टीम इंडिया की मेलबर्न में जीत ‘फर्श से अर्श’ की विजय गाथा है। जो टीम दस दिन पहले अपने न्यूनतम टेस्ट स्कोर 36 रन पर ढेर हो गई हो। वो फिर मनोबल बटोरकर मैदान पर उतरे। सामने चुनौतियों का एवरेस्ट हो विराट कोहली, मोहम्मद शमी, इशांत शर्मा और रोहित शर्मा की सेवाएं टीम को उपलब्ध न हो। टॉस भी गंवा दिया हो और गेंदबाज उमेश यादव बीच मैच में चोटिल हो गए हों। पर तारीफ है कप्तान रहाणे की जिसने अपने प्रदर्शन और जज्बे सेे पूरी टीम में वापसी की प्रेरणा भर दी।
2 of 4
भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया 2020
- फोटो : ट्विटर @imjadeja
नई शताब्दी में भारत के नाम विदेशों में कई यादगार जीते हैं लेकिन जब इस सकारात्मक सोच के साथ वापसी की बात आएगी तो भारतीय क्रिकेट के इतिहास में रहाणे की कप्तानी और भारतीय गेंदबाजों का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाएगा। बारह साल में यह पहली बार है कि जब किसी टीम ने मेलबर्न में चौथी पारी में खेलते हुए जीत हासिल की। इससे पहले ऐसा 2008 में दक्षिण अफ्रीका ने किया था।
3 of 4
कोच शास्त्री के साथ रहाणे
- फोटो : ट्विटर @ajinkyarahane88
रहाणे जिनकी पिछली 18 महीनों में टेस्ट टीम में जगह पर सवाल उठाए जा रहे थे, उन्होंने बड़े दबाव के बीच मैदान के अंदर और बाहर संयम का परिचय देकर दिखाया है कि वह कैप्टन कूल के नए अवतार हैं जो अपने खिलाड़ियों से शत-प्रतिशत लेना तो जानते हैं अपने कुशल रणनीति से विपक्षी टीम को चारों खाने चित कर सकते हैं। खुद रहाणे का मानना है कि छह साल पहले लॉर्ड्स में लगाया गया उनका शतक उनका बेहतरीन प्रयास था, लेकिन समर्थकों के दिलो-दिमाग में मेलबर्न की शतकीय पारी वर्षों तक ताजा रहेगी।
4 of 4
विकेट लेने के जश्न में झूमते जडेजा और रहाणे
- फोटो : ट्विटर @BCCI
- अश्विन को शुरुआती दिन पिच की नमी को देखकर पहले ही घंटे में स्पिनर अश्विन को गेंद सौंपना
- पहला टेस्ट खेल रहे सिराज के हुनर को भांपकर लंच के बाद पुरानी गेंद देना, ताकि स्विंग करा सकें
- नजदीकी क्षेत्ररक्षण जमाकर ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को दबाव में कैच देने पर विवश करना
- चौथे दिन बुमराह से तीन ओवर का स्पैल ही कराना, ताकि नई गेंद लेने पर वह ताजा दम रहें