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Paris Olympics: सात्विक-चिराग की जोड़ी के बाहर होने से निराश हुए कोच मथियास, लिया ये बड़ा फैसला; जानें

Sat, 03 Aug 2024 06:00 PM IST
शोभित चतुर्वेदी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शोभित चतुर्वेदी Updated Sat, 03 Aug 2024 06:00 PM IST
सार

सात्विक और चिराग गुरुवार को पुरुष युगल के अंतिम आठ मुकाबले में मलेशिया के आरोन चिया और सोह वूई यिक से 21-13, 14-21, 16-21 से हार गए थे।

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Satwik-Chirag coach mathias bo left coaching after Indian doubles pair poor performance in Paris Olympics
सात्विक-चिराग की जोड़ी - फोटो : BAI Media

विस्तार

सात्विकसाईराज रेंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की पुरुष युगल जोड़ी का सफर पेरिस ओलंपिक में क्वार्टर फाइनल में समाप्त हो गया था। इस भारतीय जोड़ी की हार से उनके कोच मथियास बो काफी निराश हुए हैं और सात्विक-चिराग के ओलंपिक से बाहर होने के बाद मथियास ने कोचिंग से संन्यास लेने की घोषणा कर दी है। सात्विक और चिराग गुरुवार को पुरुष युगल के अंतिम आठ मुकाबले में मलेशिया के आरोन चिया और सोह वूई यिक से 21-13, 14-21, 16-21 से हार गए थे।
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लंबे समय से सात्विक-चिराग के साथ जुड़े थे बो 
लंदन ओलंपिक के रजत पदक विजेता बो टोक्यो ओलंपिक से पहले चिराग और सात्विक के कोच के रूप में उनसे जुड़े थे। डेनमार्क के 44 वर्षीय पूर्व खिलाड़ी बो ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर लिखा, मेरे लिए, कोचिंग के दिन यहीं खत्म हो जाते हैं। मैं कम से कम अभी भारत या कहीं और इसे जारी नहीं रखूंगा। मैंने बैडमिंटन हॉल में बहुत अधिक समय बिताया है और कोच बनना भी काफी तनावपूर्ण है, मैं एक थका हुआ बूढ़ा आदमी हूं।
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सात्विक-चिराग को दी सांत्वना
पेरिस में पुरुष युगल वर्ग में सात्विक और चिराग पदक के दावेदार थे और बो ने उन्हें सांत्वना दी। उन्होंने कहा, मैं खुद भी इस भावना को अच्छी तरह से जानता हूं। हर दिन कड़ी मेहनत करना, अपने जीवन में सर्वश्रेष्ठ लय में रहना और फिर चीजें वैसी नहीं होतीं जैसी आप उम्मीद करते हैं। मुझे पता है कि आप लोग निराश हैं, मैं जानता हूं कि आप भारत के लिए पदक लाना चाहते थे लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो सका।
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हालांकि बो ने कहा कि भले ही उनके शिष्य पेरिस से पदक लेकर वापस नहीं लौटे लेकिन वह एक संतुष्ट व्यक्ति के रूप में पद छोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा, आपके पास गर्व करने के लिए सब कुछ है। आपने इस ओलंपिक शिविर में कितनी मेहनत की है, चोटों से जूझते हुए, दर्द को कम करने के लिए इंजेक्शन भी लिए हैं, यह समर्पण है, यह जुनून है।
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