सुशील, योगेश्वर के ओलंपिक मेडल पर मची खीचतान
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सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त की ओर से लंदन में जीते गए ओलंपिक मेडल पर खीचतान मची है। मेडल दो हैं लेकिन खेल मंत्रालय की ओर से दिए जाने वाले इनके कैश अवार्ड पर दावा जताने वाले कई हैं। भारतीय कुश्ती संघ ने सुशील के रजत के लिए तत्कालीन टीम के चीफ कोच विनोद कुमार और योगेश्वर के कांस्य पदक के लिए उस वक्त टीम के कोच यशवीर सिंह का नाम भेजा है।
वहीं इन दोनों के शुरूआती दौर के गुरू रहे सतपाल ने खेल मंत्रालय से इन दोनों की दावेदारी को गलत ठहराते हुए कैश अवार्ड पर अपना दावा जताया है। सुशील के बीजिंग ओलंपिक में जीते गए कांस्य पदक का कैश अवार्ड यशवीर सिंह को दिया जा चुका है, बावजूद इसके मंत्रालय ने इन दोनों मेडल पर अब तक कोई फैसला नहीं लिया है।
नियम विनोद, यशवीर के पक्ष में
कैश अवार्ड पर मंत्रालय का नियम एक दम साफ है पदक विजेता का कोच उसी को माना जाएगा जिसने नेशनल कैंप में खिलाड़ी को 240 या उससे अधिक दिनों तक तैयारियां कराई हों। ऐसे में विनोद कुमार और यशवीर का दावा ठीक बैठता है।
लंदन ओलंपिक से पहले दोनों कोच लगातार सुशील और योगेश्वर के साथ कैंप और विदेशी दौरों पर रहे। ऐसे सतपाल का दावा खरा नहीं उतरता है। सुशील के रजत के लिए उनके कोच को 15 व योगेश्वर के कांस्य के लिए 10 लाख रुपये की राशि मंत्रालय को देनी है, लेकिन तीन साल बाद भी इस पर फैसला नहीं हो पाया है।
कुश्ती संघ कई बार कर चुकी है पैरवी
कुश्ती संघ दोनों मेडलों पर कैश अवार्ड दिए जाने की याद मंत्रालय और साई को कई बार दिला चुका है, लेकिन फैसला अब तक नहीं हो पाया है। यह पहली बार नहीं है जब सुशील, योगेश्वर को लेकर सतपाल और कुश्ती संघ में ठनी है। सतपाल को सुशील, योगेश्वर के लिए द्रोणाचार्य अवार्ड दिए जाने पर भी बवाल मचा था।
जब बीजिंग ओलंपिक मेडल के लिए यशवीर को कैश अवार्ड दिया गया था तब भी सतपाल ने आपत्ति दर्ज कराई थी, लेकिन कुश्ती संघ का कहना है कि सतपाल सुशील और योगेश्वर के कोच कैसे हो सकते हैं। उनकी ओर से दोनों का नाम मंत्रालय के नियमों के तहत भेजा गया है। सतपाल इन नियमों में कहीं भी नहीं आते हैं।
साई फिर करेगी छानबीन
सूत्र बताते हैं कि साई ने अपनी शुरूआती छानबीन के बाद विनोद और यशवीर के दावे को जायज बताते हुए दोनों को कैश अवार्ड देने की सिफारिश की है, लेकिन यह भी लिख दिया है कि सतपाल इस पर अपना दावा जता रहे हैं। ऐसे में अंतिम फैसला मंत्रालय ले, लेकिन मंत्रालय का कहना है छानबीन साई का काम है वह जो अंतिम सिफारिश करेगी वह उसी का नाम प्रस्तावित करेंगे।