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Hindi News ›   Sports ›   Prague Chess Masters 2025 Winner Aravindh Chithambaram Indian GrandMaster Struggle Life Story

अरविंद चिदंबरम की कहानी: तीन वर्ष की उम्र में पिता को खोया, संघर्ष को गले लगाया, अब जीता प्राग मास्टर्स खिताब

Sat, 08 Mar 2025 04:40 PM IST
Mayank Tripathi स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Mayank Tripathi Updated Sat, 08 Mar 2025 04:40 PM IST
सार

अब वर्षों के त्याग और कड़ी मेहनत का फल आखिरकार अरविंद को मिल रहा है। विश्व चैंपियन गुकेश वेल्लामल स्कूल में पढ़ते थे और अब वहीं से एक और प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी मिल गया है। अरविंद आखिरकार गुकेश के सीनियर हैं।

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Prague Chess Masters 2025 Winner Aravindh Chithambaram Indian GrandMaster Struggle Life Story
अरविंद चिदंबरम - फोटो : Chess.com

विस्तार

प्राग मास्टर्स में खिताब जीतने वाले अरविंद चिदंबरम वैश्विक शतरंज में डी गुकेश और आर प्रज्ञानंद की तुलना में देर से उभरे हैं और 25 साल की उम्र में उन्होंने जिस तरह से जीवन की बाधाओं को पार किया है, उसे देखते हुए लगता है कि वह प्रगति करते रहेंगे। मदुरई में जन्में अरविंद जब तीन वर्ष के थे, उन्होंने अपने पिता को खो दिया था और उनकी मां एलआईसी एजेंट के रूप में काम करती थीं। उन्होंने मदुरई छोड़कर चेन्नई में बसने का फैसला किया जो भारत की अनौपचारिक शतरंज की राजधानी है।
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गुकेश के स्कूल ने दिया देश को एक और विजेता
अब वर्षों के त्याग और कड़ी मेहनत का फल आखिरकार अरविंद को मिल रहा है। विश्व चैंपियन गुकेश वेल्लामल स्कूल में पढ़ते थे और अब वहीं से एक और प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी मिल गया है। अरविंद आखिरकार गुकेश के सीनियर हैं। अरविंद को प्राग में जीत से पोलैंड में प्रतिष्ठित ग्रैंड शतरंज टूर के लिए वाइल्ड कार्ड मिल गया है। उन्होंने कहा- टूर्नामेंट के दौरान मुझे निमंत्रण मिल रहे हैं और ग्रैंड शतरंज टूर रैपिड और ब्लिट्ज (टूर्नामेंट) उनमें से एक है।
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इन इवेंट्स में भी खेलेंगे अरविंद
आम तौर पर विश्व रैंकिंग में शीर्ष-20 में जगह बनाने पर शीर्ष टूर्नामेंट में कम से कम कुछ निमंत्रण की गारंटी होती है लेकिन प्राग से पहले ही अरविंद ने शारजाह मास्टर्स और बील इंटरनेशनल में अपनी भागीदारी की पुष्टि की थी जो क्रमशः मई और जुलाई में होने वाले इवेंट हैं।
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2015 में ग्रैंडमास्टर बने थे अरविंद
अरविंद को अब चोलामंडलम समूह का समर्थन प्राप्त है। लेकिन बहुत कम लोगों को याद है कि जब 2013 में विश्वनाथन आनंद ने चेन्नई में मैग्नस कार्लसन को अपना विश्व खिताब गंवा दिया था, उसी समय स्कूली छात्र अरविंद शहर के दूसरी ओर एक अंतरराष्ट्रीय ओपन प्रतियोगिता में ध्यान आकर्षित कर रहे थे। यह वही टूर्नामेंट था जहां अरविंद ने ओपन स्पर्धा जीतकर अपना पहला जीएम नॉर्म हासिल किया और तब से पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह 2015 में ग्रैंडमास्टर बन गए और लगातार सुधार कर रहे हैं।

इस मामले में पहले भारतीय बने अरविंद
2019 में अरविंद ने क्लासिकल, रैपिड और ब्लिट्ज में इंडियन ओपन जीता और यह दुर्लभ उपलब्धि हासिल करने वाले पहले भारतीय बने। पिछले नवंबर में उन्होंने आखिरकार चेन्नई ग्रैंडमास्टंर्स टूर्नामेंट जीता और 2700 ईएलओ रेटिंग को पार किया। अब प्राग मास्टर्स में उनकी जीत ने गुकेश, अर्जुन और प्रज्ञानानंद के चौथे स्तंभ के रूप में उनकी स्थिति की पुष्टि की। प्राग में अरविंद ने तीन जीत और छह ड्रॉ से कुल छह अंक बनाए। मास्टर्स जीतने के बाद शुक्रवार दोपहर तक अरविंद लाइव वर्ल्ड रैंकिंग में 14वें और भारत में चौथे स्थान पर थे।
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