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INDvAUS: चैंपियंस ट्रॉफी में दोहराया 2016 का फाइनल, भारत के चैंपियन बनने का सपना टूटा
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
Updated Mon, 02 Jul 2018 06:15 AM IST
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ऑस्ट्रेलिया हॉकी टीम
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भारतीय हॉकी टीम के चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब जीतने का सपना टूट गया। ऑस्ट्रेलिया ने रविवार को हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में भारत को पेनल्टी शूटआउट में 3-1 से हराकर 15वीं बार खिताब पर कब्जा किया। नीदरलैंड्स के ब्रेडा में खेले गए मुकाबले में फुलटाइम तक दोनों टीमों का स्कोर 1-1 से बराबर रहा। ऑस्ट्रेलिया की तरफ से ब्लैक गोवर्स ने 21वें मिनट में गोल किया जबकि भारत की तरफ से विवेक प्रसाद ने 42वें मिनट में गोल करके स्कोर 1-1 से बराबर किया।
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इसके बाद पेनल्टी शूटआउट से फैसला निकला। शूटआउट में ऑस्ट्रेलिया ने पहले आक्रमण किया। उसकी तरफ से पहला शॉट लेने आए जालेव्स्की ने शानदार गोल किया। वहीं भारत की तरफ से पहला शॉट अनुभवी सरदार सिंह लेने आए, जिन्होंने अपना शॉट सीधे ऑस्ट्रेलियाई कीपर के पैड्स पर जमाया।
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ऑस्ट्रेलिया ने फिर दूसरा शॉट भी सफलतापूर्वक किया और भारत पर 2-0 की बढ़त बनाई। इसके बाद भारत की तरफ से हरमनप्रीत ने स्कोर किया, लेकिन रेफरी ने उनके शॉट को मना कर दिया क्योंकि शॉट लेने के लिए खिलाड़ी ने 8 सेकंड्स से अधिक समय लिया था। ऑस्ट्रेलिया की बढ़त 2-0 बरकरार रखी।
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इसके बाद भारतीय गोलकीपर पीआर श्रीजेश ने ऑस्ट्रेलिया के स्वान की हिट रोकी और मैच में भारत की उम्मीदें बरकरार रखी। फिर मनप्रीत ने गोल करके स्कोर 1-2 किया और भारत को मैच में बनाए रखा। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया की तरफ से जेरेमी एडवर्ड्स ने निर्णायक गोल किया और भारत का सपना तोड़ दिया। वैसे, भारत के कप्तान पीआर श्रीजेश को निरंतर बेहतर प्रदर्शन करने के लिए टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर के खिताब से नवाजा गया।
याद हो कि 2016 चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल में भी भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच फैसला पेनल्टी शूटआउट से निकला था। तब ऑस्ट्रेलिया ने भारत को पेनल्टी शूटआउट में 3-1 से मात दी थी। इस बार फर्क यह रहा कि ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच फुलटाइम में स्कोर 1-1 से बराबर रहा जबकि 2016 में फुलटाइम तक स्कोर 0-0 था। हालांकि, पेनल्टी शूटआउट में स्कोर समान रहा और ऑस्ट्रेलिया ने 3-1 से बाजी जीती। इससे पहले ग्रुप चरण में भी भारत को ऑस्ट्रेलिया के हाथों 2-3 की शिकस्त का सामना करना पड़ा था।
बता दें कि गत चैंपियन और वर्ल्ड की नंबर-1 टीम ऑस्ट्रेलिया ने इससे पहले 1983, 1984, 1985*, 1989, 1990*, 1993, 1999*, 2005, 2008, 2009*, 2010, 2011, 2012* और 2016 में खिताब पर कब्जा किया था।
बहरहाल, भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मुकाबले की शुरुआत बेहद रोमांचक हुई। कंगारू टीम ने तीसरे ही मिनट में गोल करने का मौका बनाया था, लेकिन भारत ने अच्छा डिफेंस दिखाते हुए उन्हें बढ़त लेने से रोक दिया। पांचवें मिनट में भारत के सुरेंदर ने ऑस्ट्रेलिया की डी की तरफ लंबा पास खेला, लेकिन वहां उन्हें किसी का साथ नहीं मिला और यह प्रयास विफल हो गया।
इसके बाद 7वें मिनट में भारत को पेनल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन 'मेन इन ब्लू' इस पर गोल नहीं कर सकी। भारत ने पहले क्वार्टर में गोल करने के कुछ मौके गंवाए और इस तरह दोनों टीमें पहले क्वार्टर में गोल नहीं कर सकी। स्कोर 0-0 से बराबर रहा।
दूसरे हाफ में ऑस्ट्रेलिया ने अपने आक्रमण तेज किए। ब्लैक गोवर्स ने 21वें मिनट में शानदार मूव बनाते हुए गोल करने का प्रयास किया, लेकिन भारतीय गोलकीपर पीआर श्रीजेश ने उतना ही अच्छा बचाव करते हुए ऑस्ट्रेलिया को बढ़त लेने से रोक दिया।
हालांकि तीन मिनट के बाद ही ब्लैक गोवर्स ने पेनल्टी कॉर्नर पर तेजतर्रार ड्रेग फ्लिक जमाई और गेंद को गोलपोस्ट के अंदर जमाकर ऑस्ट्रेलिया को 1-0 की बढ़त दिला दी। फिर 29वें मिनट में ऑस्ट्रेलिया ने गोल करने का एक और जोरदार प्रयास किया, लेकिन पीआर श्रीजेश ने फिर खतरा बचाया और कंगारुओं को गोल करने से रोक दिया। हाफ टाइम तक ऑस्ट्रेलिया ने 1-0 की बढ़त बना रखी थी।
इसके बाद तीसरे क्वार्टर में ऑस्ट्रेलिया ने गोल करने के शुरुआती प्रयास किए, लेकिन अंपायर ने व्हिसल बजा दी क्योंकि यह गेंद बहुत ऊपर उछल गई थी और यह खतरनाक साबित हो सकती थी। इसके बाद भारत ने अपने हमले तेज किए, जिसका फायदा उसे 42वें मिनट में मिला। विवेक प्रसाद ने शानदार फील्ड गोल करके स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। तीसरे क्वार्टर की समाप्ति तक स्कोर बराबरी का रहा।
चौथे क्वार्टर में दोनों टीमों ने गोल करने के जोरदार प्रयास किए, लेकिन किसी को सफलता नहीं मिली। दिलप्रीत ने मैच खत्म होने के सात मिनट पहले एक मूव जरूर बनाया, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई कीपर ने अपने पैड्स से इसे रोककर आकर्षक बचाव किया। इसके बाद मैच पेनल्टी शूटआउट में गया और भारत को एक बार फिर रजत पदक से संतोष करना पड़ा।