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आईएसएल टीमों के दो बड़े कोच ने भारतीय टीम की कमान संभालने को जताई दावेदारी
Thu, 07 Feb 2019 10:37 PM IST
अंशुल तलमले
हेमंत रस्तोगी
हेमंत रस्तोगी
Published by: अंशुल तलमले
Updated Thu, 07 Feb 2019 10:37 PM IST
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एएफसी कप के पहले दौर में बाहर होने के बाद भारतीय टीम से इस्तीफा देने वाले इंग्लिश कोच स्टीफन कांस्टेंटाइन की जगह लेने के लिए आईएसएल के नामी कोचेज में होड़ लग गई है। यह हाल तब है जब ऑल इंडिया फुटबाल फेडरेशन (एआईएफएफ) ने भारतीय टीम के कोच केलिए विज्ञापन ही नहीं निकाला है बावजूद इसके कई विदेशी कोचेज ने दावा जताना शुरू कर दिया है। कोच के लिए दावा जताने वालों में प्रमुख एटीके को आईएसएल चैंपियन बनाने वाले स्पेनिश कोच एंटोनियो हबास और वेनेज्वेला निवासी नार्थ ईस्ट यूनाइटेट के कोच सेजार फारियास हैं।
कांस्टेंटाइन के संरक्षण में भारतीय टीम ने गजब का प्रदर्शन कर टॉप 100 में जगह बनाई। बहरीन के खिलाफ निराशाजनक प्रदर्शन के चलते भारत एएफसी कप के दूसरे दौर में जगह नहीं बना पाया। नतीजन कांस्टेंटाइन ने इस्तीफा दे दिया। वहीं फीफा के बाद एफसी बासेल क्लब के एमडी बर्गनर ने भारत को फुटबाल में सोई हुई ताकत बताया है। यही कारण है कि नामी कोच भारतीय टीम से जुडने के इच्छुक हैं।
मई तक अनुबंधित करना है विदेशी कोच
एआईएफएफ सेक्रेटरी जनरल कुशाल दास ने साफ किया है कि उन्हें मई तक विदेशी कोच अनुबंधित करना है, कुछ ही दिनों में इसके लिए विज्ञापन निकाला जाएगा।
बताने योग्य यह है कि फुटबाल में विदेशी कोच सबसे महंगा होता है। कांस्टेंटाइन का भी वेतन 21 हजार अमेरिकी डॉलर प्रति माह था। यह भारत में दूसरे खेलों के विदेशी कोच से कहीं अधिक है। भारत के एक अन्य ब्रिटिश कोच बॉब हॉटन का वेतन इससे भी अधिक था। साई ने फेडरेशन को आश्वासन दिया है कि नए कोच को वेतन देने में उनकी मदद की जाएगी।
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एजेंट के जरिए किया आवेदन
हबास एटीके के अलावा एफसी पुणे सिटी के भी कोच रह चुके हैं, जबकि फारियास 2010 में दो अंकों से विश्व कप क्वालिफाई करने से चूक गई वेनेज्वेला टीम के कोच थे। वह बोलीविया के भी कोच रहे हैं। उन्हें दक्षिण अमेरिका में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। खास बात यह है कि इन विदेशी कोच ने खुद नहीं बल्कि अपने एजेंट के जरिए आवेदन किया है। अभी तक किसी भारतीय कोच ने दावेदारी नहीं जताई है।
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कांस्टेंटाइन के संरक्षण में भारतीय टीम ने गजब का प्रदर्शन कर टॉप 100 में जगह बनाई। बहरीन के खिलाफ निराशाजनक प्रदर्शन के चलते भारत एएफसी कप के दूसरे दौर में जगह नहीं बना पाया। नतीजन कांस्टेंटाइन ने इस्तीफा दे दिया। वहीं फीफा के बाद एफसी बासेल क्लब के एमडी बर्गनर ने भारत को फुटबाल में सोई हुई ताकत बताया है। यही कारण है कि नामी कोच भारतीय टीम से जुडने के इच्छुक हैं।
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मई तक अनुबंधित करना है विदेशी कोच
एआईएफएफ सेक्रेटरी जनरल कुशाल दास ने साफ किया है कि उन्हें मई तक विदेशी कोच अनुबंधित करना है, कुछ ही दिनों में इसके लिए विज्ञापन निकाला जाएगा।
बताने योग्य यह है कि फुटबाल में विदेशी कोच सबसे महंगा होता है। कांस्टेंटाइन का भी वेतन 21 हजार अमेरिकी डॉलर प्रति माह था। यह भारत में दूसरे खेलों के विदेशी कोच से कहीं अधिक है। भारत के एक अन्य ब्रिटिश कोच बॉब हॉटन का वेतन इससे भी अधिक था। साई ने फेडरेशन को आश्वासन दिया है कि नए कोच को वेतन देने में उनकी मदद की जाएगी।
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एजेंट के जरिए किया आवेदन
हबास एटीके के अलावा एफसी पुणे सिटी के भी कोच रह चुके हैं, जबकि फारियास 2010 में दो अंकों से विश्व कप क्वालिफाई करने से चूक गई वेनेज्वेला टीम के कोच थे। वह बोलीविया के भी कोच रहे हैं। उन्हें दक्षिण अमेरिका में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। खास बात यह है कि इन विदेशी कोच ने खुद नहीं बल्कि अपने एजेंट के जरिए आवेदन किया है। अभी तक किसी भारतीय कोच ने दावेदारी नहीं जताई है।