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Paris Olympics: ओलंपिक के लिए बर्फ पर चले और घास पर सोई भारतीय हॉकी टीम, जानें किस तरह की खेलों के लिए तैयारी

Thu, 01 Aug 2024 10:33 AM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, पेरिस Published by: स्वप्निल शशांक Updated Thu, 01 Aug 2024 10:33 AM IST
सार

भारतीय टीम अब क्वार्टर फाइनल में पहुंच चुकी है और ऐसा लगता है कि स्विट्जरलैंड के बूट कैंप का फायदा मिलेगा। होर्न एक साहसिक और खोजकर्ता के रूप में विख्यात हैं।

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Paris Olympics: Indian hockey team walked on ice and slept on grass for Olympics, know their preparation
भारतीय हॉकी टीम - फोटो : PTI

विस्तार

मध्य यूरोप की सबसे बड़ी पर्वतमाला आल्पस की सबसे ऊंची चोटी ग्लेशियर 3000 पर चलने से लेकर लुभावनी रूजमोंट में साइकिल चलाने और घास पर सोने तक भारतीय हॉकी टीम ने मिशन पेरिस ओलंपिक के लिए कड़ा अभ्यास किया है। स्विट्जरलैंड के लाइफ कोच 58 साल के माइक होर्न ने टीम में सौहार्दपूर्ण माहौल बनाने और असफलता का डर निकालने के लिए तीन दिन के बूट कैंप में कड़ी मेहनत कराई है।
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होर्न एक साहसिक और खोजकर्ता के रूप में विख्यात हैं और उन्होंने 2011 में विश्वकप विजेता बनी भारतीय क्रिकेट टीम के लिए, आईपीएल टीम केकेआर और 2014 विश्व कप फुटबॉल चैंपियन जर्मन टीम के साथ काम किया है। हरमनप्रीत की अगुवाई वाली भारतीय हॉकी टीम ने स्विट्जरलैंड में शिविर में हिस्सा लिया तो सभी को अपेक्षा थी कि टीम ओलंपिक से पहले जरूरी मानसिक दृढ़ता हासिल कर लेगी।
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भारतीय टीम अब क्वार्टर फाइनल में पहुंच चुकी है और ऐसा लगता है कि स्विट्जरलैंड के बूट कैंप का फायदा मिलेगा। होर्न बताते हैं कि जब मैंने ग्लेशियर में बर्फ पर चलने की बात कही तो उन्होंने इसे स्वीकार किया और एक-दूसरे का समर्थन किया जो आने वाले मैचों में उनके लिए महत्वपूर्ण होगा। इस कैंप का मकसद टीम के धैर्य और टीमवर्क का परीक्षण करना था। होर्न ने कहा कि मैंने टीम को एक ही मंत्र दिया है कि अपनी ताकत पर फोकस करो और मानसिक रूप से मजबूत रहो।
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तीन दिन के बूट कैंप में ये रही गतिविधियां
  • बूट कैंप में मानसिक और शारीरिक चुनौती थी जिसमें स्विट्जरलैंड के बर्नीज़ ओबरलैंड क्षेत्र के एक सुरम्य गांव सानेन में पहली रात बिताने जैसे बहुआयामी रोमांच शामिल है।
  • दूसरे दिन में रूजमोंट तक साइकिल चलाना, केबल कार की सवारी, और वाया फेराटा-एक संरक्षित चढ़ाई मार्ग से निपटना शामिल था। दिन का समापन रॉसिनीयर की साइकिल यात्रा के साथ हुआ, जहां टीम ने एक गांव के खेत में घास पर सोकर रात बिताई और पारंपरिक रेसलेट, पनीर आधारित एक पारंपरिक स्विस व्यंजन का आनंद लिया।
  • तीसरे एवं अंतिम दिन ग्रुप उसी क्षेत्र में रहा और एक झरने के नीचे समय बिताया जो काफी रोमांचक था।
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