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Jaspal Rana: 'राणा ने अनुशासन और सफलता का मंत्र सिखाया', मनु भाकर के पिता ने कोच जसपाल को किया याद
Sun, 14 Jun 2026 02:21 PM IST
शोभित चतुर्वेदी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Sun, 14 Jun 2026 02:21 PM IST
सार
भारतीय निशानेबाजी टीम के कोच जसपाल राणा का हाल ही में निधन हो गया था। राणा का दो बार की ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर की सफलता में बड़ा योगदान रहा है। अब मनु के पिता ने राणा को याद करते हुए बताया कि किस तरह उन्होंने मनु को अनुशासन और सफलता का मंत्र सिखाया।
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जसपाल राणा और मनु भाकर
- फोटो : @realmanubhaker
विस्तार
दो बार की ओलंपिक पदक विजेता निशानेबाज मनु भाकर के पिता राम किशन ने जसपाल राणा को याद करते हुए कहा कि इस दिवंगत कोच ने उनकी बेटी के जीवन में अनुशासन, कड़ी मेहनत और सफलता हासिल करने की सोच विकसित की जिसने उसे चैंपियन खिलाड़ी बनने में मदद की। दिग्गज निशानेबाज राणा का 49 वर्ष की उम्र में हृदय संबंधी जटिलताओं के कारण संक्षिप्त बीमारी के बाद निधन हो गया था।
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मनु की सफलता में राणा की रही अहम भूमिका
भारत के महानतम पिस्टल निशानेबाजों में शामिल राणा ने कोच के रूप में भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की और पेरिस ओलंपिक में मनु भाकर के ऐतिहासिक दो कांस्य पदक जीतने में अहम भूमिका निभाई। किशन ने कहा, मनु के निशानेबाजी करियर में जसपाल राणा का सबसे बड़ा योगदान अनुशासन, एकाग्रता, कड़ी मेहनत और परिणाम हासिल करने की मानसिकता विकसित करना था। वह बेहतरीन कोच थे। उनकी ट्रेनिंग का मनु को बहुत लाभ मिला। उनका इस तरह दुनिया से चले जाना बहुत बड़ी त्रासदी है। हम बेहद दुखी हैं। किसी ने नहीं सोचा था कि वह इतनी जल्दी चले जाएंगे। वह मनु से हमेशा कहते थे कि मेहनत करो और खुद पर भरोसा रखो। आत्मविश्वास को बनाए रखो। तुम्हारे अंदर लड़ने का जज्बा है, तुम कर सकती हो और जरूर करोगी। वह सख्त स्वभाव के थे, लेकिन दिल के बहुत अच्छे इंसान थे। बाहर से कठोर और अंदर से बेहद नरम। वह महान निशानेबाज होने के साथ-साथ परिणाम देने वाले कोच भी थे।
किशन ने कहा, मैं मानता हूं कि वह काफी सख्त थे। वह अक्सर डांटते रहते थे और छोटी-छोटी बातों पर नाराज भी हो जाते थे। अगर उनकी बात नहीं मानी जाती तो उन्हें गुस्सा आ जाता था। लेकिन मनु को भी अनुशासित जीवन पसंद था और यही बात उन्हें उनके करीब ले आई।
भारत के महानतम पिस्टल निशानेबाजों में शामिल राणा ने कोच के रूप में भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की और पेरिस ओलंपिक में मनु भाकर के ऐतिहासिक दो कांस्य पदक जीतने में अहम भूमिका निभाई। किशन ने कहा, मनु के निशानेबाजी करियर में जसपाल राणा का सबसे बड़ा योगदान अनुशासन, एकाग्रता, कड़ी मेहनत और परिणाम हासिल करने की मानसिकता विकसित करना था। वह बेहतरीन कोच थे। उनकी ट्रेनिंग का मनु को बहुत लाभ मिला। उनका इस तरह दुनिया से चले जाना बहुत बड़ी त्रासदी है। हम बेहद दुखी हैं। किसी ने नहीं सोचा था कि वह इतनी जल्दी चले जाएंगे। वह मनु से हमेशा कहते थे कि मेहनत करो और खुद पर भरोसा रखो। आत्मविश्वास को बनाए रखो। तुम्हारे अंदर लड़ने का जज्बा है, तुम कर सकती हो और जरूर करोगी। वह सख्त स्वभाव के थे, लेकिन दिल के बहुत अच्छे इंसान थे। बाहर से कठोर और अंदर से बेहद नरम। वह महान निशानेबाज होने के साथ-साथ परिणाम देने वाले कोच भी थे।
किशन ने कहा, मैं मानता हूं कि वह काफी सख्त थे। वह अक्सर डांटते रहते थे और छोटी-छोटी बातों पर नाराज भी हो जाते थे। अगर उनकी बात नहीं मानी जाती तो उन्हें गुस्सा आ जाता था। लेकिन मनु को भी अनुशासित जीवन पसंद था और यही बात उन्हें उनके करीब ले आई।
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मनु की स्थिति पर क्या बोले पिता
मनु की वर्तमान मानसिक स्थिति के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, वह अभी बात करने की स्थिति में नहीं है। जब भी मैं फोन करता हूं, वह सिर्फ इतना कहती है कि पापा मैं बाद में बात करूंगी। यह व्यक्तिगत क्षति है और इससे उबरने में समय लगता है। पूरी तरह संभलने के बाद ही वह तय करेगी कि उसे क्या करना है।
मनु की वर्तमान मानसिक स्थिति के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, वह अभी बात करने की स्थिति में नहीं है। जब भी मैं फोन करता हूं, वह सिर्फ इतना कहती है कि पापा मैं बाद में बात करूंगी। यह व्यक्तिगत क्षति है और इससे उबरने में समय लगता है। पूरी तरह संभलने के बाद ही वह तय करेगी कि उसे क्या करना है।