{"_id":"597497744f1c1b4f4b8b4722","slug":"captain-mitali-raj-s-dream-was-not-cricket","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"कैप्टन मिताली राज का सपना क्रिकेट नहीं था।","category":{"title":"Sports","title_hn":"खेल ","slug":"sports"}}
कैप्टन मिताली राज का सपना क्रिकेट नहीं था।
बीबीसी हिंदी
Updated Sun, 23 Jul 2017 06:02 PM IST
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mitali raj
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आईसीसी महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप 2017 के फ़ाइनल मुक़ाबले तक पहुंची भारतीय टीम की कप्तान मिताली राज का सपना क्रिकेट नहीं कुछ और था। मिताली ने किस तरह क्रिकेट की दुनिया में क़दम रखा और किन मुश्किलों को झेलते हुए आज एक सफ़ल कप्तान हैं, इन सब बातों पर बीबीसी से बात की मिताली के पिता दोराय राज और मां लीला राज ने।
क्या बचपन से मिताली का रुझान क्रिकेट की तरफ था।
मां: नहीं. उसका इंटरेस्ट डांस पर था. स्पोर्ट्स, क्रिकेट में बायचांस वह आ गईं।
महिला क्रिकेटर, कराटे चैंपियन और फ़्लाइट लेफ़्टिनेंट भी।
'स्मृति मंधाना महिला क्रिकेट की सचिन तेंदुलकर हैं'।
इतिहास रचने से एक कदम दूर महिला टीम इंडिया।
जब उन्होंने कहा कि वह क्रिकेट खेलना चाहती हैं तो आपका रिएक्शन क्या था।
पिता: यह उनकी नहीं मेरी कोशिश थी। वह सुबह काफ़ी देर से जागती थीं और आलसी भी थीं। उसे एक्टिव बनाने के लिए मैं बेटे के साथ उसे भी ग्राउंड पर ले जाने लगा। वहां कुछ समय बिताने के बाद मैं उन्हें प्लास्टिक बॉल और टेनिस बॉल फेंकने के लिए कहता। उस समय वहां कोच ज्योति प्रसाद थे। वो देखते थे कि लड़की बढ़िया गेंद फेंकती है।
ज्योति प्रसाद ने उन्हें एक हफ़्ते के लिए ट्रायल पर रखा और रोज 10 मिनट बैटिंग के लिए देते थे। एक दिन उन्होंने कहा कि इस लड़की में टैलेंट है। आप इसे प्रॉपर क्रिकेट कैंप में भेजिए. मैंने पूछा लड़कियों के लिए प्रॉपर कैंप कहां है देश में। उसके स्कूल में संपत कुमार लड़कियों को क्रिकेट की कोचिंग देते थे। हमने उनसे बात की और फिर जो कुछ हुआ वो इतिहास है। मिताली बचपन में काफ़ी आलसी थीं, क्या वो उससे बाहर आ चुकी हैं या उन्हें अब भी कड़ी मेहनत करनी पड़ती है।
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मां: मुझे लगता है वो अभी भी आलसी हैं. क्रिकेट ने उन्हें बदला है. पहले उनकी सोने की आदत से परेशान होकर हमने उन्हें क्रिकेट खेलने के लिए भेजा. लेकिन उनका जो आलसीपन था वही उसका प्लस प्वाइंट रहा है. वह अपनी नींद से समझौता नहीं कर सकती हैं। उन्हें आठ घंटे की नींद हर हाल में चाहिए। मिताली को हाल ही में मैच के बाद किताब पढ़ते देखा गया है। उनकी कोई और हॉबी है।
पिता: मुझे लगता है कि किताबों के अलावा म्यूज़िक उन्हें पसंद है. बीच में जब दो महीने का रेस्ट था, कोई मैच कोई सीरीज़ नहीं थी तो वह मेरे पास आईं और कहा कि उन्हें गिटार सीखना है। मैंने उनसे पूछा कि वह अब कैसे करेंगी? तो उन्होंने कहा कि बस आप गिटार टीचर ढूंढ़ो।
मैं सीख लूंगी। उन्होंने महीने सीरियस होकर गिटार सीखा। जब क्रिकेट शुरू हो गया तो उन्होंने गिटार हो या कुछ और सब कुछ साइड कर दिया। उसके पहले क़रीब तीन साल पहले उन्होंने अपनी मम्मी से कहा कि उसे पेंटिंग सीखनी है। उसने तीन महीने तक पेंटिंग बनाना सीखा और कुछ अच्छी पेंटिंग उसकी हैं। हम उसकी हर चाहत पूरी करने की कोशिश करते हैं। उसके पास क़रीब 400-500 किताबें हैं. इनमें से ज़्यादातर आत्मकथाएं हैं।
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क्या बचपन से मिताली का रुझान क्रिकेट की तरफ था।
मां: नहीं. उसका इंटरेस्ट डांस पर था. स्पोर्ट्स, क्रिकेट में बायचांस वह आ गईं।
महिला क्रिकेटर, कराटे चैंपियन और फ़्लाइट लेफ़्टिनेंट भी।
'स्मृति मंधाना महिला क्रिकेट की सचिन तेंदुलकर हैं'।
इतिहास रचने से एक कदम दूर महिला टीम इंडिया।
जब उन्होंने कहा कि वह क्रिकेट खेलना चाहती हैं तो आपका रिएक्शन क्या था।
पिता: यह उनकी नहीं मेरी कोशिश थी। वह सुबह काफ़ी देर से जागती थीं और आलसी भी थीं। उसे एक्टिव बनाने के लिए मैं बेटे के साथ उसे भी ग्राउंड पर ले जाने लगा। वहां कुछ समय बिताने के बाद मैं उन्हें प्लास्टिक बॉल और टेनिस बॉल फेंकने के लिए कहता। उस समय वहां कोच ज्योति प्रसाद थे। वो देखते थे कि लड़की बढ़िया गेंद फेंकती है।
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ज्योति प्रसाद ने उन्हें एक हफ़्ते के लिए ट्रायल पर रखा और रोज 10 मिनट बैटिंग के लिए देते थे। एक दिन उन्होंने कहा कि इस लड़की में टैलेंट है। आप इसे प्रॉपर क्रिकेट कैंप में भेजिए. मैंने पूछा लड़कियों के लिए प्रॉपर कैंप कहां है देश में। उसके स्कूल में संपत कुमार लड़कियों को क्रिकेट की कोचिंग देते थे। हमने उनसे बात की और फिर जो कुछ हुआ वो इतिहास है। मिताली बचपन में काफ़ी आलसी थीं, क्या वो उससे बाहर आ चुकी हैं या उन्हें अब भी कड़ी मेहनत करनी पड़ती है।
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मां: मुझे लगता है वो अभी भी आलसी हैं. क्रिकेट ने उन्हें बदला है. पहले उनकी सोने की आदत से परेशान होकर हमने उन्हें क्रिकेट खेलने के लिए भेजा. लेकिन उनका जो आलसीपन था वही उसका प्लस प्वाइंट रहा है. वह अपनी नींद से समझौता नहीं कर सकती हैं। उन्हें आठ घंटे की नींद हर हाल में चाहिए। मिताली को हाल ही में मैच के बाद किताब पढ़ते देखा गया है। उनकी कोई और हॉबी है।
पिता: मुझे लगता है कि किताबों के अलावा म्यूज़िक उन्हें पसंद है. बीच में जब दो महीने का रेस्ट था, कोई मैच कोई सीरीज़ नहीं थी तो वह मेरे पास आईं और कहा कि उन्हें गिटार सीखना है। मैंने उनसे पूछा कि वह अब कैसे करेंगी? तो उन्होंने कहा कि बस आप गिटार टीचर ढूंढ़ो।
मैं सीख लूंगी। उन्होंने महीने सीरियस होकर गिटार सीखा। जब क्रिकेट शुरू हो गया तो उन्होंने गिटार हो या कुछ और सब कुछ साइड कर दिया। उसके पहले क़रीब तीन साल पहले उन्होंने अपनी मम्मी से कहा कि उसे पेंटिंग सीखनी है। उसने तीन महीने तक पेंटिंग बनाना सीखा और कुछ अच्छी पेंटिंग उसकी हैं। हम उसकी हर चाहत पूरी करने की कोशिश करते हैं। उसके पास क़रीब 400-500 किताबें हैं. इनमें से ज़्यादातर आत्मकथाएं हैं।
mitali raj
आपने बताया कि शुरुआत में उन्हें क्रिकेट ट्रेनिंग दिलाने में भी मुश्किल थी। आपको क्या लगता है अभी कुछ बदला है।
पिता: बड़े बदलाव देखने को मिले हैं. सिर्फ़ क्रिक्रेट में ही नहीं सानिया मिर्जा, सिंधु, साइना नेहवाल... ख़ासकर हैदराबाद में. ये सारी लड़कियां हैदराबाद से हैं. लोग पूछते भी हैं हैदराबाद ही क्यों, तो मैं कहता हूं कि यहां के पानी में कुछ ताक़त है। अब बहुत सी लड़कियां हैं जो क्रिकेट खेल रही हैं। उनके पैरेंट्स भी इसमें सपोर्ट कर रहे हैं। अब चीज़ें बदल रही हैं। स्पोर्ट्स अब करियर बन चुका है।
मैं देखता हूं अब ट्रेनिंग के लिए लड़कियां अलग-अलग कैंप में जा रही हैं। मिताली एकेडमिक करियर के बजाय स्पोर्ट्स में जाती हैं। एक मां के तौर पर आने वाले सालों में आप इसे किस तरह देखती हैं।
मां: मुझे लगता है उन्हें सोचना चाहिए कि हम स्पोर्ट्स को करियर बना सकते हैं लेकिन एकेडमिक्स भी ज़रूरी है क्योंकि आपको वो आत्मविश्वास चाहिए. एजुकेशन के ज़रिए कई समस्याएं सुलझाई जा सकती हैं. इससे आपमें आत्मविश्वास आता है। मिताली शायद अपने स्कूल से इकलौती लड़की है जो इंटरनेशनल स्पोर्ट्स में गईं है।
आपका शुरुआती रिएक्शन क्या था जब आपने देखा कि भारतीय टीम फ़ाइनल में पहुंच गई। मिताली से आपकी क्या बात हुई।
मां: सच कहूं तो सबको लगता है कि हम क्रिकेट में बात करते होंगे लेकिन ऐसा नहीं है. मेरी उससे क्रिकेट पर कोई बात नहीं होती।
पिता: मेरी बातचीत हुई उनसे क्रिकेट को लेकर. स्मृति जो प्लेयर है वह अच्छा परफॉर्म नहीं कर रही. मैंने उसे सुझाव दिया कि उसे थोड़ा नीचे रख सकते हैं. लेकिन ये मेरा सुझाव बस है। हम वहां के मौसम के बारे में बात करते हैं. पिच के बारे में बात करते हैं. वह हमें सब बताती हैं जितना हमें बताना चाहिए. बाकी कैप्टन और कोच का मामला होता है।
पिता: बड़े बदलाव देखने को मिले हैं. सिर्फ़ क्रिक्रेट में ही नहीं सानिया मिर्जा, सिंधु, साइना नेहवाल... ख़ासकर हैदराबाद में. ये सारी लड़कियां हैदराबाद से हैं. लोग पूछते भी हैं हैदराबाद ही क्यों, तो मैं कहता हूं कि यहां के पानी में कुछ ताक़त है। अब बहुत सी लड़कियां हैं जो क्रिकेट खेल रही हैं। उनके पैरेंट्स भी इसमें सपोर्ट कर रहे हैं। अब चीज़ें बदल रही हैं। स्पोर्ट्स अब करियर बन चुका है।
मैं देखता हूं अब ट्रेनिंग के लिए लड़कियां अलग-अलग कैंप में जा रही हैं। मिताली एकेडमिक करियर के बजाय स्पोर्ट्स में जाती हैं। एक मां के तौर पर आने वाले सालों में आप इसे किस तरह देखती हैं।
मां: मुझे लगता है उन्हें सोचना चाहिए कि हम स्पोर्ट्स को करियर बना सकते हैं लेकिन एकेडमिक्स भी ज़रूरी है क्योंकि आपको वो आत्मविश्वास चाहिए. एजुकेशन के ज़रिए कई समस्याएं सुलझाई जा सकती हैं. इससे आपमें आत्मविश्वास आता है। मिताली शायद अपने स्कूल से इकलौती लड़की है जो इंटरनेशनल स्पोर्ट्स में गईं है।
आपका शुरुआती रिएक्शन क्या था जब आपने देखा कि भारतीय टीम फ़ाइनल में पहुंच गई। मिताली से आपकी क्या बात हुई।
मां: सच कहूं तो सबको लगता है कि हम क्रिकेट में बात करते होंगे लेकिन ऐसा नहीं है. मेरी उससे क्रिकेट पर कोई बात नहीं होती।
पिता: मेरी बातचीत हुई उनसे क्रिकेट को लेकर. स्मृति जो प्लेयर है वह अच्छा परफॉर्म नहीं कर रही. मैंने उसे सुझाव दिया कि उसे थोड़ा नीचे रख सकते हैं. लेकिन ये मेरा सुझाव बस है। हम वहां के मौसम के बारे में बात करते हैं. पिच के बारे में बात करते हैं. वह हमें सब बताती हैं जितना हमें बताना चाहिए. बाकी कैप्टन और कोच का मामला होता है।
mitali raj
क्या आप मिताली के खेलने से पहले कुछ सेंटीमेंटल रूटीन फॉलो करते हैं।
पिता: मैच से पहले उससे बात करते हुए मैं सिर्फ़ आंखें बंद करके गणेश और साईं बाबा के बारे में सोचता हूं। मुझे लगता है कि ऐसे मैं उन्हें पॉजिटिव तरंगे पास करता हूं। हर मैच से पहले वह हमें फ़ोन ज़रूर करती हैं। जब भी वह कहीं जाती हैं तो मैं उसे हमेशा छोड़ने जाता हूं और रिसीव करने भी जाता हूं।
भारतीय महिलाएं हर क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं, चाहे वह स्पोर्ट्स हो या साइंस हो. लेकिन एक सवाल है। जो हर कोई जानना चाहता है- मिताली कब शादी कर रही हैं। आप इस पर कैसे रिएक्ट करते हैं।
पापा: हमारे लिए ये कॉमन सवाल हो गया है. हमें अब इससे फ़र्क नहीं पड़ता। बहुत से लोग पूछते है तो मैं कहता हूं कि आप क्यों इतनी दिलचस्पी ले रहे हैं. यहां तक कि मेरी बहनें भी यही पूछती हैं, लेकिन हम किसी तरह का प्रेशर नहीं डालना चाहते हैं. जब होना होगा पूरी दुनिया को पता चलेगा।
मिताली कहती है कि क्रिकेट मेरे लिए पहली प्राथमिकता है। शादी दूसरी। मुझे ऐसे आदमी से शादी नहीं करनी जो पूछने लगे कि क्रिकेट कब छोड़ रही हो। वो कहती है मुझे फ़र्क नहीं पड़ता कि लोग क्या कहते हैं।
पिता: मैच से पहले उससे बात करते हुए मैं सिर्फ़ आंखें बंद करके गणेश और साईं बाबा के बारे में सोचता हूं। मुझे लगता है कि ऐसे मैं उन्हें पॉजिटिव तरंगे पास करता हूं। हर मैच से पहले वह हमें फ़ोन ज़रूर करती हैं। जब भी वह कहीं जाती हैं तो मैं उसे हमेशा छोड़ने जाता हूं और रिसीव करने भी जाता हूं।
भारतीय महिलाएं हर क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं, चाहे वह स्पोर्ट्स हो या साइंस हो. लेकिन एक सवाल है। जो हर कोई जानना चाहता है- मिताली कब शादी कर रही हैं। आप इस पर कैसे रिएक्ट करते हैं।
पापा: हमारे लिए ये कॉमन सवाल हो गया है. हमें अब इससे फ़र्क नहीं पड़ता। बहुत से लोग पूछते है तो मैं कहता हूं कि आप क्यों इतनी दिलचस्पी ले रहे हैं. यहां तक कि मेरी बहनें भी यही पूछती हैं, लेकिन हम किसी तरह का प्रेशर नहीं डालना चाहते हैं. जब होना होगा पूरी दुनिया को पता चलेगा।
मिताली कहती है कि क्रिकेट मेरे लिए पहली प्राथमिकता है। शादी दूसरी। मुझे ऐसे आदमी से शादी नहीं करनी जो पूछने लगे कि क्रिकेट कब छोड़ रही हो। वो कहती है मुझे फ़र्क नहीं पड़ता कि लोग क्या कहते हैं।