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Paris Olympics: क्या टैटू बना मनु भाकर की सफलता का कारण? किस कविता से ली थी प्रेरणा, जानें पूरा मामला

Mon, 29 Jul 2024 02:41 PM IST
शोभित चतुर्वेदी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शोभित चतुर्वेदी Updated Mon, 29 Jul 2024 02:41 PM IST
सार

Manu Bhaker Bronze Medal Olympics : मनु से टोक्यो ओलंपिक में भी पदक जीतने की उम्मीद थी, लेकिन वह चूक गई थीं, लेकिन इस बार उन्होंने बिना कोई गलती किए पदक पर सटीक निशाना साधा।

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Paris Olympics 2024 Shooting Bronze Medalist Manu Bhaker Tattoo on Back of Her Neck Still I Rise
मनु भाकर - फोटो : पीटीआई

विस्तार

महिला निशानेबाज मनु भाकर ने रविवार को 10 मीटर एयर पिस्टर स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा था। मनु ने इसके साथ ही पेरिस ओलंपिक में भारत के पदक का खाता खोल दिया था। वह पहली महिला भारतीय निशानेबाज बनीं थीं जिन्होंने पेरिस में पदक जीता। मनु से टोक्यो ओलंपिक में भी पदक जीतने की उम्मीद थी, लेकिन वह चूक गई थीं, लेकिन इस बार उन्होंने बिना कोई गलती किए पदक पर सटीक निशाना साधा। टोक्यो ओलंपिक के दौरान खराब प्रदर्शन के बाद मनु ने खुद को प्रेरित रखने के लिए गर्दन के पीछ 'स्टिल आई राईज' जिसका हिंदी में अर्थ है 'मैं अभी भी कामयाब हो सकती हूं' का टैटू गुदवा रखा है। 
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टोक्यो की निराशा को पीछे छोड़ने में सफल रहीं मनु
मनु की जीत के बाद इस टैटू की चर्चा काफी हो रही है। मनु को यह टैटू बनवाने की प्रेरणा कवियित्री माया एंजेलो की कविता से मिली थी जिसका शीर्षक भी यही था। मनु ने इस कविता से प्रेरणा ली और टोक्यो की निराशा को पेरिस ओलंपिक में पदक जीतकर दूर करने में सफल रहीं। टैटू के बारे में मनु ने बीबीसी के एक पत्रकार से कहा था, स्टिल आई राईज सिर्फ एक शब्द नहीं है, बल्कि एक प्रक्रिया है मुश्किल समय में खुद को साबित करने का। ये शब्द मेरे लिए प्रेरणास्रोत हैं। ये मेरे दृढ़ निश्चय को और बढ़ाते हैं। चाहे जितनी असफलता मिले, मुझे भरोसा है कि मैं फिर से खड़ी होऊंगी। 
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एशियाई खेलों की टीम में नहीं थीं मनु
महज नौ माह पहले तक मनु भाकर 10 मीटर एयर पिस्टल की भारतीय टीम में भी शामिल नहीं थीं। बीते वर्ष वह हांगझोऊ एशियाई खेलों में खेलीं, लेकिन इस इवेंट की टीम में नहीं थीं। यह वह इवेंट है जो उनके दिल के सबसे करीब है। एशियाड से पहले मनु भाकर ने पिछले सारे विवादों को भुलाकर कोच जसपाल राणा का हाथा थामा तो इसकी एक वजह 10 मीटर एयर पिस्टल में वापस प्रभुत्व स्थापित करना था। एशियाड के बाद मनु का समर्पण और जसपाल का साथ काम आया। मनु ने न सिर्फ 10 मीटर एयर पिस्टल की ओलंपिक टीम में जगह बनाई बल्कि शनिवार को क्वालिफाइंग दौर में 580 का विश्वस्तरीय स्कोर कर तीसरे स्थान पर रहते हुए इस इवेंट के फाइनल में भी जगह बनाई।
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स्कूल में टेनिस, स्केटिंग और मुक्केबाजी में भी हिस्सा लेती थीं मनु 
मनु 50 से अधिक अंतरराष्ट्रीय और 70 से अधिक राष्ट्रीय पदक जीत चुकी हैं। 2021 में हुए ओलंपिक में वह सातवें स्थान पर रहीं। 2023 में मनु ने एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीता था। वह पेरिस ओलंपिक में 21 सदस्यीय भारतीय शूटिंग टीम से कई व्यक्तिगत स्पर्धाओं में हिस्सा लेने वाली एकमात्र एथलीट हैं। हरियाणा के झज्जर में जन्मीं मनु भाकर ने स्कूल के दिनों में टेनिस, स्केटिंग और मुक्केबाजी समेत कई खेलों में हिस्सा लिया। मुक्केबाजी खेलते वक्त मनु के आंख पर चोट लग गई थी। इसी के बाद उनका बॉक्सिंग में सफर खत्म हो गया। हालांकि, मनु के अंदर खेलों को लेकर एक अलग जुनून था, जिसके चलते वह एक बेहतरीन निशानेबाज बनने में कामयाब रहीं।
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