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FIFA WC: पहली बार अफ्रीका के 10 में से नौ देशों ने नॉकआउट में बनाई जगह; कांगो ने 52 साल बाद कैसे रचा इतिहास?

Sun, 28 Jun 2026 12:43 PM IST
शिवम गर्ग स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, अटलांटा
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, अटलांटा Published by: शिवम गर्ग Updated Sun, 28 Jun 2026 12:43 PM IST
सार

फीफा विश्व कप 2026 में अफ्रीकी देशों ने नया इतिहास रच दिया है। इतिहास में पहली बार रिकॉर्ड 10 में से 9 अफ्रीकी देशों ने नॉकआउट राउंड में जगह बनाई है। डीआर कांगो और अल्जीरिया के शानदार प्रदर्शन के साथ अफ्रीकी फुटबॉल ने नया इतिहास रच दिया।

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FIFA World Cup 2026: How Did Nine African Nations Reach Knockout Stage as DR Congo Ended a 52-Year Wait?
डीआर कांगो ने पहली बार नॉकआउट में बनाई जगह - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

फीफा विश्व कप 2026 में अफ्रीकी फुटबॉल ने नया इतिहास रच दिया है। इस बार विश्व कप के लिए अफ्रीका की रिकॉर्ड 10 टीमों ने क्वालिफाई किया था और अब डीआर कांगो की उज्बेकिस्तान पर 3-1 की जीत तथा अल्जीरिया के ऑस्ट्रिया के खिलाफ 3-3 के रोमांचक ड्रॉ के बाद 10 में से 9 टीमें नॉकआउट स्टेज में पहुंच गई हैं। इससे पहले किसी एक विश्व कप में अफ्रीका की अधिकतम दो टीमें ही नॉकआउट तक पहुंच सकी थीं।

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राउंड ऑफ 32 में किन-किन अफ्रीकी टीमों ने जगह बनाई?
टूर्नामेंट के 17 दिनों के खेल के बाद मोरक्को, दक्षिण अफ्रीका, सेनेगल, आइवरी कोस्ट, घाना, केप वर्डे, मिस्र, डीआर कांगो और अल्जीरिया ने राउंड ऑफ 32 के लिए क्वालिफाई किया। चार साल पहले कतर विश्व कप में मोरक्को सेमीफाइनल में पहुंचने वाला पहला अफ्रीकी देश बना था और इस बार भी उसने ब्राजील को 1-1 की बराबरी पर रोककर अपनी मजबूत दावेदारी दिखाई है।

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अब तक केवल छह अफ्रीकी देश ही विश्व कप के नॉकआउट चरण तक पहुंच सके थे, जिनमें से कुछ ने यह उपलब्धि एक से अधिक बार हासिल की थी। हालांकि, किसी एक विश्व कप में सबसे ज्यादा दो अफ्रीकी टीमें ही नॉकआउट में पहुंची थीं। यह रिकॉर्ड 2014 और 2022 में बना था।

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डीआर कांगो ने 52 साल बाद कैसे रचा इतिहास?
ग्रुप मुकाबले में डीआर कांगो ने शानदार प्रदर्शन करते हुए उज्बेकिस्तान को 3-1 से मात दी। इस जीत के साथ डीआर कांगो ने विश्व कप में 52 साल बाद जीत का स्वाद चखा। साथ ही टीम ने पहली बार नॉकआउट स्टेज के लिए भी क्वालिफाई कर लिया। डीआर कांगो की ओर से योएन विसा ने दो गोल दागे, जबकि फिस्टन मेयेले ने एक गोल किया। वहीं, इस हार के बाद ग्रुप में सबसे निचले स्थान पर रहने वाली उज्बेकिस्तान की टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गई।

पहले हाफ के बाद डीआर कांगो ने वापसी कैसे की?
अटलांटा स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले की शुरुआत उज्बेकिस्तान ने आक्रामक अंदाज में की। खेल शुरू होने के महज 20 सेकंड के भीतर टीम ने गोल करने का मौका बनाया, लेकिन ऑफसाइड के कारण शुरुआती बढ़त नहीं मिल सकी। हालांकि, 10वें मिनट में एल्डोर शोमुरोदोव ने टाइट एंगल से शानदार गोल कर टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी।

गोल खाने के बाद डीआर कांगो ने वापसी की कोशिश की। नाथनेल म्बुकू का एक शानदार प्रयास गोल में तब्दील हो सकता था, लेकिन फाउल के कारण उसे मान्यता नहीं मिली। पहले हाफ में इसके बाद कोई और गोल नहीं हुआ और उज्बेकिस्तान 1-0 की बढ़त के साथ ब्रेक तक पहुंचा। दूसरे हाफ में उज्बेकिस्तान ने बढ़त बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन शोमुरोदोव का दूसरा प्रयास गोलपोस्ट के बाहर चला गया। इसके बाद डीआर कांगो ने धीरे-धीरे मुकाबले पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली।

68वें मिनट में डीआर कांगो को पेनल्टी मिली, जिसे योएन विसा ने गोल में बदलकर स्कोर 1-1 कर दिया। इसके बाद 78वें मिनट में मेस्चैक एलिया के शॉट पर फिस्टन मेयेले ने शानदार फिनिश करते हुए टीम को 2-1 की बढ़त दिला दी। इंजरी टाइम में योएन विसा ने बॉक्स के बाहर से शानदार गोल कर अपना दूसरा गोल पूरा किया और टीम की 3-1 की जीत सुनिश्चित कर दी।

अब डीआर कांगो का अगला मुकाबला किससे होगा?
इस जीत के साथ डीआर कांगो ग्रुप में तीसरे स्थान पर रहते हुए नॉकआउट स्टेज में पहुंच गया। अब राउंड ऑफ 32 में 1 जुलाई को अटलांटा में उसका सामना इंग्लैंड से होगा।

योएन विसा ने अफ्रीकी फुटबॉल के भविष्य को लेकर क्या कहा?
मुकाबले के बाद प्लेयर ऑफ द मैच बने योएन विसा ने कहा "52 साल बाद हम दूसरी बार विश्व कप में पहुंचे हैं। चार साल पहले इसी टीम के साथ हमने विश्व कप के लिए क्वालिफाई करने की शुरुआत की थी। पुर्तगाल के खिलाफ ड्रॉ रहा, कोलंबिया से हार मिली और फिर इस मैच में भी 10 मिनट के भीतर हम पीछे हो गए थे। फुटबॉल में कुछ भी आसान नहीं होता। ऐसे समय में धैर्य बनाए रखना जरूरी होता है और जब सफलता मिले तो उसका आनंद लेना चाहिए।"

उन्होंने आगे कहा कि अब हर अफ्रीकी टीम बड़े सपने देख सकती है। पिछले विश्व कप में मोरक्को सेमीफाइनल तक पहुंचा था और इस बार कई टीमें नॉकआउट में हैं। युवा खिलाड़ियों के आने से अफ्रीकी फुटबॉल का भविष्य उज्ज्वल नजर आता है। इससे हमारी फुटबॉल फेडरेशन भी बड़े सपने देख सकती है।

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