{"_id":"679b840327371d0bfb0624c9","slug":"commonwealth-games-gold-medalist-manoj-kumar-retires-will-now-make-a-new-beginning-2025-01-30","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Manoj Kumar Retires: राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेता मनोज कुमार ने लिया संन्यास, अब करेंगे नई शुरुआत","category":{"title":"Sports","title_hn":"खेल","slug":"sports"}}
Manoj Kumar Retires: राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेता मनोज कुमार ने लिया संन्यास, अब करेंगे नई शुरुआत
Thu, 30 Jan 2025 07:22 PM IST
Mayank Tripathi
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Mayank Tripathi
Updated Thu, 30 Jan 2025 07:22 PM IST
सार
लाइट वेल्टरवेट (64 किग्रा) में प्रतिस्पर्धा करने वाले 39 वर्षीय मुक्केबाज ने 2010 दिल्ली में अपना पहला और राष्ट्रमंडल खेलों का एकमात्र स्वर्ण पदक जीता था। वह एशियाई चैंपियनशिप में दो बार के कांस्य पदक विजेता भी हैं।
विज्ञापन
मनोज कुमार
- फोटो : www.olympics.com
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेता मुक्केबाज मनोज कुमार ने गुरुवार को संन्यास का एलान कर दिया। अब वह नई पारी की शुरुआत करेंगे और मुक्केबाजों को कोचिंग देंगे। दो बार के ओलंपियन मनोज 2012 लंदन और 2016 रियो दि जिनेरियो दोनों में प्री क्वार्टरफाइनल तक पहुंचे थे।
विज्ञापन
2010 में जीता स्वर्ण पदक
लाइट वेल्टरवेट (64 किग्रा) में प्रतिस्पर्धा करने वाले 39 वर्षीय मुक्केबाज ने 2010 दिल्ली में अपना पहला और राष्ट्रमंडल खेलों का एकमात्र स्वर्ण पदक जीता था। वह एशियाई चैंपियनशिप में दो बार के कांस्य पदक विजेता भी हैं। राष्ट्रमंडल खेलों में दूसरा और अंतिम कांस्य पदक उन्होंने 2018 गोल्ड कोस्ट खेलों में जीता था।
लाइट वेल्टरवेट (64 किग्रा) में प्रतिस्पर्धा करने वाले 39 वर्षीय मुक्केबाज ने 2010 दिल्ली में अपना पहला और राष्ट्रमंडल खेलों का एकमात्र स्वर्ण पदक जीता था। वह एशियाई चैंपियनशिप में दो बार के कांस्य पदक विजेता भी हैं। राष्ट्रमंडल खेलों में दूसरा और अंतिम कांस्य पदक उन्होंने 2018 गोल्ड कोस्ट खेलों में जीता था।
विज्ञापन
विज्ञापन
मनोज ने क्यों लिया संन्यास
हरियाणा के कैथल के इस मुक्केबाज ने कहा, अब मैं 40 साल का हो गया हूं तो यह सोच समझकर लिया गया फैसला है क्योंकि अंतरराट्रीय नियमों के अनुसार एमेच्योर प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं ले सकता। मैं संतुष्ट हूं क्योंकि देश का प्रतिनिधित्व करते हुए मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया।
हरियाणा के कैथल के इस मुक्केबाज ने कहा, अब मैं 40 साल का हो गया हूं तो यह सोच समझकर लिया गया फैसला है क्योंकि अंतरराट्रीय नियमों के अनुसार एमेच्योर प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं ले सकता। मैं संतुष्ट हूं क्योंकि देश का प्रतिनिधित्व करते हुए मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया।
मुक्केबाज का करियर
मनोज ने अपना मुक्केबाजी करियर 1997 में जूनियर स्तर पर शुरू किया था और 2021 में पटियाला में राष्ट्रीय खेल संस्थान से कोचिंग डिप्लोमा हासिल किया था। चोटों और चयन मुद्दे पर राष्ट्रीय महासंघ के साथ विवाद के कारण उनका करियर गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों के बाद थम गया और वह इसके बाद किसी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में नहीं खेले।
मनोज ने अपना मुक्केबाजी करियर 1997 में जूनियर स्तर पर शुरू किया था और 2021 में पटियाला में राष्ट्रीय खेल संस्थान से कोचिंग डिप्लोमा हासिल किया था। चोटों और चयन मुद्दे पर राष्ट्रीय महासंघ के साथ विवाद के कारण उनका करियर गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों के बाद थम गया और वह इसके बाद किसी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में नहीं खेले।