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Lok Sabha: राष्ट्रीय डोपिंग रोधी विधेयक लोकसभा में पास, अनुराग ठाकुर बोले- 'आत्मनिर्भर भारत' को मिलेगा बल
Wed, 27 Jul 2022 08:07 PM IST
रोहित राज
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: रोहित राज
Updated Wed, 27 Jul 2022 08:07 PM IST
सार
विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (NADA), राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला (NDTL) और अन्य डोप परीक्षण प्रयोगशालाओं के संचालन के लिए एक वैधानिक ढांचा प्रदान करना है और एक राष्ट्रीय डोपिंग रोधी बोर्ड के निर्माण के लिए है।
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अनुराग ठाकुर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
लोकसभा ने बुधवार (27 जुलाई) को राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी और राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला के कामकाज के लिए एक वैधानिक ढांचा प्रदान करने के लिए एक विधेयक पारित किया। खेल मंत्री अनुराग ठाकुर द्वारा पेश किया गया राष्ट्रीय डोपिंग रोधी विधेयक खिलाड़ियों द्वारा नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के उपायों को मजबूत करेगा। ठाकुर ने कहा कि बिल डोपिंग रोधी पर संयुक्त राष्ट्र के एक सम्मेलन को प्रभावी करेगा।
विधेयक को विचार और पारित करने के लिए पेश करते हुए ठाकुर ने हाल के दिनों में भारतीय खिलाड़ियों की उपलब्धियों को याद किया और उम्मीद जताई कि भारतीय भविष्य में अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में अधिक पदक जीतेंगे। विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (NADA), राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला (NDTL) और अन्य डोप परीक्षण प्रयोगशालाओं के संचालन के लिए एक वैधानिक ढांचा प्रदान करना है और एक राष्ट्रीय डोपिंग रोधी बोर्ड के निर्माण के लिए है।
अनुराग ठाकुर ने कहा कि राष्ट्रीय डोपिंग रोधी विधेयक से न सिर्फ खेल और खिलाड़ियों को मदद मिलेगी, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ को भी बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि साल 2008 में राष्ट्रीय डोप टेस्ट लेबोरेटरी बनाई गई थी। उस समय नियम भी बनाए गए थे, लेकिन इसे वैधानिक दर्जा नहीं मिला था। भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन बेहतर करना है तो मानदंडों को भी बेहतर बनाना होगा।
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अनुराग ठाकुर ने यह भी बताया कि पिछले साल एनडीटीएल को वाडा से फिर मान्यता मिल गई है जिसे 2019 में वैश्विक मानदंडों पर खरा नहीं उतरने की वजह से रोक दिया गया था। उन्होंने बताया कि अमेरिका, चीन, ऑस्ट्रेलिया और जापान जैसे देशों में डोप जांच को लेकर पहले से ही व्यवस्था है। मंत्री ने कहा कि अब भारत भी इसमें शामिल हो गया है और इससे भारत की साख भी बढ़ेगी।
उन्होंने ने कहा कि हम किसी बड़ी खेल प्रतियोगिता का आयोजन करते हैं, तब एक दिन में 10 हजार से अधिक नमूनों की जांच की जरूरत पड़ेगी, ऐसे में एक प्रयोगशाला से काम नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर और प्रयोगशालाएं स्थापित की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि एक प्रयोगशाला की स्थापना पर 70 से 100 करोड़ रूपये खर्च आता है, लेकिन धन को आड़े नहीं आने दिया जाएगा।
यह विधेयक पिछले वर्ष दिसंबर में लोकसभा में पेश किया गया था। इसे विचारार्थ स्थायी समिति को भेज दिया गया था। इसके बाद सोमवार (27 जुलाई) को इसे चर्चा एवं पारित होने के लिए सदन में लाया गया। अनुराग ठाकुर ने कहा कि इस विधेयक को लेकर व्यापक चर्चा की गई, कई देशों के ऐसे कानूनों पर भी विचार किया गया और संसद की स्थायी समिति के सुझावों को भी शामिल किया गया है।
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विधेयक को विचार और पारित करने के लिए पेश करते हुए ठाकुर ने हाल के दिनों में भारतीय खिलाड़ियों की उपलब्धियों को याद किया और उम्मीद जताई कि भारतीय भविष्य में अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में अधिक पदक जीतेंगे। विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (NADA), राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला (NDTL) और अन्य डोप परीक्षण प्रयोगशालाओं के संचालन के लिए एक वैधानिक ढांचा प्रदान करना है और एक राष्ट्रीय डोपिंग रोधी बोर्ड के निर्माण के लिए है।
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अनुराग ठाकुर ने कहा कि राष्ट्रीय डोपिंग रोधी विधेयक से न सिर्फ खेल और खिलाड़ियों को मदद मिलेगी, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ को भी बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि साल 2008 में राष्ट्रीय डोप टेस्ट लेबोरेटरी बनाई गई थी। उस समय नियम भी बनाए गए थे, लेकिन इसे वैधानिक दर्जा नहीं मिला था। भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन बेहतर करना है तो मानदंडों को भी बेहतर बनाना होगा।
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अनुराग ठाकुर ने यह भी बताया कि पिछले साल एनडीटीएल को वाडा से फिर मान्यता मिल गई है जिसे 2019 में वैश्विक मानदंडों पर खरा नहीं उतरने की वजह से रोक दिया गया था। उन्होंने बताया कि अमेरिका, चीन, ऑस्ट्रेलिया और जापान जैसे देशों में डोप जांच को लेकर पहले से ही व्यवस्था है। मंत्री ने कहा कि अब भारत भी इसमें शामिल हो गया है और इससे भारत की साख भी बढ़ेगी।
उन्होंने ने कहा कि हम किसी बड़ी खेल प्रतियोगिता का आयोजन करते हैं, तब एक दिन में 10 हजार से अधिक नमूनों की जांच की जरूरत पड़ेगी, ऐसे में एक प्रयोगशाला से काम नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर और प्रयोगशालाएं स्थापित की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि एक प्रयोगशाला की स्थापना पर 70 से 100 करोड़ रूपये खर्च आता है, लेकिन धन को आड़े नहीं आने दिया जाएगा।
यह विधेयक पिछले वर्ष दिसंबर में लोकसभा में पेश किया गया था। इसे विचारार्थ स्थायी समिति को भेज दिया गया था। इसके बाद सोमवार (27 जुलाई) को इसे चर्चा एवं पारित होने के लिए सदन में लाया गया। अनुराग ठाकुर ने कहा कि इस विधेयक को लेकर व्यापक चर्चा की गई, कई देशों के ऐसे कानूनों पर भी विचार किया गया और संसद की स्थायी समिति के सुझावों को भी शामिल किया गया है।