फुटबॉल मैच के बीच में ही रेफरी ने निकाल ली पिस्तौल, डर गया खिलाड़ी
मैच रेफरी का काम मुकाबले को सुचारू रूप से बनाए रखने का होता है। रेफरी पर मैदान में उतरी दोनों टीमों के खिलाड़ियों को खेल के अनुशासन में बनाए रखना भी होता है।
आपने क्रिकेट के मैदान पर कई खिलाड़ियों को मर्यादा तोड़ते देखा होगा। हालांकि क्रिकेट में खिलाड़ियों को दंड मैच के बाद मिलता है क्योंकि रेफरी मैदान के बाहर होता है। लेकिन फुटबॉल और हॉकी जैसे कई खेलों में रेफरी मैच के बीच में ही सजा सुना देता है।
अब आप सोचिए कि अगर रेफरी ही अनुशासन तोड़ बैठे तो क्या होगा। ऐसा ही एक दिलचस्प घटना हुई फुटबॉल के दीवाने देश ब्राजील में। ब्राजील में ब्रूमादिन्हो और अमांता डी बोला के बीच एमेच्योर मुकाबला खेला जा रहा था। मैच के दौरान अमांता डी बोला के एक खिलाड़ी ने रेफरी ग्रैबिएल मुर्ता को पहले हल्के से मारा फिर पंच भी कर दिया।
रेफरी मुर्ता के पिस्तौल निकालते ही डर गया खिलाड़ी
अमांता डी बोला के फुटबॉल खिलाड़ी की ओर से हो रहे हमले से नाराज रेफरी ग्रैबिएल मुर्ता ने तुरंत पीछे रखी पिस्तौल निकाल ली और खिलाड़ी की ओर सीधे तान दिया।
रेफरी मुर्ता के बंदूक निकालने के बाद वह खिलाड़ी बुरी तरह से डर गया। अन्य रेफरियों ने गुस्से में आ गए रेफरी को शांत कराने में काफी वक्त लगाया।
हालांकि यह अच्छी बात रही कि गुस्से में दिख रहे रेफरी ने खिलाड़ी की ओर सिर्फ पिस्तौल ही ताने रखा उसे चलाया नहीं, वरना एक हादसा हो ही जाता। वह मैच में सहायक रेफरी के रूप में मैदान पर उतरे थे। ग्रैबिएल मुर्ता खुद एक पुलिस अधिकारी है और उन पर मैच के दौरान पिस्तौल रखने का आरोप है। उन्हें मनोचिकित्सक के पास भेज दिया गया है।
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