Commonwealth Games: राष्ट्रमंडल खेल 2030 के लिए भारत ने बढ़ाए कदम, आधिकारिक बोली प्रस्ताव भेजा
इस प्रस्ताव के तहत अहमदाबाद को 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी के लिए सुझाया गया है। यह संस्करण विशेष होगा क्योंकि 2030 में राष्ट्रमंडल खेल अपने 100 वर्ष पूरे करेंगे।
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भारत ने 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी के लिए आधिकारिक प्रस्ताव किया है। शुक्रवार को भारत की ओर से कॉमनवेल्थ स्पोर्ट्स (कॉमनवेल्थ गेम्स फेडरेशन) को यह औपचारिक बोली सौंपी गई। इस प्रतिनिधिमंडल में कॉमनवेल्थ गेम्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया और गुजरात सरकार के अधिकारी शामिल थे। इस प्रस्ताव के तहत अहमदाबाद को 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी के लिए सुझाया गया है। यह संस्करण विशेष होगा क्योंकि 2030 में राष्ट्रमंडल खेल अपने 100 वर्ष पूरे करेंगे।
गुजरात के खेल मंत्री हर्ष सांघवी ने कहा कि भारत इन खेलों का आयोजन 'वसुधैव कुटुंबकम्' की भावना के साथ करेगा, जिसका अर्थ है- 'पूरा विश्व एक परिवार है।' उन्होंने कहा कि मेहमानों का सम्मान 'अतिथि देवो भव' की परंपरा के अनुसार किया जाएगा। सांघवी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले 10 वर्षों में देश में खेलों को नई दिशा दी है। उन्होंने खिलाड़ियों के लिए नई सुविधाएं और संसाधन उपलब्ध कराए हैं, जिससे आज भारत के खेल क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स को हम सब मिलकर एक ऐतिहासिक आयोजन बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इस मौके पर यह भी बताया गया कि भारत का उद्देश्य न सिर्फ एक सफल खेल आयोजन करना है, बल्कि दुनिया को भारत की खेल संस्कृति, आतिथ्य और आधुनिकता का भी अनुभव कराना है।
भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) की अध्यक्ष पीटी उषा ने कहा, 'यह बोली पूरे देश की आकांक्षाओं का प्रतीक है। अहमदाबाद में राष्ट्रमंडल खेल भारत की खेल क्षमताओं के साथ-साथ मित्रता, सम्मान और समावेशिता के मूल्यों को भी दुनिया के सामने प्रस्तुत करेंगे।'
उन्होंने आगे कहा कि यह आयोजन न केवल राष्ट्रमंडल के शताब्दी संस्करण को ऐतिहासिक बनाएगा, बल्कि नई पीढ़ी को खेलों के माध्यम से सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए प्रेरित भी करेगा। भारत की यह पहल उसके लंबे समय के लक्ष्य से जुड़ी है, जिसके तहत देश को अग्रणी खेल राष्ट्र बनाना है और बड़े खेल आयोजनों के जरिए खेलों में भागीदारी और खेल अवसंरचना को बढ़ावा देना है।
29 अगस्त को क्यों सौंपा गया प्रस्ताव
गौरतलब है कि 29 अगस्त को यह प्रस्ताव इसलिए सौंपा गया क्योंकि यह राष्ट्रीय खेल दिवस होता है, जो मेजर ध्यानचंद को समर्पित है। यह भारत की खेल विरासत और युवाओं के लिए प्रतिबद्धता का प्रतीक है। सरकार का मानना है कि ऐसे आयोजन भारत को वैश्विक खेल मंच पर एक बड़ी शक्ति बना सकते हैं।