{"_id":"5937d7464f1c1b841c9c944e","slug":"sports-minister-vijay-goel-writes-to-pmo-requesting-bharat-ratna-for-dhyan-chand","type":"story","status":"publish","title_hn":"खेल मंत्री विजय गोयल ने PM को लिखी चिट्ठी, ध्यानचंद को भारत रत्न देने की मांग ","category":{"title":"Hockey","title_hn":"हॉकी","slug":"hockey"}}
खेल मंत्री विजय गोयल ने PM को लिखी चिट्ठी, ध्यानचंद को भारत रत्न देने की मांग
amarujala.com- Presented by: नवीन चौहान
Updated Wed, 07 Jun 2017 04:32 PM IST
विज्ञापन
मेजर ध्यानचंद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ऐसा लगता है कि भारतीय खेल जगत के पुरोधा और दुनिया भर में हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न का पुरस्कार जल्द मिल जाएगा। केंद्रीय खेल मंत्री विजय गोयल ने प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर उन्हें देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मान भारत रत्न दिए जाने की सिफारिश की है।
भारतीय हॉकी में दद्दा के नाम से विख्यात ध्यानचंद को भारत रत्न दिए जाने के मांग सालों से हो रही है। साल 2013 में जब सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न दिया गया था उस वक्त भी ये कहा गया था कि खेल के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए सचिन से पहले ये सम्मान ध्यानचंद को दिया जाना चाहिए।
ध्यानचंद ने भारत के लिए ओलंपिक में लगातार तीन स्वर्ण पदक एम्सटर्डम (1928),लास एंजिल्स (1932), बर्लिन (1936) में जीते थे। 1936 में बर्लिन ओलंपिक के फाइनल में उनके जीवन का सबसे यादगार वाकया हुआ। जर्मनी और भारत के बीच हुए फाइनल मुकाबले को देखने जर्मन चांसलर हिटलर भी आए थे। हिटलर की उपस्थिति में भारत ने जर्मनी को 8-1 की करारी शिकस्त दी थी। इसके बाद हिटलर ने भारतीय टीम के कप्तान ध्यानचंद से मुलाकात की और उन्हें जर्मनी की सेना में शामिल होने का ऑफर दिया था जिसे उन्होंने बड़ी ,सहजता के साथ ठुकरा दिया था।
विज्ञापन
उनके जन्मदिवस 29 अगस्त को भारत में खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन देश के राष्ट्रपति खिलाड़ियों को विभिन्न खेल पुरस्कारों से नवाजते हैं।
विज्ञापन
भारतीय हॉकी में दद्दा के नाम से विख्यात ध्यानचंद को भारत रत्न दिए जाने के मांग सालों से हो रही है। साल 2013 में जब सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न दिया गया था उस वक्त भी ये कहा गया था कि खेल के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए सचिन से पहले ये सम्मान ध्यानचंद को दिया जाना चाहिए।
विज्ञापन
ध्यानचंद ने भारत के लिए ओलंपिक में लगातार तीन स्वर्ण पदक एम्सटर्डम (1928),लास एंजिल्स (1932), बर्लिन (1936) में जीते थे। 1936 में बर्लिन ओलंपिक के फाइनल में उनके जीवन का सबसे यादगार वाकया हुआ। जर्मनी और भारत के बीच हुए फाइनल मुकाबले को देखने जर्मन चांसलर हिटलर भी आए थे। हिटलर की उपस्थिति में भारत ने जर्मनी को 8-1 की करारी शिकस्त दी थी। इसके बाद हिटलर ने भारतीय टीम के कप्तान ध्यानचंद से मुलाकात की और उन्हें जर्मनी की सेना में शामिल होने का ऑफर दिया था जिसे उन्होंने बड़ी ,सहजता के साथ ठुकरा दिया था।
विज्ञापन
उनके जन्मदिवस 29 अगस्त को भारत में खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन देश के राष्ट्रपति खिलाड़ियों को विभिन्न खेल पुरस्कारों से नवाजते हैं।