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Hockey WC: दर्शकों के शोर से निपटने के लिए कृत्रिम आवाजों के बीच अभ्यास कर रही टीम इंडिया, यहां से मिली योजना

Thu, 12 Jan 2023 04:04 PM IST
स्वप्निल शशांक हेमंत रस्तोगी, अमर उजाला ब्यूरो, भुवनेश्वर
हेमंत रस्तोगी, अमर उजाला ब्यूरो, भुवनेश्वर Published by: स्वप्निल शशांक Updated Thu, 12 Jan 2023 04:04 PM IST
सार

लाहौर के अनुभव से निकला विश्व कप में शोर से निपटने का मंत्र, कोच ग्राहम रीड राउरकेला और भुवनेश्वर में दर्शकों के शोर से निपटने के लिए कृत्रिम आवाजों के बीच करा रहे अभ्यास।

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Hockey World Cup 2023: Team India practicing amid artificial voices to deal with fans noise
भारतीय हॉकी टीम के साथ नवीन पटनायक - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भुवनेश्वर और राउरकेला में दर्शकों के शोर से निपटने के लिए भारतीय हॉकी टीम लाउडस्कीपर की आवाज और कृत्रिम शोर के बीच अभ्यास कर रही है। कोच ग्राहम रीड को 1990 के लाहौर विश्व कप में मिले कड़वे अनुभव से निकला यह गुरुमंत्र अब भारतीय हॉकी टीम के काम आ रहा है। अभ्यास के दौरान ऐसा कृत्रिम शोर रखा जा रहा है जैसा स्टेडियम में मैच के दौरान दर्शकों का होता है।
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40 हजार दर्शकों के बीच गुम हो गई थी टीम की आवाज
दरअसल, 1990 के लाहौर विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया को स्टेडियम में 40 हजार से अधिक दर्शकों के शोर की आदत नहीं थी। रीड याद करते हैं कि वे आपस में बोलकर खेला करते थे, लेकिन शोर में टीम को किसी की आवाज सुनाई नहीं पड़ी। नतीजतन उन्हें पाकिस्तान के खिलाफ हारना पड़ा। पश्चिम जर्मनी के साथ कांस्य पदक के मुकाबले में उन्होंने लाउडस्पीकर की आवाजों के बीच बिल्कुल चुप रहकर अभ्यास किया। भुवनेश्वर और राउरकेला में भी इसी तरह की भीड़ होगी। भीड़ के शोर से निपटने के लिए टीम को इसी तरह से अभ्यास क राया जा रहा है।
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चुप रहकर अभ्यास कर रहे खिलाड़ी
राउरकेला के बिरसा मुंडा स्टेडियम में दर्शकों की क्षमता 21 हजार के आसपास है। इसे देश का सबसे बड़ा हॉकी स्टेडियम बताया जा रहा है। राउरकेला और भुवनेश्वर दोनों में भारतीय टीम के मैचों के सारे टिकट बिक चुके हैं। ऐसे में स्टेडियम में शोर अपने चरम पर होगा। इसी से निपटने के लिए भारतीय टीम कृत्रिम शोर के बीच बिलकुल चुप रहकर अभ्यास कर रही है, जिससे उसे विश्वकप के मैचों में कोई खामियाजा नहीं भुगतना पड़े।
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नजरों और हाथों सेे कर रहे हैं इशारा
टीम में गोलकीपर पीआर श्रीजेश और कप्तान हरमनप्रीत सिंह को जोर से बोलने की आदत है। दोनों खिलाड़ी बोलकर पास देते हैं और दूसरे खिलाड़ी को निर्देश भी देते हैं। इन दोनों ही खिलाडिय़ों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बोलेंगे नहीं सिर्फ आंखों में देखेंगे, हाथों से इशारा करेंगे और कंधों पर नजर रखेंगे। इन्हीं इशारों से सभी खिलाडिय़ों को अपनी रणनीति से अवगत कराना है। रोड ने सभी खिलाडिय़ों को एक दूसरे पर लगातार निगाह रखने के निर्देश दिए हैं।

हरेंदर ने किया था सबसे पहले प्रयोग
भारतीय टीम के कोच हरेंदर सिंह भीड़ से निपटने के लिए कृत्रिम आवाजों का प्रयोग पहले भारतीय टीम के लिए कर चुके हैं, जिसका काफी फायदा मिला।
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