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Neeraj Chopra: स्विट्जरलैंड की वादियों में नीरज चोपड़ा को मिली नई ऊर्जा, बोले- अगला सत्र और भी बेहतर होगा
Wed, 08 Oct 2025 03:16 PM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ज्यूरिख
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ज्यूरिख
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Wed, 08 Oct 2025 03:16 PM IST
सार
नीरज अब अगले सत्र में और मजबूत वापसी के लिए स्विस वादियों में खुद को तैयार कर रहे हैं, एक ऐसी जगह, जिसने उन्हें न सिर्फ सफलता दी बल्कि आत्मविश्वास और सुकून भी लौटाया।
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नीरज चोपड़ा
- फोटो : PTI
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विस्तार
टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण और पेरिस ओलंपिक में रजत जीतने वाले भारत के स्टार भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा इन दिनों स्विट्जरलैंड में हैं, जहां वे अगले सत्र की तैयारी से पहले रिकवरी पर ध्यान दे रहे हैं। नीरज के लिए यह साल भले ही चुनौतियों से भरा रहा हो, लेकिन वे इसे एक सीख और अनुभव से भरपूर सीजन मानते हैं।
नीरज अब अगले सत्र में और मजबूत वापसी के लिए स्विस वादियों में खुद को तैयार कर रहे हैं, एक ऐसी जगह, जिसने उन्हें न सिर्फ सफलता दी बल्कि आत्मविश्वास और सुकून भी लौटाया। नीरज ने ज्यूरिख से कहा, 'यह सत्र काफी चुनौतीपूर्ण रहा। मुझे इस पर गर्व है क्योंकि हर प्रतियोगिता ने मुझे कुछ नया सिखाया और आत्मविश्वास बढ़ाया।'
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नीरज अब अगले सत्र में और मजबूत वापसी के लिए स्विस वादियों में खुद को तैयार कर रहे हैं, एक ऐसी जगह, जिसने उन्हें न सिर्फ सफलता दी बल्कि आत्मविश्वास और सुकून भी लौटाया। नीरज ने ज्यूरिख से कहा, 'यह सत्र काफी चुनौतीपूर्ण रहा। मुझे इस पर गर्व है क्योंकि हर प्रतियोगिता ने मुझे कुछ नया सिखाया और आत्मविश्वास बढ़ाया।'
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'बेहतर प्रदर्शन की गुंजाइश हमेशा रहती है'
इस साल नीरज ने दोहा में 90 मीटर की बाधा पार की, लेकिन विश्व चैम्पियनशिप में पदक हासिल नहीं कर सके और 84.03 मीटर के थ्रो के साथ आठवें स्थान पर रहे। फिर भी वे निराश नहीं हैं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, 'बेहतर प्रदर्शन की गुंजाइश तो हमेशा रहती है और वही मुझे प्रेरित करती है।' अब उनका पूरा ध्यान अपने शरीर की रिकवरी और अगले सत्र में दमदार वापसी पर है। नीरज ने कहा, 'शरीर अच्छा महसूस कर रहा है। थोड़े आराम और रिकवरी के साथ मैं अगले सत्र में बेहतर प्रदर्शन कर सकूंगा।'
इस साल नीरज ने दोहा में 90 मीटर की बाधा पार की, लेकिन विश्व चैम्पियनशिप में पदक हासिल नहीं कर सके और 84.03 मीटर के थ्रो के साथ आठवें स्थान पर रहे। फिर भी वे निराश नहीं हैं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, 'बेहतर प्रदर्शन की गुंजाइश तो हमेशा रहती है और वही मुझे प्रेरित करती है।' अब उनका पूरा ध्यान अपने शरीर की रिकवरी और अगले सत्र में दमदार वापसी पर है। नीरज ने कहा, 'शरीर अच्छा महसूस कर रहा है। थोड़े आराम और रिकवरी के साथ मैं अगले सत्र में बेहतर प्रदर्शन कर सकूंगा।'
स्विट्जरलैंड से नीरज का खास लगाव
नीरज का स्विट्जरलैंड से गहरा नाता है। यह सिर्फ उनके प्रशिक्षण का केंद्र नहीं, बल्कि यादों का खजाना भी है। उन्होंने कहा, 'लुसाने बहुत खूबसूरत है और जेरमाट के पहाड़ लुभा लेते हैं।' स्विस पर्यटन ने 2022 में नीरज को अपना ‘दोस्ती दूत’ बनाया था। इसी दौरान उन्हें जुंगफ्राउजोच के आइस पैलेस में सम्मानित किया गया, जहां पहले रोजर फेडरर और रोरी मैकलरॉय जैसे दिग्गजों को सम्मान मिला था। नीरज ने 2022 में ज्यूरिख डायमंड लीग ट्रॉफी जीती थी, जिसे वे अपने करियर का यादगार पल मानते हैं। उन्होंने बताया, 'डायमंड लीग ट्रॉफी जीतने के बाद मैंने अपने परिवार और दोस्तों के साथ स्विट्जरलैंड को घूमा। यह वो जगह है जिसने मुझे बहुत खुशियां दी हैं।'
नीरज का स्विट्जरलैंड से गहरा नाता है। यह सिर्फ उनके प्रशिक्षण का केंद्र नहीं, बल्कि यादों का खजाना भी है। उन्होंने कहा, 'लुसाने बहुत खूबसूरत है और जेरमाट के पहाड़ लुभा लेते हैं।' स्विस पर्यटन ने 2022 में नीरज को अपना ‘दोस्ती दूत’ बनाया था। इसी दौरान उन्हें जुंगफ्राउजोच के आइस पैलेस में सम्मानित किया गया, जहां पहले रोजर फेडरर और रोरी मैकलरॉय जैसे दिग्गजों को सम्मान मिला था। नीरज ने 2022 में ज्यूरिख डायमंड लीग ट्रॉफी जीती थी, जिसे वे अपने करियर का यादगार पल मानते हैं। उन्होंने बताया, 'डायमंड लीग ट्रॉफी जीतने के बाद मैंने अपने परिवार और दोस्तों के साथ स्विट्जरलैंड को घूमा। यह वो जगह है जिसने मुझे बहुत खुशियां दी हैं।'
'अगले सत्र पर नजर'
नीरज का मानना है कि भारत से बाहर रहना उनकी ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं के लिए ज़रूरी है क्योंकि ज्यादातर इवेंट्स यूरोप में होते हैं। उन्होंने कहा, 'अगर भारत में रहूंगा तो यात्रा और अभ्यास दोनों ही मुश्किल होंगे। यहां यूरोप में सब सुविधाजनक है।'
नीरज का मानना है कि भारत से बाहर रहना उनकी ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं के लिए ज़रूरी है क्योंकि ज्यादातर इवेंट्स यूरोप में होते हैं। उन्होंने कहा, 'अगर भारत में रहूंगा तो यात्रा और अभ्यास दोनों ही मुश्किल होंगे। यहां यूरोप में सब सुविधाजनक है।'