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IOA in SC: एआईएफएफ के बाद भारतीय ओलंपिक संघ पर भी निलंबन का खतरा? सुप्रीम कोर्ट पहुंचा IOA
Thu, 18 Aug 2022 04:33 PM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Thu, 18 Aug 2022 04:33 PM IST
सार
हाल ही में इसी तरह का मामला भारतीय फुटबॉल संघ (AIFF) में भी सामने आया था। सीओए की नियुक्ति के बाद फुटबॉल की सबसे बड़ी संस्था फीफा (FIFA) ने एआईएफएफ पर बैन लगा दिया था। IOA को भी इसी बात का खतरा था
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सुप्रीम कोर्ट में IOA के मामले पर सुनवाई हुई
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) ने गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट के एक आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस मामले पर आज सुनवाई हुई। जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने आईओए को राहत मिली है। दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में आईओए के संविधान तैयार करने और चुनाव कराने को लेकर प्रशासकों की समिति (CoA) नियुक्त की थी।
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हाल ही में इसी तरह का मामला भारतीय फुटबॉल संघ (AIFF) में भी सामने आया था। सीओए की नियुक्ति के बाद फुटबॉल की सबसे बड़ी संस्था फीफा (FIFA) ने एआईएफएफ पर बैन लगा दिया था। IOA को भी इसी बात का खतरा था कि कहीं अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ भी उन पर बैन न लगा दे। इसी को लेकर IOA सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था।
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हालांकि, गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में मामले पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। यानी दिल्ली हाईकोर्ट का CoA) की नियुक्ति वाला आदेश फिलहाल लागू नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर अगली सुनवाई सोमवार को होगी।
SG तुषार मेहता ने कोर्ट के सामने मामला रखा
आज सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने चीफ जस्टिस से इस मसले जल्द सुनवाई की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि CoA नियुक्त करने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक महासंघ तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप मान सकता है। साथ ही IOA की मान्यता रद्द भी कर सकता है।
आज सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने चीफ जस्टिस से इस मसले जल्द सुनवाई की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि CoA नियुक्त करने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक महासंघ तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप मान सकता है। साथ ही IOA की मान्यता रद्द भी कर सकता है।
SG ने कहा कि अभी प्रशासकों की समिति ने आईओए की कमान नहीं संभाली है, लेकिन जब ऐसा होगा तब यह भी हो सकता है कि भारत को ओलंपिक से बाहर कर दिया जाए। IOA अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक महासंघ की ही एक यूनिट है। हम उसके नियमो से छेड़छाड़ नहीं कर सकते। ऐसे में अगर आईओए की कमान किसी और को सौंपी जाती है तो उस पर खतरे का साया होगा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी सॉलिसीटर जनरल की दलीलों से सहमति जताते हुए मामले में यथास्थिति बनाये रखने का आदेश दिया।
दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया था?
16 अगस्त को दिल्ली हाईकोर्ट ने आईओए की कमान प्रशासकों की समिति को सौंपने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट का मानना था कि आईओए नेशनल स्पोर्ट्स कोड का पालन नहीं कर रही है। अगर कोई स्पोर्ट्स फेडरेशन देश के कानून का पालन नहीं कर रही है तो उसे सरकार से मिलने वाली सुविधाओं को हासिल करने का अधिकार नहीं है। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने CoA के गठन का आदेश दिया था।
16 अगस्त को दिल्ली हाईकोर्ट ने आईओए की कमान प्रशासकों की समिति को सौंपने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट का मानना था कि आईओए नेशनल स्पोर्ट्स कोड का पालन नहीं कर रही है। अगर कोई स्पोर्ट्स फेडरेशन देश के कानून का पालन नहीं कर रही है तो उसे सरकार से मिलने वाली सुविधाओं को हासिल करने का अधिकार नहीं है। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने CoA के गठन का आदेश दिया था।