'सरदार सिंह की गैरमौजूदगी हमेशा खलेगी, मनप्रीत कर सकते हैं कमी पूरी'
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सरदार सिंह के एशियाई खेलों के बाद अंतरराष्ट्रीय हॉकी को अलविदा कहने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनकी जगह भारतीय हॉकी टीम में कौन भरेगा? सरदार के अंतरराष्ट्रीय हॉकी को अलविदा कहने के कारण मस्कट में बृहस्पतिवार से शुरू हो रही एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी हॉकी और अगले महीने भुवनेश्वर में हॉकी विश्व कप में की गैरमौजूदगी मौजूदा चैंपियन भारत को कितनी अखरेगी इस बाबत 'अमर उजाला' से पूर्व ओलंपियन धनराज पिल्लै, जगबीर सिंह, दिलीप टिर्की और भारत के चीफ हॉकी कोच हरेन्द्र सिंह से जानने की कोशिश की।
धनराज पिल्लै ,जगबीर सिंह और दिलीप टिर्की ने एक सुर में कहा कि सरदार सिंह जैसे धैर्यवान और एकदम फिट सेंटर हाफ सरदार सिंह कम से कम भुवेश्वर विश्व कप तक तो निश्चित ही खेलना चाहिए था। ये तीनों इस बात पर एकमत थे कि सरदार सरीखे मिडफील्ड के सरदार थे और उनका फिलहाल भारत के पास अभी कोई विकल्प नहीं है।
भारत के चीफ कोच हरेन्द्र सिंह ने कहा, 'सरदार सिंह के अंतरराष्ट्रीय हॉकी को अलविदा कहने की बाबत बस यही कहूंगा कि वे भारत के लिए एक दशक से भी ज्यादा तक शानदार हॉकी खेले। भारत के लिए अच्छी बात यह है कि सरदार जैसा लीजेंड लंबे तक उसकी टीम में रहा। सरदार जैसा कोई भी लीजैंड अपने पीछे विरासत छोड़ जाता है।
किसी भी खिलाड़ी के खेल को अलविदा कहने से खाली हुई जगह को कोई अन्य नहीं भर सकता है। ऐसे में अन्य खिलाड़ी को जिम्मेदारी लेनी शुरू करनी चाहिए और टीम की जरूरत के मुताबिक प्रदर्शन करना चाहिकए। मेरा मानना है कि सरदार जैसे लीजैंड के के अंतरराष्ट्रीय हॉकी से रिटायर होने से उपजे खालीपन को मनप्रीत सिंह पूरा कर सकते हैं।'
32 बरस की उम्र हॉकी अलविदा कहने की नहीं होती
भारत के लिए चार ओलंपिक, चार विश्व कप, चार एशियाई खेल,चार चैंपियंस ट्रॉफी धनराज पिल्लै कहते हैं, 'सरदार भारतीय हॉकी टीम के आज भी सबसे फिट खिलाड़ी हैं। 32 बरस की उम्र अंतरराष्ट्रीय हॉकी को अलविदा कहने की नहीं होती। मैं जब 36 बरस की उम्र में भारत के लिए करीब डेढ़ दशक खेला तो वह भी एक दशक की बजाय मेरा जितना तो खेल सकते थे। सरदार सिंह का भारत के पास कोई विकल्प नहीं है। सरदार एशियाई खेलों से पहले यो-यो टेस्ट में अव्वल रहे थे।
एशियाई खेलों में भारतीय टीम के स्वर्ण पदक न जीत पाने के लिए अकेले सरदार पर ठीकरा फोडना एकदम गलत है। गलतियां नहीं होनी चाहिए थी लेकिन यह खेल है और इसमें हर खिलाड़ी से गलती होती है। मेरा मानना है कि सरदार को कम से कम भुवनेश्वर में हॉकी विश्व कप में तो जरूर खेलना चाहिए। वह मेरी राय में इतने फिट हैं कि उन्हें भारत के लिए 2020 ओलंपिक तक खेलना जारी रखना चाहिए था। सरदार खुद तो बेहतरीन खेलने के साथ साथियों से बेहतरीन प्रदर्शन कराना जानते हैं।'
योद्धा सरदार को आलोचकों को गलत साबित करना चाहिए था : जगबीर
जगबीर सिंह ने कहा, ' सरदार के अंतरराष्ट्रीय हॉकी को अलविदा कहने में उम्र कोई मसला ही नहीं है। सरदार को मैं हॉकी में 'योद्धा' मानता हूं। महज एक टूर्नामेंट में ढीले प्रदर्शन के बाद उन्हें अंतरराष्ट्रीय हॉकी को अलविदा नहीं कहना चाहिए था। वह हॉकी को पूजा मानते हैं और उनका यह फैसला भावुकता में लिया गया फैसला है। सरदार का भारतीय टीम के पास अभी कोई विकल्प नहीं है। सरदार के इस फैसले के लिए कई हालात जिम्मेदार हैं। सरदार को यह अहसास कराया गया कि अब आपका करियर खत्म हो गया है।
हॉकी इंडिया के हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर डेविड जॉन ने सरदार से एक बारपहले भी कहा था कि वह धीमे पड़ गए हैं। सरदार ने उन्हें गलत साबित कर चैंपियंस ट्रॉफी के लिए भारतीय टीम में वापसी की थी। यो-यो टेस्ट में खुद को सबसे तेज साबित करने वाले सरदार को इन हालात में हथियार डालने की बजाय चुनौती के रूप में अपने आलोचकों को गलत साबित कर भारतीय टीम में वापसी करनी चाहिए थी। सरदार वह अभी भी इतने बेहतरीन खिलाड़ी हैं कि वह 2020 के ओलंपिक तक जरूर खेल सकते हैं। सरदार दरअसल बेहद भावुक हैं लेकिन उनके जीवट का जवाब नहीं है।
सरदार के फैसले से मुझे वाकई हैरानी हुई: दिलीप टिर्की
दिलीप टिर्की कहते हैं, ' सरदार सिंह के अंतरराष्ट्रीय हॉकी को अलविदा कहने के फैसले से मुझे वाकई हैरानी हुई। सरदार कम से कम भुवनेश्वर में ओडिशा हॉकी विश्व कप से पहले तक तो जरूर खेल सकते थे। सरदार का भारत के पास मुझे अभी तो कोई विकल्प नहीं दिखाई देता है। मेरे लिए वह हमेशा 'मिडफील्ड' के सरदार थे और रहेंगे।
सरदार जैसे अनुभवी और शांत खिलाड़ी की कमी भारत का विश्व कप में शिद्दत से अखरेगी। सरदार अपने धैर्य के कारण आज भी भारत के आक्रमण और रक्षण की मेरी राय में सबसे अहम कड़ी होते। खैर यह उनका अपना फैसला है, लेकिन सभी हॉकी फैंस को विश्व कप में उनकी कमी जरूर अखरेगी।