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Paris Olympics: 'निशानेबाजी में और पदक जीत सकते थे', अभिनव बिंद्रा ने भारतीय निशानेबाजों को लेकर कही ये बात

Mon, 12 Aug 2024 07:33 PM IST
शोभित चतुर्वेदी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शोभित चतुर्वेदी Updated Mon, 12 Aug 2024 07:33 PM IST
सार

भारत ने निशानेबाजी में तीन सहित कुल मिलाकर छह पदक जीते। इस दौरान मनु भाकर आजादी के बाद ओलंपिक के एक ही सत्र में दो पदक जीतने वाली देश की पहली खिलाड़ी बनीं।

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Olympic gold medallist Abhinav Bindra believes Indian shooters had scope for more medals in Paris Olympics
अभिनव बिंद्रा - फोटो : @Abhinav_Bindra

विस्तार

भारत ने पेरिस ओलंपिक में छह में से तीन पदक निशानेबाजी में जीते थे। भारतीय निशानेबाज टोक्यो में प्रभाव छोड़ने में विफल रहे थे, लेकिन ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा का मानना है कि भारतीय निशानेबाज पेरिस खेलों में और अधिक पदक जीत सकते थे। हालांकि, बिंद्रा का मानना है कि कुल मिलाकर शूटर्स को अपने अभियान पर गर्व होना चाहिए। 
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भारत ने जीते एक रजत, पांच सहित कुल छह पदक
भारत ने निशानेबाजी में तीन सहित कुल मिलाकर छह पदक जीते। इस दौरान मनु भाकर आजादी के बाद ओलंपिक के एक ही सत्र में दो पदक जीतने वाली देश की पहली खिलाड़ी बनीं। महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल में कांस्य पदक जीतने के बाद मनु ने सरबजोत सिंह के साथ 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित निशानेबाजी में भी कांस्य पदक जीता। भारत को एक और कांस्य स्वप्निल कुसाले ने 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन स्पर्धा में दिलाया।
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बिंद्रा ने कहा, कुछ निशानेबाज चूक गए लेकिन हर किसी ने अच्छी टक्कर दी। अच्छा परिणाम जरूरी है लेकिन उससे अधिक महत्वपूर्ण यह देखने के बारे में है कि आपने एक देश के तौर पर प्रदर्शन के मामले में कितना सुधार किया है। आप इस तरह देखें तो हमने पहले से बेहतर प्रदर्शन किया है। हम कुछ और प्रदर्शनों को पदकों में बदलते देखना चाहते हैं, लेकिन हमारे पास गर्व करने के लिए बहुत कुछ है।
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बीजिंग ओलंपिक (2008) के स्वर्ण पदक विजेता बिंद्रा ने कोच जसपाल राणा के साथ मनमुटाव खत्म करने और सफलता के लिए मिलकर काम करने पर मनु की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, राणा ज्ञान का भंडार है, खिलाड़ियों से कड़ी मेहनत करवाने वाले कोच हैं और यह अच्छी बात है। मेरे पास ऐसे कोच थे जो मुझे नापसंद थे लेकिन मैं उनको चाहता भी था। मैंने उनके साथ काम करने का एक तरीका ढूंढ लिया था। मैं मनु को श्रेय देता हूं कि उन्होंने कुछ वर्षों के कठिन समय के बाद जसपाल के साथ समझौता कर लिया। यह एक कोच-एथलीट के रिश्ते में सामान्य है। एथलीट संवेदनशील लोग होते हैं और जब हम दबाव में होते हैं तो संवेदनशीलता बढ़ जाती है।

बिंद्रा ने बबुता का हौसला बढ़ाया 
बिंद्रा ने मनु और कुसाले की सराहना की तो वहीं मामूली अंतर से कांस्य पदक चूकने वाले अर्जुन बबुता का हौसला बढ़ाया। बबुता 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में चौथे स्थान पर रहे थे। उन्होंने कहा, मैंने प्रतियोगिता से पहले और बाद में उनसे बात की, वह निराश था, लेकिन वह भविष्य की ओर देख रहा है। उसे चौथे स्थान पर रहने की टीस से निकलने में थोड़े समय की जरूरत होगी। लेकिन यही जीवन है, यही खेल है।
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