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मुझे भारतीय टीम के विश्व कप में सेमीफाइनल में पहुंचने की उम्मीद : नवनीत कौर
सत्येन्द्र पाल सिंह, अमर उजाला
Updated Thu, 19 Jul 2018 03:25 AM IST
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भारतीय टीम
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दिल्ली और चंडीगढ़ के लगभग अधबीच हरियाणा के शाहबाद मरकंडा में घर के सामने एसजीएनपी स्कूल के मैदान पर जुनूनी उस्ताद बलदेव सिंह को हॉकी की बारीकियां सिखाते देखते नवनीत कौर भी 10 बरस से कम उम्र में हॉकी खेलने मैदान पर जा पहुंची थी।
टीवी रिपेयर करने वाले सरदार बूटा सिंह की बेटी 22 वर्षीया नवनीत कौर और कप्तान रानी रामपाल के रूप में शाहबाद मरकंडा की त्रिमूर्ति लंदन में शनिवार से शुरू होने वाले महिला हॉकी विश्व कप में वंदना कटारिया के साथ भारत के आक्रमण की अहम कड़ी होंगी।
नवनीत कौर जूनियर महिला हॉकी विश्व कप और एशिया कप के साथ पिछले साल सीनियर एशिया कप, इस साल राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी जैसे अहम टूर्नामेंट में भारत की नुमाइंदगी कर चुकी हैं। नवनीत कौर ने हॉकी महिला विश्व कप के लिए लंदन रवाना होने से पहले 'अमर उजाला' से कहा, 'मुझे भारतीय टीम के विश्व कप में सेमीफाइनल में पहुंचने की पूरी उम्मीद है।'
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उन्होंने कहा, 'लंदन में विश्व कप में बेहतर प्रदर्शन करेंगे तो निश्चित रूप से जकार्ता में एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के सपने को साकार करने का विश्वास मिलेगा। बेशक हमारे लिए मेजबान एफआईएच रैंकिंग में दूसरे स्थान पर काबिज इंग्लैंड के खिलाफ पहला मैच खासा अहम है, लेकिन हम उसे राष्ट्रमंडल खेलों में हरा चुके है और उससे हार भी चुके हैं। हमारे लिए इंग्लैंड के खिलाफ जीत के साथ आगाज अहम है।'
इसके बाद हमारी बेंगलुरू में जिस बढिय़ा ढंग से ट्रेनिंग हुई है और हमने अपनी फिटनेस पर जिस शिद्दत से मेहनत की है और टीम में जिस तरह एका है उससे टीम की हर खिलाड़ी को बेहतर करने का पूरा भरोसा है। हमें अमेरिका और आयरलैंड के खिलाफ चौकस रहने की जरूरत जरूर है क्योंकि यह विश्व कप है और इसमें जरा सी भी ढील की गुंजाइश नहीं है। हमारी टीम की ताकत की हमारा एका और एक दूसरे पर भरोसा है।
वह बताती हैं, 'मैंने हॉकी का ककहरा सरदार बलदेव सर से सीखा और वह बहुत ही सख्त कोच हैं। इसी से हमें हरेन्द्र सर और सोएर्ड मराइन सरीखे खख्त भारतीय के चीफ महिला हॉकी कोच के खिलाफ कोई दिक्कत नहीं हुई। मुझे और खासतौर पर शाहबाद से बलदेव सर की शागिर्दी में बचपन में ही इस सच को समझ लिया था कि हॉकी सीखनी है तो हॉकी उस्तादों की कड़ाई को स्वीकारना सीखना होगा।'
'हरेन्द्र और मराइन सर का फोकस लगातार हमारी गलतियों को सुधारने पर रहा है। मेरे लिए अब तक जापान में सीनियर महिला एशिया कप सबसे यादगार रहा क्योंकि इसमें मैंने पांच गोल कर भारत को खिताब जिताने में अहम योगदान किया।'
नवनीत बनाती हैं, 'मैं आज हॉकी में जिस भी मुकाम पर पहुंच पाई उसमें मेरे पिता सरदार बूटा सिंह और मां के साथ मेरे बचपन के उस्ताद सरदार बलदेव की डांट का अहम योगदान है। शुरू में पैदल से एसजीएनपी स्कूल हॉकी खेलने पहुंच जाती थी। स्कूल बदला तो फिर साइकिल से हॉकी खेलने जाने लगी लेकिन प्रैक्टिस को बेहद गंभीरता से लिया है। प्रैक्टिस की इसी गंभीरता से मैं यहां तक पहुंच पाई।'
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टीवी रिपेयर करने वाले सरदार बूटा सिंह की बेटी 22 वर्षीया नवनीत कौर और कप्तान रानी रामपाल के रूप में शाहबाद मरकंडा की त्रिमूर्ति लंदन में शनिवार से शुरू होने वाले महिला हॉकी विश्व कप में वंदना कटारिया के साथ भारत के आक्रमण की अहम कड़ी होंगी।
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नवनीत कौर जूनियर महिला हॉकी विश्व कप और एशिया कप के साथ पिछले साल सीनियर एशिया कप, इस साल राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी जैसे अहम टूर्नामेंट में भारत की नुमाइंदगी कर चुकी हैं। नवनीत कौर ने हॉकी महिला विश्व कप के लिए लंदन रवाना होने से पहले 'अमर उजाला' से कहा, 'मुझे भारतीय टीम के विश्व कप में सेमीफाइनल में पहुंचने की पूरी उम्मीद है।'
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उन्होंने कहा, 'लंदन में विश्व कप में बेहतर प्रदर्शन करेंगे तो निश्चित रूप से जकार्ता में एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के सपने को साकार करने का विश्वास मिलेगा। बेशक हमारे लिए मेजबान एफआईएच रैंकिंग में दूसरे स्थान पर काबिज इंग्लैंड के खिलाफ पहला मैच खासा अहम है, लेकिन हम उसे राष्ट्रमंडल खेलों में हरा चुके है और उससे हार भी चुके हैं। हमारे लिए इंग्लैंड के खिलाफ जीत के साथ आगाज अहम है।'
इसके बाद हमारी बेंगलुरू में जिस बढिय़ा ढंग से ट्रेनिंग हुई है और हमने अपनी फिटनेस पर जिस शिद्दत से मेहनत की है और टीम में जिस तरह एका है उससे टीम की हर खिलाड़ी को बेहतर करने का पूरा भरोसा है। हमें अमेरिका और आयरलैंड के खिलाफ चौकस रहने की जरूरत जरूर है क्योंकि यह विश्व कप है और इसमें जरा सी भी ढील की गुंजाइश नहीं है। हमारी टीम की ताकत की हमारा एका और एक दूसरे पर भरोसा है।
वह बताती हैं, 'मैंने हॉकी का ककहरा सरदार बलदेव सर से सीखा और वह बहुत ही सख्त कोच हैं। इसी से हमें हरेन्द्र सर और सोएर्ड मराइन सरीखे खख्त भारतीय के चीफ महिला हॉकी कोच के खिलाफ कोई दिक्कत नहीं हुई। मुझे और खासतौर पर शाहबाद से बलदेव सर की शागिर्दी में बचपन में ही इस सच को समझ लिया था कि हॉकी सीखनी है तो हॉकी उस्तादों की कड़ाई को स्वीकारना सीखना होगा।'
'हरेन्द्र और मराइन सर का फोकस लगातार हमारी गलतियों को सुधारने पर रहा है। मेरे लिए अब तक जापान में सीनियर महिला एशिया कप सबसे यादगार रहा क्योंकि इसमें मैंने पांच गोल कर भारत को खिताब जिताने में अहम योगदान किया।'
नवनीत बनाती हैं, 'मैं आज हॉकी में जिस भी मुकाम पर पहुंच पाई उसमें मेरे पिता सरदार बूटा सिंह और मां के साथ मेरे बचपन के उस्ताद सरदार बलदेव की डांट का अहम योगदान है। शुरू में पैदल से एसजीएनपी स्कूल हॉकी खेलने पहुंच जाती थी। स्कूल बदला तो फिर साइकिल से हॉकी खेलने जाने लगी लेकिन प्रैक्टिस को बेहद गंभीरता से लिया है। प्रैक्टिस की इसी गंभीरता से मैं यहां तक पहुंच पाई।'