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Hockey: एफआईएच प्रो लीग में अच्छी शुरुआत करना चाहेगा भारत, दूसरी श्रेणी में खिसकने से बचने की करेगा कोशिश
Fri, 27 Jun 2025 04:36 PM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Fri, 27 Jun 2025 04:36 PM IST
सार
भारत अब शनिवार और रविवार को चौथे स्थान पर काबिज चीन के खिलाफ लगातार दो मैचों में जीत के साथ अपने प्रो लीग अभियान का सकारात्मक अंत करने के लिए प्रतिबद्ध होगा।
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भारतीय महिला हॉकी टीम
- फोटो : Hockey India
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विस्तार
भारतीय महिला हॉकी टीम चीन के खिलाफ शनिवार को यहां होने वाले मैच में जीत हासिल करके लगातार छह हार के सिलसिले को तोड़कर एफआईएच प्रो लीग से बाहर होने से बचना चाहेगी। भारतीय महिला टीम वर्तमान में 14 मैचों में 10 अंकों के साथ नौ टीमों की तालिका में सबसे निचली पायदान पर है और उस पर 2026 में दूसरी श्रेणी के एफआईएच नेशंस कप में खिसकने का खतरा मंडरा रहा है।
हॉकी इंडिया ने जब हरेंद्र सिंह को फिर से टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया था तब किसी ने भी नहीं सोचा था कि टीम इस स्थिति में पहुंच जाएगी, लेकिन इस साल के शुरू में घरेलू चरण में अपेक्षाकृत अच्छा प्रदर्शन करने वाली भारतीय महिला टीम टूर्नामेंट के यूरोपीय चरण में ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना और बेल्जियम (एक प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ दो मैच) के खिलाफ लगातार छह मैच हार गई।
भारत अब शनिवार और रविवार को चौथे स्थान पर काबिज चीन के खिलाफ लगातार दो मैचों में जीत के साथ अपने प्रो लीग अभियान का सकारात्मक अंत करने के लिए प्रतिबद्ध होगा। भारतीय टीम को भले ही लगातार छह हार का सामना करना पड़ा हो, लेकिन उसने यहां अच्छी और आक्रामक हॉकी खेली, लेकिन शुरुआत में मिले मौकों का फायदा उठाने और पेनल्टी कॉर्नर को भुनाने में असफल रहने के कारण टीम को हार का सामना करना पड़ा। दीपिका पर पेनल्टी कॉर्नर पर गोल करने का बहुत अधिक दबाव था जिससे उनका खेल प्रभावित हुआ।
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भारतीय मिडफील्ड ने हालांकि अच्छा प्रदर्शन किया। सलीमा टेटे, लालरेमसियामी, शर्मिला देवी, सुनलिता टोप्पो, वैष्णवी विट्ठल फाल्के और नेहा जैसी खिलाडि़यों ने अग्रिम पंक्ति के लिए पर्याप्त मौके बनाए, लेकिन स्ट्राइकरों ने भारत को निराश किया क्योंकि नवनीत, दीपिका, बलजीत कौर और अन्य खिलाड़ियों को गोल करने के लिए संघर्ष करना पड़ा।
रक्षा पंक्ति में सुशीला चानू, ज्योति, इशिका चौधरी, ज्योति छेत्री और सुमन देवी तौदाम ने कई गलतियां की जिसका टीम को खामियाजा भुगतना पड़ा। भारतीय टीम को अगर चीन के खिलाफ दोनों मैच में जीत हासिल करनी है तो उसे गलतियों से बचकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा।
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हॉकी इंडिया ने जब हरेंद्र सिंह को फिर से टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया था तब किसी ने भी नहीं सोचा था कि टीम इस स्थिति में पहुंच जाएगी, लेकिन इस साल के शुरू में घरेलू चरण में अपेक्षाकृत अच्छा प्रदर्शन करने वाली भारतीय महिला टीम टूर्नामेंट के यूरोपीय चरण में ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना और बेल्जियम (एक प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ दो मैच) के खिलाफ लगातार छह मैच हार गई।
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भारत अब शनिवार और रविवार को चौथे स्थान पर काबिज चीन के खिलाफ लगातार दो मैचों में जीत के साथ अपने प्रो लीग अभियान का सकारात्मक अंत करने के लिए प्रतिबद्ध होगा। भारतीय टीम को भले ही लगातार छह हार का सामना करना पड़ा हो, लेकिन उसने यहां अच्छी और आक्रामक हॉकी खेली, लेकिन शुरुआत में मिले मौकों का फायदा उठाने और पेनल्टी कॉर्नर को भुनाने में असफल रहने के कारण टीम को हार का सामना करना पड़ा। दीपिका पर पेनल्टी कॉर्नर पर गोल करने का बहुत अधिक दबाव था जिससे उनका खेल प्रभावित हुआ।
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भारतीय मिडफील्ड ने हालांकि अच्छा प्रदर्शन किया। सलीमा टेटे, लालरेमसियामी, शर्मिला देवी, सुनलिता टोप्पो, वैष्णवी विट्ठल फाल्के और नेहा जैसी खिलाडि़यों ने अग्रिम पंक्ति के लिए पर्याप्त मौके बनाए, लेकिन स्ट्राइकरों ने भारत को निराश किया क्योंकि नवनीत, दीपिका, बलजीत कौर और अन्य खिलाड़ियों को गोल करने के लिए संघर्ष करना पड़ा।
रक्षा पंक्ति में सुशीला चानू, ज्योति, इशिका चौधरी, ज्योति छेत्री और सुमन देवी तौदाम ने कई गलतियां की जिसका टीम को खामियाजा भुगतना पड़ा। भारतीय टीम को अगर चीन के खिलाफ दोनों मैच में जीत हासिल करनी है तो उसे गलतियों से बचकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा।