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हॉकी: भारत से बेआबरू होकर निकले विदेशी कोच

Sat, 02 Sep 2017 08:55 PM IST
amarujala.com- Presented by: नवीन चौहान
amarujala.com- Presented by: नवीन चौहान Updated Sat, 02 Sep 2017 08:55 PM IST
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hockey: India Tried  Seven foreign Coach in last six years
रोलेन्ट ओल्टमंस

भारतीय हॉकी को आगे लेने जाने के लिए विदेशी कोच पर भरोसा करने का  हॉकी इंडिया का  प्रयोग एक बार फिर नाकाम रहा। जिस बात की आशंका जताई गई थी वह सही हुई। उम्मीदों और वायदों को पूरा नही कर पाने की गाज आखिर भारत की सीनियर पुरुष हॉकी टीम के चीफ कोच रोलैंट ओल्टमैंस पर गिरी और हॉकी इंडिया ने शनिवार को उन्हें उनके पद से हटा दिया गया। नया चीफ कोच चुने जाने तक  अंतरिम रूप से जिम्मेदारी हॉकी इंडिया के हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर डेविड जॉन संभालेंगे। 

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अब तक का रिकॉर्ड है कि भारतीय हॉकी टीम को विदेशी कोच रास नहीं आए है न ही विदेशी कोचों को भारतीय टीम। ज्यादातर को यहां चाहे तत्कालीन भारतीय हॉकी संघ (आईएचएफ) हो या हॉकी इंडिया से टकराव के चलते बतौर हॉकी कोच अपना पद छोड़ने को मजबूर होना पड़ा। हकीकत यही है कि विदेशी कोच भारत से बड़े बेआबरू होकर निकले। 
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सात बरस में आजमाए जा चुके हैं छह विदेशी कोच

hockey: India Tried  Seven foreign Coach in last six years
रोलेंट ओल्टमंस - फोटो : Getty Images

भारत पिछले सात बरस में छह विदेशी कोच को आजमाना चुका है। यदि एक दशक का समय लिया जाए और इसमें जर्मनी के गेरहार्ड राख और दक्षिण अफ्रीका के ग्रेग क्लार्क को शामिल किया जाए तो यह संख्या सात हो जाती है। दरअसल भारत के सही मायनों में पहले विदेशी कोच जर्मनी के गेरहार्ड राख थे इनके बाद स्पेन के होजे ब्राजा (डेढ़ बरस), माइकल क्लार्क (महज एक टूर्नामेंट 2013 में) ऑस्ट्रेलिया के माइकल नॉब्ज(दो बरस)  और टैरी वाल्श (एक बरस) , नीदरलैंड के पॉल वाल ऐस (पांच महीने) और रोलैंट ओल्टमैंस (करीब सवा दो साल) भारत के चीफ हॉकी कोच के पद  पर डेढ़ से लेकर दो साल तक अपने पर पर काबिज रहे । 


पिछले सात बरस में भारत में विदेशी कोच 

गेरहार्ड राख (जर्मनी)
2004 चैंपियंस ट्राफी । इसके बाद पद से हटा दिया।

होजे ब्राजा (स्पेन) मई 2009 से 2010 नवंबर तक 
ब्राजा को हालांकि 2012 लंदन ओलंपिक तक के लिए भारत का चीफ कोच नियुक्त किया गया लेकिन 2010 के एशियन गेम्स में कांसा जीतने के सीधे ओलंपिक के लिए सीधे  क्वॉलफाई नहीं करने में नाकाम रहने के बाद उनका सालाना करार आगे नहीं बढ़ाया गया।

माइकल नॉब्ज (ऑस्ट्रेलिया) जून 2011 से जून 2013 
(2016 के रियो ओलंपिक तक के लिए चीफ कोच नियुक्त किया गया था लेकिन भारत के लंदन में 2012 ओलंपिक में 12 वें स्थान पर रहने पर बर्खास्त कर दिया गया।  

ग्रेग क्लार्क (दक्षिण अफ्रीका)
2013 में महज एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में कोच उसके बाद छुट्टी 

टैरी वॉल्श (ऑस्ट्रेलिया) अक्टूबर 2013 से अक्टूबर 2014 
2016 के रियो ओलंपिक के तक । हॉकी इंडिया और साई से तकरार के कारण पद से छुट्टी।

पॉल वॉन ऐस (नीदरलैंड) फरवरी 2015 से जुलाई 2015
2018 तक हॉकी इंडिया के साथ तीन बरस का करार लेकिन तत्कालीन अध्यक्ष नरिंदर बत्रा से तकरार के कारण कार्यकाल खत्म) 

रोलैंट ओल्टमैंस (नीदरलैंड) जुलाई 2015 से सितंबर 2017 
2013 में भारत के हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर बने और टैरी वॉल्श के अक्टूबर 2014 में इस्तीफा देने के बाद अंतरिम कोच और वॉन ऐस के इस्तीफा देने के बाद जुलाई 2015 में चीफ कोच नियुक्त। भारत के अंतर्राष्ट्रीय पर ढीले प्रदर्शन के कारण  चीफ कोच के पद से छुट्टी।
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