर से दूर रहना और पिछले दो साल से मैं यूरोप में ही रह रही हूं और एक नॉर्मल लाइफ से अलग हटके आपका जीवन जीना स्पोर्ट्समैन की तरह, वो भी अपने आप में काफी ही कठिनाई भरा होता है। आप कभी सोचते हैं की मैं ये नहीं कर पा रही हूं वो नहीं कर पा रही हूं और एक सामान्य टीनएज लाइफ नहीं थी मेरी। स्कूल में भी यहां और कॉलेज में भी। लेकिन सब कुछ वो सारे जितने संघर्ष होते हैं। वो इस एक चीज के लिए होते हैं और यह मेडल मैं कहूंगी सिर्फ मैंने नहीं है। भारत ने जीता है। तो अगर भारत के लिए इतना संघर्ष करना पड़े तो थोड़ा क्या मैं पूरी जिंदगी इसमें लगा सकती हूं।
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सुदिप्ति
- फोटो : सोशल मीडिया
सवालः इस सफलता के पीछे आप किसको श्रेय देंगी?
जवाबः श्रेय मैं अपने पूरी ही फैमिली को दूंगी, क्योंकि आप देख सकते हैं कि इतने सारे लोग आए हैं और मेरे से दोगना-तिगुना खुशी इन लोगों को है। तो सिर्फ मम्मी पापा नहीं है उनके पीछे भी इतने मम्मी पापा को जो सपोर्ट करने वाले लोग हैं (जिनकी वजह से) मम्मी पापा मेरे साथ खड़े रह पाए। कदम से कदम मिला के मेरी बहन मेरे जितने भाई हैं। मेरे दोस्त मैं कहूंगी पूरा ही परिवार और दोस्त और पूरा ही एक घर लगता है एक स्पोर्ट्समैन को आगे पहुंचाने में।
सवालः आपको इस मुकाम तक ले जाने के लिए आपके परिवारजनों को कर्ज भी लेना पड़ा, उसकी क्या कहानी है?
जवाबः कही पहुंचने के लिए कुछ ना कुछ तो मतलब खोना पड़ता ही है तो जैसा की मैंने कहा की एक पूरा गांव लग जाता है एक स्पोर्ट्समैन को आगे बढ़ाने में। तो काफी लंबा सफर था और मैं यही कहूंगी की जितने भी संघर्ष रहे वो सब सफल रहे।
सवालः एक अपने घोड़ा भी खरीदा था, लेकिन इस स्पर्धा से ठीक पहले बीमार हो गया। फिर आपको किराये पे घोड़ा लेना पड़ा वो बताइए?
जवाबः मैंने कोविड आने से पहले घोड़ा लिया था, लेकिन उसके पैर में कुछ प्रॉब्लम हुई थी जिस कारण वो प्रतिस्पर्धा में शामिल नहीं हो पाया तो हमलोग ताबड़तोड़ कोविड के तुरंत बाद। कोविड की दूसरी लहर के बाद मैंने फ्रांस जाकर अपने ट्रेनर के साथ एक नया घोड़ा खरीदा था तो मैंने जो घोड़ा चलाया था वो मेरा खुद का ही थी। मतलब मेरा पर्सनल है वो किराए का नहीं है। मैं ही उसकी मालिक हूं और अभी फ्रांस में है।
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