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एशियन गेम्स 2026: पदक जीता, लेकिन नौकरी अब भी नहीं; क्या एश्वर्य तोमर की ये गुहार सुनेगी मध्य प्रदेश सरकार?
Fri, 25 Sep 2026 04:22 PM IST
मयंक त्रिपाठी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची नागोया
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची नागोया
Published by: मयंक त्रिपाठी
Updated Fri, 25 Sep 2026 04:22 PM IST
सार
एशियन गेम्स में 50 मीटर राइफल तीन अवस्थाओं की टीम स्पर्धा में रजत पदक जीतने के बाद एश्वर्य प्रताप सिंह तोमर ने अपने रोजगार को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि उनके पास फिलहाल नौकरी नहीं है और उम्मीद है कि मध्य प्रदेश सरकार अब इस दिशा में कोई कदम उठाएगी।
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एश्वर्य प्रताप सिंह तोमर
- फोटो : ANI
विस्तार
भारतीय निशानेबाज एश्वर्य प्रताप सिंह तोमर ने एशियन गेम्स में पुरुषों की 50 मीटर राइफल तीन अवस्थाओं की टीम स्पर्धा में रजत पदक जीतने के बाद अपने रोजगार को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि फिलहाल उनके पास नौकरी नहीं है और उन्हें उम्मीद है कि मध्य प्रदेश सरकार अब रोजगार को लेकर कुछ कदम उठाएगी। एश्वर्य ने नीरज कुमार और रुद्रांक्ष पाटिल के साथ मिलकर भारत को इस स्पर्धा में रजत पदक दिलाया। भारतीय टीम ने 1762-94एक्स अंक हासिल किए और चीन के बाद दूसरे स्थान पर रही। चीन ने 1766-95एक्स के साथ स्वर्ण, जबकि दक्षिण कोरिया ने 1751-87एक्स के साथ कांस्य पदक जीता।
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'व्यक्तिगत पदक नहीं जीतने का थोड़ा दुख है'
एश्वर्य ने टीम के रजत पदक पर खुशी जताई, लेकिन व्यक्तिगत स्पर्धा में पदक से चूकने का मलाल भी जाहिर किया। वह और नीरज दोनों व्यक्तिगत फाइनल में पहुंचे थे, लेकिन पदक नहीं जीत सके। एश्वर्य ने कहा, 'अच्छा लग रहा है कि हमने टीम का रजत पदक जीता। मेरा प्रयास व्यक्तिगत पदक जीतने का भी था, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो पाया। इससे थोड़ी निराशा है। आने वाले समय में मैं और मेहनत करूंगा और भारत के लिए और पदक जीतूंगा।'
एश्वर्य ने टीम के रजत पदक पर खुशी जताई, लेकिन व्यक्तिगत स्पर्धा में पदक से चूकने का मलाल भी जाहिर किया। वह और नीरज दोनों व्यक्तिगत फाइनल में पहुंचे थे, लेकिन पदक नहीं जीत सके। एश्वर्य ने कहा, 'अच्छा लग रहा है कि हमने टीम का रजत पदक जीता। मेरा प्रयास व्यक्तिगत पदक जीतने का भी था, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो पाया। इससे थोड़ी निराशा है। आने वाले समय में मैं और मेहनत करूंगा और भारत के लिए और पदक जीतूंगा।'
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रोजगार को लेकर क्या बोले?
अपने पदक को देशवासियों, परिवार और दोस्तों को समर्पित करते हुए एश्वर्य ने रोजगार को लेकर कहा, 'मेरे पास नौकरी नहीं है, लेकिन मुझे उम्मीद है कि अब मध्य प्रदेश सरकार रोजगार को लेकर कुछ करेगी, क्योंकि काफी समय से इस बारे में बात हो रही है।' एश्वर्य ने सरकार की खेल योजनाओं और खेल ढांचे में हुए विकास की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया और टॉप्स जैसी योजनाओं ने खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय और ओलंपिक स्तर तक पहुंचने में मदद की है।
अपने पदक को देशवासियों, परिवार और दोस्तों को समर्पित करते हुए एश्वर्य ने रोजगार को लेकर कहा, 'मेरे पास नौकरी नहीं है, लेकिन मुझे उम्मीद है कि अब मध्य प्रदेश सरकार रोजगार को लेकर कुछ करेगी, क्योंकि काफी समय से इस बारे में बात हो रही है।' एश्वर्य ने सरकार की खेल योजनाओं और खेल ढांचे में हुए विकास की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया और टॉप्स जैसी योजनाओं ने खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय और ओलंपिक स्तर तक पहुंचने में मदद की है।
व्यक्तिगत स्पर्धा में पांचवें स्थान पर रहे एश्वर्य
- टीम स्पर्धा के बाद एश्वर्य और नीरज ने 50 मीटर राइफल तीन अवस्थाओं की व्यक्तिगत स्पर्धा के फाइनल में जगह बनाई।
- एश्वर्य 327.6 अंक के साथ पांचवें स्थान पर रहे। वह शुरुआती दौर में पदक की दौड़ में बने हुए थे। प्रवण अवस्था के बाद वह छठे स्थान पर थे और घुटने के बल निशाना लगाने के दूसरे दौर के बाद 205.3 अंक के साथ पांचवें स्थान पर पहुंच गए, लेकिन अंत में पांचवें स्थान पर ही रहे।
- नीरज के लिए व्यक्तिगत फाइनल अधिक चुनौतीपूर्ण रहा और वह 299.0 अंक के साथ आठवें स्थान पर रहे। चीन के युकुन लियू ने 360.5 अंक के खेलों के रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता। उनके हमवतन झांग चांगहोंग ने 360.2 अंक के साथ रजत और कजाखस्तान के इस्लाम सतपायेव ने 348.3 अंक के साथ कांस्य पदक जीता।
नीरज
- फोटो : NRAI/IANS
नीरज बोले- शुरुआत से ही घुटने के बल निशाना लगाने में परेशानी हुई
नीरज ने व्यक्तिगत फाइनल में अपने प्रदर्शन को लेकर कहा कि उन्हें शुरुआत से ही घुटने के बल निशाना लगाने वाली अवस्था में परेशानी हुई। उन्होंने कहा कि बाकी चीजें ठीक थीं और वह इस कमी पर आगे काम करेंगे। हालांकि, टीम रजत पदक को लेकर नीरज काफी खुश नजर आए। उन्होंने अपना पदक परिवार और भारतीय नौसेना को समर्पित किया। नीरज ने कहा कि उनके परिवार के त्याग की भी इस पदक में बड़ी भूमिका है।
नीरज ने व्यक्तिगत फाइनल में अपने प्रदर्शन को लेकर कहा कि उन्हें शुरुआत से ही घुटने के बल निशाना लगाने वाली अवस्था में परेशानी हुई। उन्होंने कहा कि बाकी चीजें ठीक थीं और वह इस कमी पर आगे काम करेंगे। हालांकि, टीम रजत पदक को लेकर नीरज काफी खुश नजर आए। उन्होंने अपना पदक परिवार और भारतीय नौसेना को समर्पित किया। नीरज ने कहा कि उनके परिवार के त्याग की भी इस पदक में बड़ी भूमिका है।
राष्ट्रीय कैडेट कोर से शुरू हुआ नीरज का निशानेबाजी सफर
पंजाब के होशियारपुर जिले के बेह्मावा गांव के रहने वाले नीरज ने बताया कि उनके निशानेबाजी के सफर की शुरुआत राष्ट्रीय कैडेट कोर से हुई थी। उनके पिता 2013 में सेना से सेवानिवृत्त हुए, जबकि उनके भाई अभी सेना में सेवा दे रहे हैं। नीरज ने शुरुआती संघर्ष को याद करते हुए बताया कि राष्ट्रीय कैडेट कोर में एक साल तक निशानेबाजी करने के बाद उन्हें अपना हथियार नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने अपने माता-पिता से अपना हथियार दिलाने का आग्रह किया। उनके माता-पिता ने भी उनकी प्रतिभा पर भरोसा जताया और उनका साथ दिया।
पंजाब के होशियारपुर जिले के बेह्मावा गांव के रहने वाले नीरज ने बताया कि उनके निशानेबाजी के सफर की शुरुआत राष्ट्रीय कैडेट कोर से हुई थी। उनके पिता 2013 में सेना से सेवानिवृत्त हुए, जबकि उनके भाई अभी सेना में सेवा दे रहे हैं। नीरज ने शुरुआती संघर्ष को याद करते हुए बताया कि राष्ट्रीय कैडेट कोर में एक साल तक निशानेबाजी करने के बाद उन्हें अपना हथियार नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने अपने माता-पिता से अपना हथियार दिलाने का आग्रह किया। उनके माता-पिता ने भी उनकी प्रतिभा पर भरोसा जताया और उनका साथ दिया।
अब सरकार, नौसेना और प्रायोजकों से मिल रहा सहयोग
नीरज ने कहा कि शुरुआती दिनों के मुकाबले अब खिलाड़ियों को काफी अधिक सहयोग मिल रहा है। सरकार, भारतीय नौसेना और प्रायोजकों की मदद से प्रशिक्षण, जरूरी सामान खरीदने और विदेश में अभ्यास करने जैसी जरूरतें पूरी हो रही हैं। उन्होंने कहा कि इस सहयोग से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। अब उनकी जिम्मेदारी देश के लिए पदक जीतना है।
नीरज ने कहा कि शुरुआती दिनों के मुकाबले अब खिलाड़ियों को काफी अधिक सहयोग मिल रहा है। सरकार, भारतीय नौसेना और प्रायोजकों की मदद से प्रशिक्षण, जरूरी सामान खरीदने और विदेश में अभ्यास करने जैसी जरूरतें पूरी हो रही हैं। उन्होंने कहा कि इस सहयोग से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। अब उनकी जिम्मेदारी देश के लिए पदक जीतना है।