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Hindi News ›   Sports ›   Big disclosure of four-time Olympic winning British athlete His name is Hussein Abdi Kahin not Mo Farah

Mo Farah: चार साल की उम्र में तस्करी कर इंग्लैंड लाया गया था एथलीट, चार ओलंपिक में जीते पदक

Wed, 13 Jul 2022 12:29 AM IST
शक्तिराज सिंह स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लंदन
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: शक्तिराज सिंह Updated Wed, 13 Jul 2022 12:29 AM IST
सार

चार बार के ओलंपिक विजेता ब्रिटिश एथलीट ने बताया है कि उनका नाम मो फराह नहीं हुसैन आब्दी काहिन है। सर मो फराह 4 साल की उम्र में तस्करी कर इंग्लैंड लाए गए थे। 
 

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Big disclosure of four-time Olympic winning British athlete His name is Hussein Abdi Kahin not Mo Farah
मोहम्मद फराह ने बताया है कि उनका नाम हुसैन आब्दी काहिन है - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

दुनिया के नामी लंबी दूरी के एथलीटों में शुमार इंग्लैंड के सर मो फराह (मोहम्मद फराह) ने लोगों को हिला देना वाला खुलासा किया है। लंदन और रियो ओलंपिक में 5000, 10000 मीटर के चार स्वर्ण पदक जीतने वाले एथलीट ने बीबीसी1 की डॉक्यूमेंट्री में खुलासा किया है कि वह मो फराह नहीं हैं, उनका नाम हुसैन आब्दी काहिन है। चार साल की उम्र में उन्हें जिबूती से तस्करी कर बाल मजदूर के रूप में इंग्लैंड लाया गया था। असली मोहम्मद फराह उस औरत का सौतेला पुत्र है, जो सर मो से अमानवीय तरीके से घर के सारे काम कराती थी (बच्चों की देखभाल, उनके कपड़े बदलना, दूध देना आदि)। मो फराह के मुताबिक जब वह चार साल के थे तो उनके पिता सोमालिया में घरेलू युद्ध में मार दिए गए थे।
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रिश्तेदार ने ही इंग्लैंड में बेच दिया
39 वर्षीय मो फराह बताते हैं कि उनका जुड़वां भाई हसन भी है। उनका मां आइशा ने सोमालिया के बदतर हालातों को देख उन्हें पड़ोसी देश जिबूती रिश्तेदार के पास ले आईं, लेकिन उन्हीं के एक रिश्तेदार ने उन्हें तस्करी कर इंग्लैंड में बेच दिया। वह आइलवर्थ (पश्चिम लंदन) भेजे गए थे। उनका मोहम्मद फराह के नाम से के स्कूल में एडमीशन कराया गया, लेकिन वह घर की ज्यादतियों से तंग आ गए थे। एक दिन उन्होंने अपने साथ हो रही ज्यादतियों को स्कूल की अध्यापिका को बता दिया। इसके बाद उन्हें वहां से मुक्त कराकर एक सोमालियाई महिला किंसी को सौंपा गया। वही उनकी रियल ऑंटी हैं। उन्होंने ने ही उन्हें पाला।
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बच्चों के कहने पर बोला सच
2017 में ब्रिटेन को दी गई सेवाओं के लिए उन्हें नाइटहुड (सर की उपाधि) से सम्मानित किया गया। मो फराह बताते हैं कि वह लंबे समय से इस सच को इस वजह से छुपाते आ रहे थे कि उनके मन में डर था कि कहीं उनकी ब्रिटिश नागरिकता न चली जाए। उन्होंने झूठ बोलकर इस देश की नागरिकता ली थी। उनकी शादी तानिया के साथ हुई है, जिनसे उनकी दो जुड़वां बेटियां आईशा, अमानी और छह साल के बाद हुसैन है। फराह बताते हैं कि जब भी उनके बच्चे उनसे पूछते कि वह यहां कैसे आए तो उनके मन में बोझ पड़ जाता कि वह इस देश के लोगों से झूठ बोल रहे हैं। बच्चों के कहने पर ही उन्होंने फैसला लिया कि वह दुनिया के सामने सच लेकर आएंगे, चाहें उन्हें इसकी कितनी ही बड़ी कीमत क्यों न चुकानी पड़े। 
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14 साल की उम्र में ब्रिटिश नागरिकता ली
ऑंटी किंसी के परिवार ने फराह को पश्चिम लंदन के फेल्दम कम्यूनिटी कॉलेज, हाउंसलो में डाला, जहां उनके दौडने की अंदरूनी प्रतिभा लोगों के सामने आई। फराह के मुताबिक 14 साल की उम्र तक वह बिना ब्रिटिश नागरिकता के इंग्लैंड में रह रहे थे, लेकिन इस उम्र में उन्हें स्कूल कंपटीशन खेलने लातविया जाना था। उनके खेल अध्यापक एलन वाटकिंसन ने तब कहा कि फराह के पास यात्रा करने के लिए जरूरी कागज नहीं हैं। उनके पास ऐसा कोई कागज नहीं है कि वह कहां से आए हैं। इसके बाद ही उन्होंने मोहम्मद फराह के नाम से ब्रिटिश नागरिकता लेने की औपचारिकताएं लेना शुरु किया। 

रेस्टोरेंट में काम करने के दौरान ग्राहक ने बताया मां जिंदा है
सन 2000 में उनका एथलेटिक कॅरिअर परवान चढने लगा था और वह एक सोमालियाई रेस्टोरेंट में काम करते थे। एक ग्राहक ने उन्हें एक वीडियो कैसेट देते हुए कहा कि उनकी मां सोमालिया में जिंदा है। वह अभी तक यही समझते थे कि उनके माता-पिता गृह युद्ध में मारे जा चुके हैं। उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि उनकी मां जिंदा है। कैसेट में उनकी मां उनकी याद में दुख भरे गाने, कविताएं और लोकगीत गा रही थीं। कैसेट में ही नंबर था। इसके  बाद उन्होंने अपनीं मां से पहली बार बात की। मो फराह अपने पुत्र हुसैन के साथ मां से मिलने से सोमालिया भी गए।

फराह की मां कहती हैं कि जिबूती में उनसे कहा गया था कि वह और उनके दोनों बच्चे साथ में इंग्लैंड जाएंगे, लेकिन उनके एक बेटे को वहां भेज दिया गया। मो फराह ने पहले बताया था कि उनके पिता मुक्तार ब्रिटिश नागरिक थे। सोमालिया में उनकी मां से उनका संपर्क हुआ। गृह युद्ध के बाद दोनों ब्रिटेन आ गए, जहां उनका जन्म हुआ। 
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