‘यूं तो कदम-कदम पर हैं दीवार सामने, कोई न हो तो खुद से उलझ जाना चाहिए’ ये चंद लाइन एक हाथ के बल्लेबाज प्रमोद कुमार के लिए सटीक बैठ रही है। मेरठ के रहने वाले प्रमोद ने सात साल की कम उम्र में एक हादसे में बायां हाथ गंवाने के बाद भी अपना हौसला नहीं गंवाया। 16 वर्षीय प्रमोद एक हाथ से ही शानदार बल्लेबाजी करते हैं।
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प्रमोद कुमार मूल रूप से परीक्षितगढ़ के इकला खानपुर के रहने वाले हैं। पिता ओमप्रकाश मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करते हैं। चार बहन-भाईयों में प्रमोद सबसे छोटा है। प्रमोद के पिता ओमप्रकाश ने बताया कि प्रमोद जब 7 साल का था तो ट्यूबवैल से हुए एक हादसे में उसने अपना बायां हाथ गंवा दिया था।
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उन्होंने बताया कि परिवार के लोग प्रमोद पर पढ़ाई को लेकर ज्यादा दबाव नहीं डालते थे। बचपन से ही गली मोहल्ले में क्रिकेट खेलने से प्रमोद के मन में क्रिकेट के प्रति लगाव हो गया और प्रमोद ने देश के लिए कुछ करने की ठानी। जिसके बाद प्रमोद ने दो साल पहले मेरठ में क्रिकेट अभ्यास करने का मन बनाया।
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कैलाश प्रकाश स्टेडियम में कुछ दिन अभ्यास के बाद प्रमोद ने करन एकेडमी में अभ्यास शुरू किया। प्रमोद ने बताया अधिकतर एकेडमी दिव्यांग खिलाड़ियों को अभ्यास के लिये मना कर देती हैं, लेकिन कैलाश प्रकाश स्टेडियम और करन एकेडमी ने उसे मौका दिया।
लगाते हैं कवर और स्टेट ड्राइव
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कोच अतहर अली ने बताया कि प्रमोद कुमार एक हाथ से शानदार कवर ड्राइव और स्टेट ड्राइव करते हैं। बल्ला पकड़ने का अंदाज ही प्रमोद को एक अच्छे बल्लेबाज होने का अनुभव दिलाता है।