'भारतीय हॉकी टीम को सरदार और लाकड़ा जैसे अनुभवी खिलाडियों की सख्त जरूरत'
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चार ओलंपिक में देश की नुमाइंदगी करने वाले तीन हॉकी खिलाडिय़ों में से एक और 'कलाकार' के रूप में धनराज पिल्लै राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय हॉकी टीम के पदक जीतने में नाकाम रहने से टीम प्रबंधन से खासे नाराज हैं।
धनराज पिल्लै ने मुंबई से 'अमर उजाला' से फोन पर कहा, 'मैंने खुद 37 बरस में भारत के लिए परिपक्व हॉकी खेली और इसलिए मैं अनुभव की कीमत जानता हूं। भारत की पुरुष हॉकी टीम का राष्ट्रमंडल खेलों से खाली हाथ लौटना वाकई खासा निराश करने वाला है। भारत को राष्ट्रमंडल खेलों में आक्रामक सेंटर हाफ के रूप में सरदार सिंह और फुलबैक बीरेंद्र लाकड़ा के अनुभव की कमी बेहद खली।'
उन्होंने आगे कहा, 'मेरा हॉकी का अनुभव कहता है कि भारत को जून में चैंपिंयंस ट्रॉफी, अगस्त में एशियाई खेलों और इस साल के आखिर में देश में होने वाले पुरुष हॉकी विश्व कप में सरदार सिंह और बीरेंद्र लाकड़ा जैसे अनुभव खिलाडिय़ों की बेहद जरूरत है। भारत को खासतौर पर 2020 के टोक्यो ओलंपिक के लिए सीधे क्वॉलिफाई करने के लिए एशियाई खेलों का खिताब जीतने के लिए सरदार सिंह और बीरेन्द्र लाकड़ा जैसे अनुभवी खिलाडिय़ों को टीम में रखना ही होगा।'
बकौल पिल्लै, 'सरदार कम से कम दो बरस और भारत के लिए अभी और खेल सकते हैं। यह भी जरूरी है कि भारत के लिए आगे लगातार खेलने के लिए सरदार और बीरेंद्र लाकड़ा को खुद को पूरी तरह फिट रखना चाहिए। सरदार सिंह को अजलान शाह कप में दी टीम ऐसी थी जिसके सिपाहियों को ऐसी बंदूक थमा करव लड़ाई करने को कहा गया जिसमें कारतूस ही नहीं थे। सरदार को जब अजलान शाह कप में दर्जन भर नौजवान खिलाडिय़ों से सज्जित टीम दी गई और फिर पदक न जीत पाने का ठीकरा उनके सिर फोड़ कर राष्ट्रमंडल खेलों के लिए टीम में न चुना उनसे बेहद नाइंसाफी था।'
धनराज कहते हैं, 'मुझे भारतीय टीम में नौजवान खिलाडिय़ों से परहेज नहीं है, लेकिन राष्ट्रमंडल खेलों, एशियाई खेलों और विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में अनुभव बेहद जरूरी है। भारतीय टीम के चयन में निजी पसंदगी और नापसंदी की जगह नहीं होती। भारतीय हॉकी को चला रहे दो विदेशी महाशय - डेविड जॉन (हॉकी इंडिया हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर) और सोएर्ड मराइन (चीफ हॉकी कोच) ने राष्ट्रमंडल खेलों के लिए टीम चुनने में निजी पसंद को ही ज्यादा तवज्जो दी।'
पक्का करना चाहेंगे कि गलतियों को विश्व कप और एशियाई खेलों में न दोहराएं
अनुभवी स्ट्राइकर रानी रामपाल की कप्तानी में भारत की गोल्ड कोस्ट (ऑस्ट्रेलिया) में गजब के जीवट के बावजूद पदक जीतने में नाकाम रही टीम की सभी 18 खिलाडिय़ों को बेंगलुरू में सीनियर राष्ट्रीय महिला हॉकी शिविर के लिए चुनी गई 61 खिलाडिय़ों में शामिल किया गया।
इन सभी खिलाडिय़ों को रविवार से शुरू हो रहे इस शिविर के लिए भारतीय महिला टीम के शिविर के लिए चीफ राष्ट्रीय कोच हरेन्द्र सिंह को रिपोर्ट करने को कहा गया है। शिविर के लिए इन महिला हॉकी खिलाडिय़ों की घोषणा हॉकी इंडिया ने शनिवार को की। खिलाडिय़ों को शिविर के लिए चुनते वक्त उनके सीनियर राष्ट्रीय महिला चैंपियनशिप के प्रदर्शन को भी जेहन में रखा गया है।
भारत की महिला राष्ट्रीय हॉकी टीम के चीफ कोच हरेन्द्र सिंह ने शनिवार को कहा, % मैं टीम के राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने में नाकाम रहने पर वाकई निराश हूं। इंग्लैंड से कांसे के लिए मुकाबले में हारने के बावजूद हमारे लिए इन खेलों में कुछ सकारात्मक जरूर रहा।हम राष्ट्रमंडल खेलों में अपने प्रदर्शन से सबक लेकर भविष्य के टूर्नामेंटों के लिए विस्तृत योजना बनाएंगे।
हम आपस में मिल बैठकर यह पक्का करना चाहेंगे कि इन खेलों में की गईं गलतियों को लंदन में आगामी महिला हॉकी विश्व कप और एशियाई खेलों में न दोहराएं। हम अपनी ताकत को जेहन में रखकर आगामी एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में बेहतर प्रदर्शन करने को बेताब हैं।’
सीनियर महिला राष्ट्रीय शिविर के लिए चुनी गईं 61 खिलाडिय़ों में से 2 मई को छंटनी के बाद शिविर में 48 खिलाड़ी ही रह जाएंगीं। चीफ कोच हरेन्द्र सिंह के मार्गदर्शन में भारत की सीनियर महिला राष्ट्रीय हॉकी टीम इंग्लैंड से हार कर चौथे स्थान पर रही थी। भारत की महिला टीम ऑस्ट्रेलिया से 0-1से हार कर राष्ट्रमंडल खेलों के फाइनल में स्थान पाने से चूक गई थी।