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Hindi News ›   Sports ›   PR Sreejesh: Hockey legends Dilip Tirkey-Harendra said - learn patience from Sreejesh

PR Sreejesh: टिर्की-हरेंद्र समेत हॉकी दिग्गजों ने कहा- धैर्य की परिभाषा सीखनी हो तो श्रीजेश से सीखें

Wed, 14 Aug 2024 10:01 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: स्वप्निल शशांक Updated Wed, 14 Aug 2024 10:01 PM IST
सार

हॉकी इंडिया द्वारा उनकी विदाई के लिये आयोजित समारोह में भारतीय पुरूष हॉकी टीम के पूर्व कोच हरेंद्र सिंह ने कहा ,‘‘ जुलाई 2003 में त्रिवेंद्रम में पहली बार जब मैने श्रीजेश को खेलते देखा तभी मैं इसकी प्रतिभा भांप गया था । वहां से शुरू हुआ इसका सफर आसान नहीं रहा । कोई और होता तो इतना संघर्ष देखकर काफी पहले छोडकर चला गया होता।’’
 

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PR Sreejesh: Hockey legends Dilip Tirkey-Harendra said - learn patience from Sreejesh
पीआर श्रीजेश - फोटो : PTI

विस्तार

पीआर श्रीजेश को धैर्य का पर्याय बताते हुए भारतीय हॉकी जगत के दिग्गजों ने कहा कि वह आधुनिक हॉकी के सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर ही नहीं बल्कि युवाओं के लिये मैदान से भीतर और बाहर प्रेरणास्रोत भी रहे हैं। श्रीजेश ने पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने के साथ ही हॉकी को अलविदा कह दिया और अब जूनियर टीम के कोच के रूप में नयी पारी का आगाज करेंगे।
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हॉकी इंडिया द्वारा उनकी विदाई के लिये आयोजित समारोह में भारतीय पुरूष हॉकी टीम के पूर्व कोच हरेंद्र सिंह ने कहा, 'जुलाई 2003 में त्रिवेंद्रम में पहली बार जब मैने श्रीजेश को खेलते देखा तभी मैं इसकी प्रतिभा भांप गया था। वहां से शुरू हुआ इसका सफर आसान नहीं रहा। कोई और होता तो इतना संघर्ष देखकर काफी पहले छोड़कर चला गया होता।'
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भारतीय महिला टीम के कोच ने कहा, 'किसी को धैर्य की परिभाषा सीखनी हो तो श्रीजेश से सीखे । उन्होंने आने वाले गोलकीपरों के लिये काफी ऊंचे मानक स्थापित किये हैं।' वहीं हॉकी इंडिया के अध्यक्ष और भारत के दिग्गज डिफेंडर रहे दिलीप टिर्की ने कहा ,‘‘ जब हम खेलते थे तब श्रीजेश को वार्मअप के लिये बुलाते थे। वहां से लेकर भारतीय टीम को कांस्य पदक जिताने तक श्रीजेश ने लंबा सफर तय किया है।'
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उन्होंने कहा, 'यही वजह है कि हमने उसके कैरियर को सराहने के लिये विदाई समारोह का आयेाजन किया जो भारतीय हॉकी में नई शुरूआत है और श्रीजेश इसके हकदार भी हैं।' कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने कहा कि उनके जैसे युवा खिलाड़ियों को श्रीजेश ने मेहनत, मानसिक दृढता और लक्ष्य के लिये डटे रहना सिखाया।

उन्होंने कहा, 'मैंने 2015 में पदार्पण किया और पहली बार उनके साथ खेला । इतने साल के सफर में इन्होंने कई कुर्बानियां दी और हमें बहुत कुछ सिखाया ।मैने पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक के मुकाबले से पहले इनके कहा कि भाई ये आखिरी मैच है और उनका जवाब था कि खेलूंगा भी ऐसे ही।'


उन्होंने कहा, 'हमने पेरिस में पहले ही दिन से ड्रेसिंग रूम में इनका पोस्टर लगा रखा था और हमें इनके लिये ही पदक जीतना था।' चार ओलंपिक खेल चुके मनप्रीत सिंह ने कहा, 'मेरे पूरे कैरियर में श्रीजेश मेरे लिये भाई जैसे थे जिन्होंने हर कदम पर मार्गदर्शन किया । पीछे से वह लगातार हमें डांटते भी थे और शाबासी भी देते थे जो हमें अच्छा लगता था । हमें उनकी कमी बहुत खलेगी।' इस मौके पर पेरिस ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली निशानेबाज मनु भाकर, पूर्व ओलंपियन हरबिंदर सिंह, अजितपाल सिंह, मीर रंजन नेगी, सरदार सिंह भी मौजूद थे।
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