फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Sports ›   From a Ronaldinho Reel to Asian Games 2026: Quimcy Dsouza’s Unlikely Teqball Journey

कौन हैं क्विंसी?: चोट के कारण फुटबॉल छोड़ा, रोनाल्डिन्हो की रील से मिला नया खेल; एशियाड में उसी में रचा इतिहास

Sat, 19 Sep 2026 12:33 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची Published by: स्वप्निल शशांक Updated Sat, 19 Sep 2026 12:33 PM IST
सार

फुटबॉल की चोट ने क्विंसी डिसूजा को मैदान से दूर किया, लेकिन इंस्टाग्राम पर रोनाल्डिन्हो की एक रील ने उन्हें नया खेल दिखा दिया। चार साल बाद वह एशियन गेम्स के टेकबॉल सेमीफाइनल में थीं। हार के बावजूद क्विंसी की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि भारत में नए खेल को खड़ा करने के जुनून की है।

विज्ञापन
From a Ronaldinho Reel to Asian Games 2026: Quimcy Dsouza’s Unlikely Teqball Journey
क्विंसी डिसूजा - फोटो : Instagram

विस्तार

कभी महाराष्ट्र के लिए फुटबॉल खेलने वाली और राज्य स्तर पर 1500 मीटर और 3000 मीटर दौड़ में हिस्सा लेने वाली क्विंसी डिसूजा ने शायद खुद भी नहीं सोचा होगा कि एक इंस्टाग्राम रील उनकी जिंदगी की दिशा बदल देगी। लिगामेंट की चोट के कारण फुटबॉल से दूर होकर जब वह ठीक हो रही थीं, तभी उनकी नजर ब्राजील के महान फुटबॉलर रोनाल्डिन्हो की टेेकबॉल खेलते हुए एक रील पर पड़ी। उन्होंने इस खेल को आजमाया और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। क्विंसी के शब्दों में, 'पहले ही दिन मुझे इस खेल से प्यार हो गया।'
विज्ञापन


चार साल बाद वही खिलाड़ी शनिवार को एशियन गेम्स के सेमीफाइनल में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही थी। इंडोनेशिया की सुमाया से तीन गेम के मुकाबले में हार के कारण वह फाइनल में नहीं पहुंच सकीं, लेकिन सेमीफाइनल तक पहुंचना उनके लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं था। लेकिन हार के बावजूद उनके पास कांस्य पदक जीतने का मौका है। वह रविवार को जापान की यिउना सकामोटो के खिलाफ ब्रॉन्ज मेडल के लिए मुकाबला करेंगी।
विज्ञापन


View this post on Instagram

A post shared by Quimcy Dsouza | Indian Teqball Athlete 🇮🇳 (@quimcyyy)

विज्ञापन
विज्ञापन

'क्यू' में दिखी अपनी पहचान
क्विंसी के लिए टेेकबॉल सिर्फ एक नया खेल नहीं था। उन्हें इसके लोगो में मौजूद 'Q' अक्षर में भी अपनी एक पहचान नजर आई। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, 'मैंने यह बात किसी को नहीं बताई, लेकिन टेेकबॉल के लोगो में जो 'Q' है, मुझे लगता है कि वह क्विंसी है। इसलिए मुझे लगता है कि यह खेल मेरे लिए ही है।' मुंबई में कुछ खेल प्रेमियों के छोटे से समूह के साथ उन्होंने टेकबॉल की शुरुआत की। इसके बाद वह बंगलूरू चली गईं। अब वह खेल उपकरण बनाने वाली कंपनी डेकाथलॉन में टेस्ट इंजीनियर के तौर पर काम करती हैं और टेेकबॉल क्लब ऑफ बंगलूरू में प्रशिक्षण लेती हैं।

हालांकि, उनका लक्ष्य सिर्फ खुद आगे बढ़ना नहीं था। उन्होंने बंगलूरू में टेकबॉल क्लब की स्थापना की और युवा खिलाड़ियों के साथ काम करना शुरू किया। उनके साथ प्रशिक्षण लेने वाले दो खिलाड़ी एशियन यूथ गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं। सात बार की राष्ट्रीय चैंपियन क्विंसी अब भारत में इस खेल को आगे बढ़ाने वाले शुरुआती खिलाड़ियों में शामिल हैं।

View this post on Instagram

A post shared by Quimcy Dsouza | Indian Teqball Athlete 🇮🇳 (@quimcyyy)


फुटबॉल ने दिया आधार, टेकबॉल ने सिखाया धैर्य
क्विंसी का मानना है कि फुटबॉल की पृष्ठभूमि ने टेकबॉल में उन्हें कुछ फायदा दिया। इस खेल में हाथों का इस्तेमाल नहीं किया जाता और खिलाड़ी पैर, घुटने, छाती और सिर से गेंद को घुमावदार टेबल पर नियंत्रित करते हैं। उन्होंने कहा, 'फुटबॉल खिलाड़ियों को थोड़ा फायदा होता है क्योंकि इसमें आप हाथों का इस्तेमाल नहीं करते। इसलिए आप अपने पैरों का इस्तेमाल अपने आप ज्यादा करने लगते हैं।' हालांकि, फुटबॉल की तकनीक के साथ टेेकबॉल में आगे बढ़ने के लिए धैर्य भी जरूरी था। खासकर तब, जब भारत में इस खेल के खिलाड़ियों को लंबे समय तक आर्थिक सहायता नहीं मिली।

View this post on Instagram

A post shared by Teqball India (@teqballindia)




चार साल तक खुद उठाया खर्च
क्विंसी ने बताया कि पिछले चार वर्षों से खिलाड़ियों को फंडिंग नहीं मिली। ऐसे में खिलाड़ियों को अपनी नौकरी से मिलने वाले पैसे से ही टूर्नामेंट का खर्च निकालना पड़ा। उन्होंने कहा, 'पिछले चार साल से हमें फंड नहीं मिला है। हम फुल टाइम काम करते हैं और उसी पैसे को टूर्नामेंट के लिए बचाते हैं।'

एशियन गेम्स का अनुभव उनके लिए इसलिए भी खास रहा क्योंकि इस बार भारतीय ओलंपिक संघ और टीम की ओर से खिलाड़ियों के खर्च और जरूरी व्यवस्थाओं का इंतजाम किया गया था। क्विंसी ने कहा, 'इस बार जब आईओए और टीम की ओर से सब कुछ प्रायोजित था और हमारे लिए सब कुछ तैयार था, तो यह अनुभव बहुत भावुक कर देने वाला है।'

From a Ronaldinho Reel to Asian Games 2026: Quimcy Dsouza’s Unlikely Teqball Journey
क्विंसी डिसूजा - फोटो : Instagram
चार साल पहले सपना देखा, अब एशियन गेम्स में उतरीं
क्विंसी की कहानी का सबसे भावुक हिस्सा यही है कि चार साल पहले जब हांगझोउ एशियन गेम्स का समय था, तब उन्होंने टेकबॉल को जाना ही था। चार साल बाद वह उसी महाद्वीपीय खेल मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रही थीं। उन्होंने कहा, 'मैंने इस दिन का सपना देखा था। इतने बड़े मंच पर खेलना सिर्फ मेरे लिए ही नहीं, बल्कि यहां मौजूद सभी भारतीय खिलाड़ियों और भारत में टेकबॉल खिलाड़ियों के सपनों के लिए भी बहुत खुशी की बात है।'

शनिवार को सुमाया के खिलाफ सेमीफाइनल में क्विंसी ने पहला गेम जीता था। इसके बाद इंडोनेशियाई खिलाड़ी ने वापसी करते हुए अगले दो गेम अपने नाम कर लिए। क्विंसी ने हार के बाद भी किसी एक गलती को जिम्मेदार नहीं ठहराया। उन्होंने कहा, 'मैं यह नहीं कहूंगी कि कुछ गलत हुआ। इस खेल में कभी किस्मत होती है, कभी मेहनत। कभी आपके स्मैश सही जगह गिरते हैं और कभी चीजें आपके मुताबिक नहीं होतीं। हर गेंद एक जैसी नहीं होती और आप जो कुछ करते हैं, वह हर बार एक जैसा नहीं होता।'

इंडोनेशिया के खिलाड़ियों को सेपकटकरा की पृष्ठभूमि के कारण टेकबॉल की कुछ तकनीकों का फायदा मिलने की बात भी सामने आती है। लेकिन क्विंसी के लिए सेमीफाइनल की हार सफर का अंत नहीं है। उन्होंने कहा, 'मैंने अपने साथियों के लिए और भारत में अपने साथियों के लिए खेला। बिना कोच, बिना मार्गदर्शन और बिना समर्थन के अगर आप यहां तक पहुंचे हैं, तो यह अपने आप में बड़ी बात है। मैं चाहती हूं कि भारत जाने कि मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया और भारत यह जाने कि टेकबॉल क्या है।' चार साल पहले रोनाल्डिन्हो की एक रील से शुरू हुआ सफर अब एशियन गेम्स के मंच तक पहुंच चुका है। फाइनल का टिकट भले ही नहीं मिला, लेकिन क्विंसी की नजरें अब भी पदक पर टिकी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Sports news in Hindi related to live update of Sports News, live scores and more cricket news etc. Stay updated with us for all breaking news from Sports and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed