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झाझरिया बोले, 12 साल पहले मिल जाना चाहिए था राजीव गांधी खेल रत्न
amarujala.com-presented by: शरद मिश्र
Updated Mon, 07 Aug 2017 01:40 PM IST
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देवेंद्र झाझरिया
- फोटो : The indian express
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रियो पैरा ओलंपिक खेलों में गोल्ड मेडल जीतकर देश को गौरव दिलाने वाले देवेंद्र झाझरिया को देश के सबसे बड़े खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न के लिए चुना गया है। झाझरिया इस सम्मान को एक बड़ी उपलब्धि मानते हैं लेकिन उनका कहना है कि यह सम्मान उन्हें काफी देर से मिल रहा है। झांझरिया ने कहा कि जब उन्होंने 2004-05 में एथेंस में गोल्ड मेडल जीता था तभी देश के सबसे बड़े खेल सम्मान से उन्हें सम्मानित कर देना चाहिए। अभी 2017 में यह सम्मान दिया जा रहा है। मुझे लगता है इसमें 12 साल की देरी हो गई है। गौरतलब है कि झाझरिया ने 2016 में भी पैरा ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतकर अपने एथेंस के पुराने रिकॉर्ड को ध्वस्त किया था।
टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक साक्षात्कार में झाझरिया ने कहा कि अब देश में पैरा ओलंपिक के बारे में लोग जानने लगे हैं। लोगों को यह भी पता चल गया है कि शारीरिक रूप से अक्षम लोग भी जीवन में खेलों में आगे जाकर कमाल कर सकते हैं। झांझरिया हालांकि वर्तमान में पैरा ओलंपिक तथा इसके खिलाड़ियों को मिलने वाली सुविधाओं से असंतुष्ट हैं। उनका कहना है कि इस मामले में अभी काफी गहन प्रयास करने जरूरत है।
देवेंद्र ने पैरा ओलंपिक खेलों की जेवलिन थ्रो में इतिहास रचते हुए गोल्ड मेडल हासिल किया था। बचपन में पेड़ में चढ़ने के दौरान देवेंद्र झाझरिया 11000 वोल्ट के बिजली के तारे के चपेट में आ गए। नतीजन उन्हें अपना बायां हाथ गंवाना पड़ा। शारीरिक रूप से अक्षम होने के बाद भी उन्हें उनके परिवार वालों ने कभी कमजोरी महसूस नहीं होने दी। परिजनों ने उनका उत्साह बढ़ाया और उनकी खेलों की रुचि को हमेशा प्रोत्साहित किया। परिजनों के ऐसे सहयोग और साथ की वजह से झाझरिया ने इतिहास रच दिया।
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टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक साक्षात्कार में झाझरिया ने कहा कि अब देश में पैरा ओलंपिक के बारे में लोग जानने लगे हैं। लोगों को यह भी पता चल गया है कि शारीरिक रूप से अक्षम लोग भी जीवन में खेलों में आगे जाकर कमाल कर सकते हैं। झांझरिया हालांकि वर्तमान में पैरा ओलंपिक तथा इसके खिलाड़ियों को मिलने वाली सुविधाओं से असंतुष्ट हैं। उनका कहना है कि इस मामले में अभी काफी गहन प्रयास करने जरूरत है।
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देवेंद्र ने पैरा ओलंपिक खेलों की जेवलिन थ्रो में इतिहास रचते हुए गोल्ड मेडल हासिल किया था। बचपन में पेड़ में चढ़ने के दौरान देवेंद्र झाझरिया 11000 वोल्ट के बिजली के तारे के चपेट में आ गए। नतीजन उन्हें अपना बायां हाथ गंवाना पड़ा। शारीरिक रूप से अक्षम होने के बाद भी उन्हें उनके परिवार वालों ने कभी कमजोरी महसूस नहीं होने दी। परिजनों ने उनका उत्साह बढ़ाया और उनकी खेलों की रुचि को हमेशा प्रोत्साहित किया। परिजनों के ऐसे सहयोग और साथ की वजह से झाझरिया ने इतिहास रच दिया।
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