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फीफा विश्व कप 2018: एक लाख से ज्यादा बच्चे सीख रहे शास्त्रीय-नृत्य रूस में!
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
Updated Mon, 16 Jul 2018 05:09 AM IST
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डेमो पिक
हरियाणा के धर्मेंद्र गौतम को कराटे का शौक था, लेकिन पिता के कहने पर शास्त्रीय नृत्य सीखना शुरू किया और आज उनके इशारों पर रूस के एक लाख से ज्यादा बच्चे नृत्य सीख रहे हैं। भारतीय दूतावास के कार्यक्रम में गुरु धर्मेंद्र की शिष्याओं ने कत्थक, लावणी और घूमर नृत्य पेश किए।
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ये सभी लड़कियां रूसी ही थीं और मेकअप में पहचानना मुश्किल हो रहा था कि भारतीय लग रही थीं। धर्मेंद्र गौतम करीब तीन साल से यहां हैं और भारतीय दूतावास की तरफ से मास्को सहित रूस के अन्य शहरों में भी बच्चों को नृत्य सिखा रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि अकेले मास्को में ही अस्सी से ज्यादा युवतियां सीख रही हैं, इनमें एक ही लड़का है। मास्को में रोज 11 बजे से 7 बजे तक अभ्यास कराया जाता है। इनसे फीस नहीं ली जाती है, भारत सरकार ही खर्च उठाती है। हफ्ते में पांच दिन मास्को में और बाकी दो दिन रूस के दूसरे शहरों में बच्चों को सिखाते हैं।
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रूस में ओडिसी नृत्य को लेकर ज्यादा दिलचस्पी है, इसलिए उसके छात्र ज्यादा हैं। भारत में भी इन बच्चों ने अपनी कला दिखाई है। ये लोग हिंदी गानों पर नाच करना ज्यादा पसंद करते हैं, इसलिए कुछ ऐसे गाने भी लिए गए हैं, जिनमें लोक संगीत हो और शास्त्रीय संगीत भी। घूमर नृत्य यहां इन दिनों ज्यादा चल रहा है।
मास्को में तो फिर भी ठीक है, और शहरों में इतने बच्चे आ जाते हैं कि सभी को शामिल नहीं कर सकते। कई बच्चे ऐसे भी हैं, जो दूसरे शहरों से यहां मास्को आकर सीख रहे हैं कि यहां प्रैक्टिस अच्छे से हो जाती है।
गुरु धर्मेंद्र गौतम ने पंडित बिरजू महाराज के साथ संजय लीला भंसाली की 'देवदास' में पढ़ंत की थी और नृत्य निर्देशन में भी हिस्सेदारी की थी। अब उनका मन है कि यहीं मास्को में खुद ही नृत्यशाला शुरू करें। भारत सरकार से उन्हें पूरी मदद और सुविधा मिल रही है, लेकिन फिर भी अपनी नृत्यशाला में वे खुल कर मन की कर सकेंगे। इन लड़कियों का नृत्य देख कर लगा, रूस में शास्त्रीय नृत्य के अच्छे दिन नजदीक ही हैं।